दीपिका पादुकोण ने एक्टर्स के लिए 8 घंटे की वर्क शिफ्ट की मांग की थी, जिसके बाद से पूरी हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में इस विषय को लेकर बहस छिड़ गई। तमाम एक्टर्स, निर्माता और निर्देशक अपनी-अपनी राय रख चुके हैं, जिनमें से कई सीनियर कलाकारों ने इस मांग को अनावश्यक बताया है। अब अभिनेता राजेंद्र चावला ने भी इस विषय को लेकर बयान दिया है और इसे बेतुखा बताया है। हाल ही में एक इंटरव्यू में चावला ने कहा कि इस तरह की शिफ्ट्स कॉरपोरेट सेक्टर में होती हैं और जो लोग इस इंडस्ट्री के काम को संभाल नहीं सकते, उन्हें इसे छोड़ देना चाहिए।

बॉलीवुड बबल के यूट्यूब चैनल पर बातचीत के दौरान जब राजेंद्र चावला से चल रही इस बहस और कलाकारों की इस शेड्यूल की मांग पर सवाल किया गया, तो उन्होंने कहा, “मैं यह बात समझता हूं, लेकिन अगर आप इस इंडस्ट्री में आ रहे हैं तो पहले दिन से यह जान लेना चाहिए कि यहां काम इसी तरह होता है। आपको यह स्वीकार करना होगा कि यहां शिफ्ट्स 12 से 14 घंटे तक चलती हैं, क्योंकि काम काफी बढ़ गया है।”

8 घंटे की शिफ्ट मांगने वालों को सलाह

उन्होंने आगे कहा, “उदाहरण के तौर पर, डेली सोप्स के लिए रोजाना 22–25 मिनट का कंटेंट देना होता है। अब ऐसे में अगर आप यही सोचते रहेंगे कि ‘मैं सिर्फ 8 घंटे काम करूंगा’ या ‘5 घंटे से ज्यादा नहीं’, तो काम पूरा कैसे होगा? अगर आपने इस रेस में कदम रखा है, तो उसी रफ्तार से दौड़ना पड़ेगा। अगर यह आपको मंजूर नहीं है, तो 9 से 5 की नौकरी करिए और वहीं खुश रहिए। यहां आने के लिए किसी ने आपको मजबूर नहीं किया है। थककर सोना, झुंझलाकर सोने से बेहतर है।”

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एक्टर्स को मिल रही सुविधाओं पर कही ये बात

राजेंद्र चावला ने यह भी दलील दी कि आज के दौर में कलाकारों की हालत पहले के मुकाबले कहीं बेहतर है। उन्होंने कहा, “आज एक्टर्स के लिए हालात बहुत सुधर चुके हैं। सबके पास अपनी वैनिटी वैन और पूरी टीम होती है। हमारे जमाने में महिलाएं खुले में या पेड़ों के पीछे कपड़े बदलती थीं। तब न एयर-कंडीशंड मेकअप रूम होते थे और न ही आरामदायक फ्लोर। अमिताभ बच्चन जैसे बड़े कलाकार भी पूरी कॉस्ट्यूम पहनकर धूप में बैठे रहते थे। आजकल तो अगर शॉट नहीं है, तो लोग अपनी वैनिटी में जाकर बैठ जाते हैं।”

कीड़े-मकोड़े वाले कमरों में सोते थे एक्टर

राजेंद्र चावला ने अपने संघर्ष के दिनों के बारे में बताया। उन्होंने कहा, “एक बार मैं ‘सास बिना ससुराल’ में काम कर रहा था, तभी एक सुपरवाइजिंग प्रोड्यूसर मेरे पास आए और बोले, ‘सर, हमने आपसे कभी कोई शिकायत नहीं सुनी, आप कभी कुछ कहते ही नहीं।’ मैंने उनसे कहा, ‘मैं शिकायत किस बात की करूं? थिएटर के दिनों में हम कीड़ों से भरे कमरों में सोते थे। जमीन पर दरी बिछाकर रात गुजारते थे। अब आप लोगों ने मुझे वैनिटी वैन दी है, फल दिए हैं और मेरे नाम की चादर दी है तो भला मैं किस बात की शिकायत करूं?’”

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दीपिका पादुकोण ने की थी मांग

जब दीपिका पादुकोण ने निर्देशक संदीप रेड्डी वांगा की फिल्म स्पिरिट से बाहर होने का फैसला किया, तो इसे लेकर कई तरह की अटकलें लगने लगीं। कहा गया कि उन्होंने निर्माताओं के सामने कुछ शर्तें रखी थीं, जिनमें से एक थी 8 घंटे की वर्क शिफ्ट। इसी मांग ने पूरे मुद्दे को और विवादित बना दिया। ब्रूट इंडिया को दिए इंटरव्यू में दीपिका ने कहा कि पुरुष अभिनेता सालों से इसी तरह की टाइमिंग्स पर काम करते आ रहे हैं, लेकिन मीडिया का ध्यान सिर्फ इसलिए उन पर गया क्योंकि वह एक महिला हैं। पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें…