इंडियन एक्सप्रेस के शो एक्सप्रेसो में शेफाली शाह और हुमा कुरैशी ने हिस्सा लिया। इस कार्यक्रम में उन्होंने बताया कि ओटीटी प्लेटफॉर्म्स की वजह से महिला कलाकारों के लिए कई नए रास्ते खुले हैं। अब महिलाओं को गहरे और बड़े किरदार मिल रहे हैं और वे बड़े शो में लीड रोल भी निभा रही हैं।
हुमा ने कहा कि ओटीटी प्लेटफॉर्म्स ऐसी कहानियों को जगह देते हैं जो पहले सामने नहीं आती थीं। उन्होंने कहा, “अब यह सोच नहीं चल रही कि सिनेमाघरों में सिर्फ़ पुरुषों पर आधारित फ़िल्में ही सफल होंगी। इंटरनेट वाले मंच बार-बार साबित कर चुके हैं कि यहाँ बहुत बड़ा और तैयार दर्शक है और इसमें महिलाएँ और पुरुष दोनों शामिल हैं। दिल्ली क्राइम या महारानी जैसे धारावाहिक सिर्फ़ महिलाएँ नहीं, सभी लोग देखते हैं। अगर कल दिल्ली क्राइम को फ़िल्म के तौर पर बनाया जाए, तो बहुत लोग इसे देखने जाएँगे।”
शेफाली ने उनकी बात से सहमति जताई और कहा, ”ओटीटी ने बहुत बदलाव किया है। ऐसी कहानियों और किरदारों को जगह मिली है जो पहले सुनाई ही नहीं देते थे। बहुत से रचनात्मक लोग जो बहुत अच्छे थे, पर जिन्हें कभी अवसर नहीं मिलता था, अब उन्हें असली काम मिला।”
हुमा ने यह भी कहा कि आज का सिनेमाघर वाला ढाँचा छोटे बजट की फ़िल्मों के लिए मुश्किल है। अपनी फ़िल्म “सिंगल सलमा” का उदाहरण देते हुए उन्होंने बताया, “सिंगल सलमा 31 अक्तूबर को आई थी, पर बहुत कम लोग इसे देख पाए। कोई प्रचार नहीं हुआ, पैसे नहीं लगाए गए, कोई चर्चा नहीं बनी। यह सोच थी कि फ़िल्म तो बाद में ओटीटी पर आ ही जाएगी, इसलिए सिनेमाघर में मेहनत करने का मतलब नहीं है। मुझे लगता है कि ऐसा करना व्यापार को नुकसान पहुँचाएगा। हमेशा से छोटी और मिडिल बजट की फ़िल्में ही बिजनेस को संभालती रही हैं।”
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एक्सप्रेसो सीरीज में पहले भी कई बड़े कलाकार शामिल हो चुके हैं, जैसे- अनुपम खेर, ऋचा चड्ढा और कबीर ख़ान, रणदीप हुड्डा और हंसल मेहता, पंकज त्रिपाठी, काजोल और कृति सैनन, जावेद अख़्तर और जोया अख़्तर, इम्तियाज़ अली और तापसी पन्नू, विद्या बालन और प्रतीक गांधी।
