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रवींद्र त्र‍िपाठी के सभी पोस्ट

फिल्म बत्ती गुल मीटर चालू की समीक्षा: हंसी के लिफाफे में बंद एक अहम मुद्दा

फिल्म बिजली जैसी आम समस्या से जुड़ी है। देश में शायद ही कोई ऐसी जगह हो जहां बिजली का निजीकरण किया गया हो और...

फिल्म मंटो की समीक्षा: सिनेमाई परदे पर ‘मंटो’ का द्वंद्व

साल 2008 में गुजरात दंगों पर आधारित फिल्म ‘फिराक’ बनाने के दस साल बाद अभिनेत्री व निर्देशक नंदिता दास ‘मंटो’ के साथ फिर दर्शकों...

फिल्म मनमर्जियां की समीक्षा: प्रेम त्रिकोण की नई कहानी

यह फिल्म कुछ-कुछ संजय लीला भंसाली की फिल्म ‘हम दिल दे चुके सनम’ से भी प्रेरित नजर आती है। वहां भी हीरोइन अपने पहले...

फिल्म लैला मजनू की समीक्षा: ऐतिहासिक किरदारों को कमजोर करती फिल्म

फिल्म की सबसे बड़ी खूबी है कश्मीर के खूबसूरत नजारे। बहुत दिनों बाद किसी फिल्म में कश्मीर की जन्नत दिखी है। फिल्म के कुछ...

फिल्म पलटन की समीक्षा: फौजियों की जांबाजी तो दिखी पर नया कुछ भी नहीं

कलाकारों की बात करें तो ‘पलटन’ में केंद्रीय भूमिका कर्नल रॉय (अर्जुन रामपाल) और मेजर बिशन सिंह (सोनू सूद) की है। सेना के आला...

यहां पढ़ें फिल्म स्त्री और यमला पगला दीवाना फिर से की समीक्षा, ये हैं खास बातें

Film stree and Yamla Pagla Deewana phir se review: फिल्म स्त्री, ये भूतनी डराएगी और हंसाएगी भी तो उधार के किरदारों पर टिकी है...

हैप्पी फिर भाग जाएगी की फिल्म समीक्षा: शेरगिल की नहीं गिल की हो गई हैप्पी

Genius and happy phir bhag jayegi movie review: फिल्म तीन कलाकारों पर टिकी है- सोनाक्षी सिन्हा, जिमी शेरगिल और पीयूष मिश्रा। शेरगिल और पीयूष...

समीक्षा: ‘चक दे इंडिया’ की याद दिलाती ‘गोल्ड’ तो भ्रष्टाचार के खिलाफ एक और जंग है सत्यमेव जयते

अक्षय कुमार ने तपन दास नाम का जो किरदार निभाया है वह हॉकी और देश के लिए समर्पित है। उसकी रग-रग में देशप्रेम और...

फिल्म समीक्षा विश्वरूपम-2: जितनी बड़ी कलाकारी उतनी बड़ी रफूगिरी

वहीदा रहमान को मां की भूमिका में सामने लाकर फिल्म को थोड़ा जज्बाती पहलू भी दिया गया है। वैसे भी यह हमारी फिल्मों का...

मुल्क फिल्म समीक्षा: ‘हम बनाम तुम’ में उलझी ‘मुल्क’

हमारे देश में यह जुमला अक्सर दोहराया जाता है- ‘सभी मुसलमान आतंकवादी नहीं होते, लेकिन सभी आतंकवादी मुसलमान होते हैं’। अक्सर जब किसी आतंकी...

साहब बीवी और गैंगस्टर 3 फिल्म समीक्षा: गोली मार भेजे में

‘साहब बीवी और गैंगस्टर 3’ एक ढीली ढाली फिल्म बनके रह गई है। मध्यांतर के पहले बेहद धीमी गति से चलती है और उसके...

‘धड़क’ फिल्म समीक्षा: एक दुखांत प्रेम कहानी

दूसरी उत्सुकता मराठी फिल्म ‘सैराट’ (2016) के निर्देशक नागराज मंजुले को लेकर है, जिनकी इस फिल्म पर ‘धड़क’ बनी है। ‘सैराट’ दलित विमर्श को...

सूरमा: जिद और जुनून की दास्तां

इसमें संदेह नहीं कि यह फिल्म एक प्रेरणादायी कहानी है। किसी भी परिस्थिति में हार न मानने का हौसला देनेवाली। संदीप सिंह का जीवन...

हनुमान वर्सेज महिरावण की फिल्म समीक्षा: अहिरावण बन गया महिरावण

अहिरावण अपना रूप बदल सकता था। यहां तक कि अशरीरी हो सकता था और उसकी छाया भी नहीं दिखती थी। कहानी यह है कि...

द इनक्रेडिबल्स 2, फिल्म समीक्षा : सुपर हीरो पर प्रतिबंध

फिल्म में हंसी-मजाक के ऐसे कारनामे हैं जो जल्दी देखने को नहीं मिलते। जैसे एक दृश्य में एक औरत लाजवाब से कहती है कि...

रेस 3 फिल्म समीक्षा : ईद को खास बनाएगी सलमान की ईदी

रेस 3’ की कहानी शुरू में दिलचस्प लगती है लेकिन अंत तक आते-आते यह बेसिर-पैर की हो जाती है। अंत में लगता है कि...

फिल्म काला की समीक्षा : अशुभ नहीं शुभ का पर्याय ‘काला’

दक्षिण भारत में रजनीकांत के लाखों फैन हैं, लेकिन उत्तर भारत में भी उनके कम मुरीद नहीं है। ऐसे लोग, जो सिनेमाघर में सिर्फ...

फिल्म समीक्षा: ‘फेमस’, अच्छी कहानी, कमजोर सिनेमा

एक अच्छी कहानी लेकर भी आप फिल्म के साथ क्या गुलगपाड़ा कर सकते हैं इसका ताजा उदाहरण है ‘फेमस’। जिमी शेरगिल और केके मेनन...