मशहूर लेखिका तसलीमा नसरीन ने अभिनेत्री दीपिका पादुकोण और रणवीर सिंह की शादी की तस्वीरों को देखने के बाद अपनी प्रतिक्रिया दी है। यहां आपको बता दें कि बीते 14, 15 नवंबर को दीपिका पादुकोण और रणवीर सिंह की शादी इटली के लेक कोमो में हुई है। शादी के बाद इस जोड़े ने हाल ही में बेंगलुरु में एक रिसेप्शन पार्टी भी दिया था। अब लेखिका तसलीम नसरीन ने ‘द प्रिंट’ में एक आर्टिकल लिखा है और बताया है कि दीपिका पादुकोण जब अपनी शादी के दिन तस्वीरों में हंसती हुईं नजर आईं थीं तो उन्हें कैसा महसूस हुआ?

तसलीम नसरीन ने लिखा है कि शादी के दिन रणवीर और दीपिका को हंसते हुए देख मुझे काफी खुशी हुई। हमलोग शादी में दुल्हन को हंसते हुए बहुत ही कम देख पाते हैं। भारत में शादियों में अब तक प्रचलित रिवाज यहीं रहा है कि दुल्हन रोते हुए अपने माता-पिता के घर से विदा होती है। मैंने अपने बचपन से ही कई दुल्हन को उदास और रोते हुए देखा है लेकिन दुल्हा खुश नजर आता था। कोई फर्क नहीं पड़ता कि वो कितनी शिक्षित है, सुंदर हैं, कितनी ज्यादा अमीर है या फिर कितनी बड़ी राजनेता है? एक इमेज हमारे दिमाग में बैठ गया है कि शादी में दुल्हन को रोना ही है।

दुल्हन इसलिए उदास होती है क्योंकि वो अनिश्चितता की ओर बढ़ती है। साउथ एशिया में रहने वाले लोगों के साथ सबसे बड़ा तथ्य यह है कि यहां ज्यादातर शादियां परिवार द्वारा तय की जाती हैं और करीब-करीब सभी पुरुष अपने धर्म में ही शादी करते हैं और दहेज की उम्मीद भी करते हैं। तसलीमा ने लिखा कि हम जानते हैं कि कैसे महिलाओं को परेशान किया जाता है। यहां तक कि कई बार पैसे नहीं देने की की कीमत भी दुल्हन से वसूली जाती है। साउथ एशिया में कुछ रुढि़वादी मानसिकताओं की वजह से महिलाओं को पुरुषों के समान सम्मान मिलना करीब-करीब असंभव है।

तसलीमा ने आगे लिखा कि बंगाली रीति रिवाज के मुताबिक पहले जब दुल्हा, दुल्हन के घर जाता था तब अपनी मां से कहता था कि मैं आपके लिए दासी लाने जा रहा हूं। हालांकि अब हो सकता है कि बंगाली युवक ऐसा नहीं कहते हों फिर भी कई लोग इस संस्कृति को फॉलो करते हैं। वो लोग इसलिए शादी करते हैं ताकि उनकी पत्नी उनका और उनके परिवार वालों का ख्याल रखें।

दीपिका के बारे में तसलीमा ने लिखा कि दीपिका पादुकोण एक स्वतंत्र महिला हैं। दीपिका और रणवीर एक दूसरे से प्यार करते हैं। वो दोनों अरेंज मैरेज के पीड़ित नहीं है। दीपिका को कोई जरूरत नहीं है कि वो अपने पिता या फिर अपने पति पर आश्रित रहें। दीपिका ना तो अपने पति और ना उनके रिश्तेदार की दासी हैं। उनके पास अपना घर है। शादी के दिन दिल खोलकर हंसते हुए अपनी तस्वीरें शेयर कर दीपिका ने पुरानी मान्यताओं की बेड़ियों को तोड़ दिया। उम्मीद है उनके बाद अब प्रियंका चोपड़ा भी ऐसा ही करेंगी।

मैं यह चाहती हूं कि महिलाएं अपनी आंसुओं को पोछ लें और शादी के दिन वो हंसें। मैं चाहती हूं कि वो दीपिका पादुकोण की तरह हंसें। मैं यह चाहती हूं कि वो अरेंज मैरेज को ना बोलें, आर्थिक निर्भरता को ना बोलें, दहेज को ना बोलें, और घरेलू हिंसा के खिलाफ भी आवाज उठाएं। वो अपना सरनेम भी ना बदलें। मैं यह चाहती हूं कि महिलाएं ज्यादा सक्रिय हो जाएं। मुझे उम्मीद है कि दीपिका पादुकोण दीपिका सिंह नहीं बनेंगी, जिस तरह रणवीर, रणवीर सिंह रहेंगे उसी तरह दीपिका भी दीपिका पादुकोण ही रहेंगी।