X Men Dark Phoenix Movie Review: एक्स-मेन श्रृंखला की ये नई फिल्म वैसे तो स्पेशल इफेक्ट की वजह से ज्यादा आकर्षित करती है लेकिन इसमे एक बड़ा दार्शनिक पहलू भी है। वो ये कि इंसान को किस तरह का होना चाहिए यानी क्या उसे दूसरे या नियति जैसे बनाना चाहे उस तरह का या खुद अपनी भावनाओं और विचारों के मुताबिक? फिल्म म्यूटांट केंद्रित है जो हॉलीवुड की फिल्मों में एक खास तरह की धारा रही है। सोफी टर्नर ने इसमें जीन नाम की एक महिला का किरदार निभाया है जो विशेष शक्ति रखती है और एक अंतरिक्ष अभियान में सूरज के बिल्कुल समीप चली जाती है। फिर उसके भीतर बहुत किस्म के असामान्य बदलाव होने लगते हैं। वो जब गुस्से में आती है आसपास के लोगों के अलावा दूसरी चीजों को भी ध्वस्त कर देती है।
चार्ल्स (जेम्स मैकवॉय) ने बचपन मे जीन की काफी मदद की थी। चार्ल्स एक वैज्ञानिक है जो लोगों के दिमाग पढ़ सकता है और उसमें कुछ पेरबदल भी कर सकता है। इस फेरबदल की वजह से लोगों के या म्यूटांट की आदतें बदल सकती है। जेम्स का अमेरिकी शासन तंत्र पर भी काफी प्रभाव है और राष्ट्रपति भी उससे कई मसलों पर सलाह मशवरा करते हैं। लेकिन जब जीन का व्यवहार बदल जाता है तो चार्ल्स भी उसे संभालने में असमर्थ हो जाता है और जीन अनियंत्रित हो जाती है। म्यूटांट को नियंत्रित करनेवाली कुछ ताकते जीन को अपने साथ लाना चाहती है और चार्ल्स सहित कुछ लोगों को मारना चाहती है। क्या जीन ऐसा करेगी या वो फिर चार्ल्स का साथ देगी?
फिल्म तकनीकी प्रभावों से भरी है। कई एक्शन सीक्वेंस तो लाजबाब है। जैसे आखिरी दृश्य में ट्रेन में जिस तरह के एक्शन हैं वो बेहद चमत्कारिक हैं। लेकिन इस फिल्म का मूल संदेश मानवीय भावनाओं को तरजीह देना है। वैसे ये फिल्म एक्स-मेन की श्रृंखला की आखिरी फिल्म मानी जा रही है।
एक्स –मेन : डार्क फीनिक्स (हिंदी-3 डी) (2 ½*)
निर्देशक- सिमन किंसबर्ग
कलाकार- सोफी टर्नर, जेम्स मैकवॉय, माईकेल फासबैंडेर, जेनिफर लारेंस, जेसिका चासटेन

