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रवींद्र त्र‍िपाठी के सभी पोस्ट

kaalakaandi movie movie: चंद दिनों की जिंदगी

जिन लोगों ने 2011 में ‘डेल्ही बेली’ देखी होगी, उनको ‘कालाकांडी’ ( जो एक मराठी लफ्ज है) से काफी आशाएं होंगी।

Mukkabaaz Movie Review: बॉक्सिंग से ज्यादा बयानबाजी

यहां सब कुछ है जो एक अच्छी फिल्म के लिए चाहिए- एक मौलिक कहानी, आज के जमाने के औरत की चाहत, जाति प्रथा के...

Tiger Zinda Hai Movie Review: एक्शन और रोमांस का संगम

इस बार टाइगर (सलमान खान) इराक पहुंच गया है। क्यों? इसलिए कि वहां पचीस भारतीय नर्सें कैद में हंै।

My friends dulhania movie review: प्रेमिका की शादी

My friends dulhania movie review: आप किसी से बेपनाह मुहब्बत करें और वो अचानक आपकी जिंदगी से गायब हो जाए। फिर क्या होगा। आपको...

‘Fukrey Returns’ review: खजाने की खोज में

इस बार भोली पंजाबन (ऋचा चड्ढा) जेल से कुछ ज्यादा ही खूंखार होकर लौटी है। वह चारों फुकरों लाली (मनजोत सिंह), चूचा (वरुण शर्मा),...

Tera Intezaar movie review: अंग प्रदर्शन की सहारा

अगर आप सिर्फ गानों या आइटम नंबर देखने भर के लिए कोई फिल्म देखना चाहें तो इसे देख सकते हैं।

Firangi Movie Review: हंसोड़ की फिल्म में हंसी गायब

इस फिल्म में तीन चीजें नहीं है- इंटरटेनमेंट, इंटरटेनमेंट और इंटरटेनमेंट। फिर आप पूछ सकते हैं कि क्या है इसमें? तो जवाब में यह...

Julie 2 movie review: फिल्मी दुनिया की हकीकत

निर्देशक दीपक शिवदासानी या तो ये तय नहीं कर पाए या उन्होंने जानबूझकर ऐसा किया-पता नहीं।

Tumhari Sulu, Reviews: प्रेरणादायी मगर उबाऊ

मुंबई के एक अपार्टमेंट में एक औरत रहती है। नाम के सुलोचना (विद्या बालन) जिसे प्यार से उसका पति अशोक (मानव कौल) सुलुु कहता...

Rukh Movie Review: जज्बातों की उथल-पुथल

एक धीमी पर मनोविज्ञान के भीतर प्रवेश करनेवाली फिल्म। मनोविज्ञान के भी दो छोर हैं।

Ranchi Diaries Movie Review: बैंक डकैती या बकैती

एक होती है डकैती। जैसे बैंक डकैती। और एक होती है बैंक बकैती।

Tu Hai Mera Sunday movie review: सुकून की तलाश

आप अपना रविवार कैसे मनाते हैं? छुट्टी के एक दिन को कैसे गुजारते हैं?

Chef movie review: रोट्जा खाया है आपने

यह फिल्म हॉलीवुड फिल्म ‘शेफ’ का हिंदी रूपांतर है और बाकायदा कानूनी स्वीकृति लेकर ऐसा किया गया है। फिल्म के मूल में यह विचार...

Judwaa 2 movie review: फिर से जुड़वां

बीस साल पहले, यानी 1997 में, डेविड धवन की फिल्म ‘जुड़वां’ आई थी जिसमें सलमान खान हीरो थे। थोड़े फेरबदल के बाद वही कहानी...

Newton movie review: नक्सलियों के बीच

नक्सल प्रभावित क्षेत्रों के बारे में एक धारणा है कि यहां होनेवाले चुनाव को सुरक्षा एजंसियां यानी सेना या सीआरपीएफ अपने तरीके से नियंत्रित...

Bhoomi Movie Review: बलात्तकार और बदला

यह संजय दत्त की वापसी वाली फिल्म मानी जा रही है। यानी सजा काटकर आने के बाद उनकी पहली फिल्म।

Haseena Parkar Review: भाई की बहन

‘हसीना पारकर’ फिल्म दाऊद इब्राहीम की बहन हसीना पारकर पर केंद्रित है। दाऊद को ‘भाई’ के नाम से जाता है।