एक्टर शाहिद कपूर ने स्क्रीन लाइव (Screen Live) का लेटेस्ट एडिशन ज्वाइन किया, जो 24 जनवरी को मुंबई में हुआ। शाहिद जो अपनी ‘कमीने’, ‘हैदर’, ‘जब वी मेट’, ‘उड़ता पंजाब’ जैसी कई फिल्मों के लिए जाने जाते हैं, इस वक्त अपकमिंग फिल्म ‘देवा’ को लेकर चर्चा में हैं। शाहिद ने इंडस्ट्री में अपनी एक अलग पहचान बनाई है। संदीप रेड्डी वांगा द्वारा निर्देशित उनकी ब्लॉकबस्टर ‘कबीर सिंह’ भी लंबे समय तक दर्शकों के बीच बहस का हिस्सा रही। स्क्रीन लाइव में, शाहिद ने अपनी अपकमिंग फिल्म ‘देवा’ के बारे में बात करते हुए पिछली फिल्मों का भी जिक्र किया। इसके साथ ही पर्सनल लाइफ के बारे में भी ढेर सारी बातें की।

फिल्म ‘हैदर’ में शाहिद कपूर का किरदार काफी पसंद किया गया था। इस फिल्म की कहानी विलियम शेक्सपियर की ट्रैजडी हेमलेट का रूपांतरण थी। उस फिल्म के बारे में पूछे जाने पर कि क्या आज के समय में ‘हैदर’ जैसी राजनीतिक रूप से प्रेरित फिल्म बनाना संभव है, शाहिद ने तुरंत कहा, “नहीं।” उन्होंने कहा, “हम अब कॉन्ट्रोवर्शियल फिल्में नहीं बना सकते।”

शाहिद ने शेयर किया कि किस बात ने उन्हें ग्रे कैरेक्टर्स को अपनाने के लिए प्रेरित किया। खासकर ‘विवाह’ और ‘इश्क विश्क’ जैसी फिल्मों से फेम पाने के बाद। शाहिद ने इसके बारे में बात करते हुए कहा, “एक एक्टर के रूप में यदि आप ऐसी चीजें नहीं करते हैं, तो आप एक स्टार से नहीं हैं। एक एक्टर के रूप में आपको ह्यूमन साइकी समझनी होगी और आपको ऐसे किरदार निभाने होंगे जो सिर्फ अच्छे नहीं हैं।”

शाहिद ने कहा कि सिर्फ पेड़ों के आसपास दौड़ते रहना ही किरदार निभाना नहीं होता, सिनेमा में इससे भी कई ज्यादा चीजे हैं।  मुझे लगता है कि अब सौ साल से भी ज्यादा समय हो गया है, सिनेमा इससे कहीं ज्यादा रहा है। सिनेमा सिर्फ हंसी-मजाक और गाने-बजाने का नाम नहीं है। बेशक, इनकी जरूरत है और आपको लोगों का मनोरंजन करने की भी जरूरत है।

उन्होंने आगे कहा, “किसी कहानी में, मुख्य किरदार को हमेशा सबसे सरल, सबसे प्यारा, सबसे अच्छा आदमी नहीं होना चाहिए क्योंकि कुछ समय के बाद वह बहुत बोरिंग हो जाता है। मैं अब 21 साल से काम कर रहा हूं, और इन सालों में, अगर मैं बार-बार वही काम कर रहा होता तो ये रूम खाली होता और आप कहते, ‘शाहिद, कोई नहीं आया।” शाहिद ने इस स्क्रीन लाइव इवेंट में क्या-क्या वो पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें…