वरिष्ठ पत्रकार पुण्य प्रसून बाजपेयी अपने ट्वीट्स में केंद्र सरकार की कड़ी आलोचना करते दिखते हैं। इस बार उन्होंने एक और पोस्ट के जरिए मोदी सरकार पर तंज कसा है। देश में कोरोना से बिगड़ते हालातों पर पुण्य प्रसून बाजपेयी मोदी सरकार पर आए दिन बिफरते दिखते हैं। वहीं इस बार उन्होंने अपने पोस्ट में कहा- गर्मी किसी की भी हो हमेशा नहीं रहती। दरअसल, बाजपेयी ने बदलते मौसम को लेकर एक तस्वीर शेयर की जिसमें राष्टपति भवन और बारिश नजर आ रहे हैं। ऐसे में व्यंग करते हुए पत्रकार बाजपेयी ने ये बात कही।
उन्होंने एक और पोस्ट किया जिसमें प्रसून बाजपेयी ने कहा- ‘प्रिय सिस्टम, आप स्वस्थ्य है। लाइलाज है। आपकी दवाई भी बरसों बरस में बनती है। अब कार्य को विराम दें। आराम करें। जिससे बाकि स्वस्थ्य रहें।’ बाजपेयी के इन पोस्ट पर यूजर्स की भी प्रतिक्रिया आनी शुरू हो गई।
रुपेश नाम के यूजर ने पुण्य प्रसून बाजपेयी को जवाब दिया- ‘तभी तो मुग़ल,अंग्रेज और धर्मनिरपेक्ष कांग्रेस आए और चले गए, ये भारत की ताकत है भारत, भारत ही रहेगा।’ बबीता नाम की यूजर ने कहा- वो मौसम कि तरह बदलता है.. फिर से जुमलों कि बरसात होगी… सब धुल जायेगा… कुछ याद नहीं रखा जायेगा। अजीत नाम के शख्स ने कहा- ये वो भी जानते हैं पर मानते ही नहीं है। एक यूजर ने मस्ती लेते हुए कहा- जब बरसात ने आपके कान चूमे होंगे, लगता है गर्मी आपको उस वक्त ज्यादा लगी होगी।
कुमार ने कहा- 70 सालों से गांधी परिवार की गर्मी बढ़ गई थी, जो आप कह रहे सही। एक ने कहा- सत्ता की लालच में जनाब भूल गए ऊपर भी कोई बैठा है जो संसार चलाता है। विचारधारा नाम के अकाउंट से कमेंट आया- गर्मी को सबक सिखाने के लिए बारिश को भी रूद्र रूप में बरसना होगा। प्रदीप मौर्य बोले- ये बात सूर्य भगवान पर लागू नही है! आज के भारत का सूर्य आप को पता है।
गौतम नाम के यूजर बोले- आज एक फ़िल्म jolly llb की याद आ गई, जिसमें कहा जाता है “आखिर ये लोग कौन हैं जनाब, कहां से आते हैं?” यही मैं पूछना चाहता हूं क्या? ये लोग पत्रकार हैं? अमरेंद्र नाम के यूजर बोले- बहुत क्रांतिकारी! बहुत ही क्रांतिकारी! एक ने कहा- लेट कर दिया समझने में। गर्मी 2014 में ही निकल गई थी।
