कृषि कानूनों के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे भारतीय किसान यूनियन के अध्यक्ष राकेश टिकैत ने एक बार फिर साफ कर दिया है कि वह कानून रद्द करवाए बिना वापस नहीं लौटेंगे। राकेश टिकैत ने इस बार भावुक अपील की है। राकेश टिकैत ने कहा, जब तक कानून वापस नहीं लिए जाएंगे किसान अपने घर नहीं लौटने वाला है। भले ही ये आंदोलन सालों तक चले। इसके अलावा राकेश टिकैत ने भावुक अपील करते हुए कहा कि हम क्या घर में बैठे हैं?
राकेश टिकैत ने कहा, ‘देश की राजधानी को किसानों ने पिछले 7 महीनों से घेर रखा है। भारत सरकार को शर्म नहीं आती? हम कहां बैठें? हमारा कोई घर है वहां। ये गलतफहमी सरकार अपने दिमाग से निकाल दे कि किसान वापस जाएगा। किसान तभी वापस जाएगा, जब मांगें पूरी हो जाएंगी। हमारी मांग है कि तीनों कानून रद्द हों। एमएसपी पर कानून बनना चाहिए।’
राकेश टिकैत के इन ट्वीट्स पर यूजर्स की प्रतिक्रिया भी आई है। शिवम नाम के यूजर ने लिखा, ‘केंद्र सरकार को लगता था कि देश के सारे कानून सिर्फ उनके ‘हित’ में बने हैं।’ फहद अंसारी नाम के ट्विटर यूजर लिखते हैं, ‘एक दिन इस तानाशाही सरकार को झुका कर रहेंगे! जय जवान, जय किसान।’ ट्विटर यूजर कमल सिंह ने लिखा, ‘बिलकुल सटीक जवाब और पूर्ण मत सहमत। अभी नहीं मिला है। कानून रद्द होने भी चाहिए।’
किसानों की मांगों को लेकर कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा था, ‘सरकार इन कानूनों के विभिन्न प्रावधानों को लेकर आंदोलन कर रहे किसानों के साथ बातचीत फिर शुरू करने को तैयार है। सरकार और किसान यूनियनों के बीच 11 दौर की बातचीत हो चुकी है। आखिरी बार बातचीत 22 जनवरी को हुई थी। 26 जनवरी को किसानों की ट्रैक्टर रैली के दौरान व्यापक हिंसा के बाद दोनों पक्षों के बीच बातचीत रुक गई थी।’
आखिरी बैठक 22 जनवरी को हुई थी जिसमें किसान यूनियनों ने सरकार के कानूनों को फिलहाल निलंबित करने के प्रस्ताव को ठुकरा दिया था। 20 जनवरी को हुई दसवें दौर की बातचीत में केंद्र ने इन कानूनों को एक से डेढ़ साल तक स्थगित करने और संयुक्त समिति के गठन का प्रस्ताव किया था। केंद्र का प्रस्ताव था कि इसके लिए किसानों को दिल्ली सीमाओं से अपने घर लौटना होगा।

