यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन (UGC) ने कुछ दिनों पहले पूरे देश में नए नियम लागू किए हैं। इन नियमों का सीधा मकसद कॉलेजों और यूनिवर्सिटीज में जाति आधारित भेदभाव, लैंगिक भेदभाव, धर्म या दिव्यांगता के आधार पर भेदभाव को खत्म करना है। इन नियमों में जनरल कैटेगरी को छोड़कर अनुसूचित जाति (एससी), अनुसूचित जनजाति (एसटी) के साथ-साथ अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) को भी शामिल किया गया। अब इसके जारी होते ही देश के कई हिस्सों में विरोध शुरू हो गया। ऐसे में लोक गायिका नेहा सिंह राठौर ने भी अब इस पर अपनी प्रतिक्रिया दी है।
नेहा सिंह राठौर ने अपने सोशल मीडिया हैंडल एक्स पर एक वीडियो शेयर करते हुए विरोध करने वालों से यह अपील की है कि वे देशहित के ऊपर जाति और बिरादरी को ना रखें। नेहा ने ढाई मिनट का वीडियो बनाकर पोस्ट किया है और इसके कैप्शन में उन्होंने लिखा, “सम्मान बचाने वाले कानून से किसे दिक्कत है? 18-18 घंटे मेहनत करने के बाद ये कानून बना है। इसका सम्मान कीजिए।”
क्या बोलीं नेहा सिंह राठौर
इसके अलावा नेहा ने वीडियो में कहा, “चोरी के खिलाफ कानून बनने से किसे दिक्कत होगी, जो चोर होगा। अत्याचार के खिलाफ कानून बनने से कौन तिलमिलाएगा, जो अत्याचारी होगा। भेदभाव रोकने वाले कानूनों का विरोध कौन करेगा, जो खुद भेदभाव करता होगा। अगर कोई कानून किसी वर्ग या समूह के सम्मान को बचाने के लिए बनाया जाता है, तो इसमें दिक्कत क्या है। जातिगत भेदभाव और पक्षपात हमारे समाज की पुरानी बीमारी है और पुरानी बीमारियों का इलाज कड़वी दवाइयों से ही होता है।”
इसके आगे उन्होंने कहा, “एससी-एसटी एक्ट ऐसी ही कड़वी दवाई थी, जिसका भरपूर विरोध किया गया था। आरक्षण भी एक ऐसी ही कड़वी दवा है जिसका खूब विरोध होता है। लेकिन मेरा यकीन कीजिए कड़वी दवाइयों ने समाज की सेहत में सुधार ही किया है। कही कुछ लोग इस वजह से तो नाराज नहीं हैं कि वो अब दूसरों को अपमानित नहीं कर पाएंगे। कहीं उन्हें ये तो नहीं लगा रहा है कि इससे उनका अवैध विशेषाधिकार छीनने वाला है।”
नेहा यहीं नहीं रुकी इसके आगे उन्होंने कहा, “देश का संविधान समानता के बुनियादी सिद्धांत पर टिका है लेकिन क्या इस देश का हर नागरिक बराबर सम्मान पाता है। दरअसल नहीं, बीते तमाम सालों में ले देकर एक काम तो ढंग का हुआ है और कुछ लोग इसका भी विरोध करने लग गए और विरोध कर भी कौन रहा है वही लोग जो अखंड भारत के नाम पर स्वास्थ्य, शिक्षा और रोजगार जैसी बुनियादी चीजों से समझौता करने को तैयार थे।
वही लोग जो राष्ट्रवाद के नाम पर अपने ही देश के नागरिकों की लिंचिंग तक को सही बताते हैं। कल तक जो लोग सरकार से चार कायदे के सवाल पूछने को देशद्रोह कहते थे, आज वही लोग एक ढंग का कानून आने पर बिलबिला रहे हैं। क्यों भाई, अब मजा नहीं आ रहा है क्या।”
नेहा ने लास्ट में कहा, “देश का हर नागरिक गौरव बढ़ाने वाला, सम्मानित और कॉन्फिडेंट महसूस नहीं करेगा, तब तक ये देश मजबूत नहीं होगा। देशवासियों के गौरव को बढ़ाने वाला यह कानून देश के हित में है। इस कानून के खिलाफ बोलने वाले लोग देशहित के खिलाफ बोल रहे हैं। उन्हें यह काम नहीं करना चाहिए। जातिगत स्वार्थ के लिए देश हित से समझौता मत कीजिए।
देश को मजबूत बनाने वाले कानून का समर्थन कीजिए। सबसे पहले देश है। जाति और बिरादरी बहुत बाद में आती है। वैसे भी ये मामूली कानून नहीं है। 18-18 घंटे मेहनत करने के बाद ये कानून बनाया गया है। आपको इसका सम्मान करना चाहिए।”
