मूवी रिव्यू : ‘राहु केतु’
कलाकार: पुलकित सम्राट, वरुण शर्मा, शालिनी पांडे, पीयूष मिश्रा, चंकी पांडे, अमित सियाल, मनु ऋषि चड्डा, सुमित गुलाटी
निर्देशक: विपुल विज
निर्माता: उमेश कुमार बंसल, सूरज सिंह, वर्षा कुकरेजा, प्रगति देशमुख
अवधि: 2 घंटा 17 मिनट
रेटिंग: 3.5/5

‘फुकरे’ फेम अभिनेता वरुण शर्मा और पुलकित सम्राट जब भी बड़े पर्दे पर एक साथ आते हैं, तो अपने अभिनय और कॉमिक टाइमिंग से दर्शकों का दिल जीत लेते हैं। अब दोनों एक बार फिर ‘राहु केतु’ में साथ नजर आए हैं। डायरेक्टर विपुल विग ने इसमें कॉमेडी दुनिया के साथ मिलकर कुछ अलग करने की कोश‍िश है। ‘राहु केतु’ में भाग दौड़ है, कुछ मजेदार हंसी के पल है। यह फिल्‍म पौराणिक और सांस्कृतिक मिथकों को फैंटेसी से जोड़ती है, जो नयापन लेकर आती है। ऐसे में अगर आप यह मूवी देखने का प्लान बना रहे हैं, तो इससे पहले रिव्यू यहां पढ़ लें।

क्या है फिल्म ‘राहु केतु’ की कहानी?

फिल्म की कहानी हिमाचल प्रदेश के एक छोटे से कस्बे से शुरू होती है, जहां लेखक चूरू लाल शर्मा (मनु ऋषि चड्ढा) अपनी जिंदगी और लेखन दोनों से ही निराश चल रहे होते हैं। उसी दौरान उसकी मुलाकात रहस्यमय फूफा (पीयूष मिश्रा) से होती है, जिनके पास एक ऐसी जादुई किताब है, जो हालात को पूरी तरह उलट-पुलट कर देती है। इस किताब के जरिए कहानी राहु (वरुण शर्मा) और केतु (पुलकित सम्राट) के उलझन भरे किरदार में एंट्री लेती है। इनकी मौजूदगी जहां भी होती है, वहां भ्रम, डर और ठहाके साथ-साथ चलने लगते हैं।

कस्बे के लोग इन्हें अपशकुन मानने लगते हैं, जबकि दर्शकों के लिए यही जोड़ी फिल्म का सबसे बड़ा आकर्षण बन जाती है। इसी उथल-पुथल भरे सफर में मीनू टैक्सी (शालिनी पांडे) की एंट्री कहानी को इमोशनल बैलेंस देती है। दूसरी तरफ अजीब फिल्म में चंकी पांडे का किरदार इसे और अलग मोड़ पर ले आता है।

कैसा है सितारों का अभिनय

फिल्म में वरुण शर्मा ‘राहु’ के किरदार में अपनी कॉमिक स्ट्रेंथ को पूरी तरह भुनाते हैं। उनके एक्सप्रेशन और बॉडी लैंग्वेज हर सीन में हंसी निकाल लेते हैं। वहीं, पुलकित सम्राट ‘केतु’ के रूप में सहज और नैचुरल लगते हैं और दोनों की आपसी केमिस्ट्री फिल्म की रीढ़ बन जाती है। कई दृश्य ऐसे हैं, जो सिर्फ इस जोड़ी की वजह से याद रह जाते हैं। शालिनी पांडे ‘मीनू टैक्सी’ के रोल में सादगी और ताजगी दोनों लाती हैं। पीयूष मिश्रा ‘फूफा’ के किरदार में रहस्य और हास्य का संतुलन बनाए रखते हैं।

कहां रही ‘राहु केतु’ में कमी?

‘राहु केतु’ ने निर्देशन और तकनीकी पक्ष को विपुल विज की फिल्म में कॉन्फिडेंस साफ झलकता है। कॉमेडी कहीं भी बनावटी नहीं लगती, बल्कि हालात से स्वाभाविक रूप से निकलती है। हालांकि, कुछ हिस्सों में फिल्म थोड़ी खिंचती हुई महसूस होती है, लेकिन दिलचस्प किरदार उस कमी को ढक लेते हैं। हिमाचल की खूबसूरत लोकेशंस फिल्म को फ्रेश लुक देती हैं और बैकग्राउंड म्यूजिक कहानी के टोन के साथ ठीक से बैठता है।