1997 में जेपी दत्ता की फिल्म ‘बॉर्डर’ रिलीज़ हुई थी। इस फिल्म की कहानी, किरदार और गानों ने जिस तरह देशभक्ति की लहर जगाई थी, वो आज भी लोगों के ज़ेहन में ताज़ा है। लोंगेवाला की लड़ाई को जब बड़े पर्दे पर सनी देओल, सुनील शेट्टी और अक्षय खन्ना ने जिया, तो हर भारतीय का सीना गर्व से चौड़ा हो गया था। यही वजह है कि जब भी कोई वॉर फिल्म बनती है, उसकी तुलना अपने-आप ‘बॉर्डर’ से होने लगती है- क्या ये फिल्म बॉर्डर के लेवल की है?
बॉर्डर का नोस्टैल्जिया या सिर्फ नाम का सहारा?
अब 29 साल बाद, जेपी दत्ता की बेटी निधि दत्ता ‘बॉर्डर 2’ लेकर आई हैं। फिल्म का निर्देशन अनुराग सिंह ने किया है और यह 23 जनवरी 2026 को रिलीज़ हुई है। सवाल वही है- क्या ‘बॉर्डर 2’ उस लेजेंडरी फिल्म के स्तर को छू पाई है? आइए जानते हैं।
सबसे पहले ये साफ कर दें कि ‘बॉर्डर 2’ ना तो बॉर्डर का रीमेक है और ना ही सीक्वल। यह भारत-पाकिस्तान के बीच हुए 1971 के युद्ध पर आधारित है, जिसमें भारत की थल, जल और वायु सेना ने मिलकर बहादुरी दिखाई और जीत हासिल की।
वरुण धवन का काम बोलता है
फिल्म में इंडियन आर्मी के मेजर होशियार सिंह दहिया के किरदार में वरुण धवन नज़र आते हैं। रिलीज़ से पहले उन्हें इस रोल के लिए काफी ट्रोल किया गया था, लेकिन अपने अभिनय से वरुण ने सभी आलोचकों का मुंह बंद कर दिया है। हरियाणवी डायलैक्ट पर उनकी पकड़ अच्छी है। इमोशनल सीन हों, रोमांटिक पल हों या फिर सीरियस वॉर सीन- हर जगह वरुण प्रभावित करते हैं। इस फिल्म के लिए उन्होंने अपनी बॉडी पर भी खास मेहनत की है, जो स्क्रीन पर साफ दिखती है। 1971 के भारत-पाकिस्तान के इस युद्ध के दौरान अपनी वीरता के लिए मेजर होशियार सिंह को भारत के सर्वोच्च सैन्य सम्मान, परमवीर चक्र से सम्मानित किया गया था।
सनी देओल ने फिर दिखाया दम
सनी देओल तो सनी देओल हैं- वो फिल्म की जान हैं। जैसे ही वो स्क्रीन पर आते हैं, थिएटर में जोश अपने-आप बढ़ जाता है। फतेह सिंह के रोल में वो एक पिता, एक पति और एक सच्चे देशभक्त के रूप में छा जाते हैं। उनके डायलॉग्स और डायलॉग डिलीवरी दर्शकों में देशभक्ति की भावना भर देती है।
दिलजीत दोसांझ ने जीता दिल
दिलजीत दोसांझ फिल्म में भारतीय वायु सेना के जांबाज शहीद परमवीर चक्र विजेता फ्लाइंग ऑफिसर निर्मलजीत सिंह सेखों (Nirmal Jit Singh Sekhon) का किरदार निभा रहे हैं। दिलजीत अपनी शानदार कॉमिक टाइमिंग और नैचुरल परफॉर्मेंस से दिल जीत लेते हैं। जब-जब वो स्क्रीन पर आते हैं, फिल्म में एक अलग ही रौनक आ जाती है। सोनम बाजवा के साथ उनके सीन हों, दोस्तों के साथ हल्के-फुल्के पल हों या फिर युद्ध के मैदान में एक जांबाज़ सैनिक का किरदार- दिलजीत हर जगह असर छोड़ते हैं।
अहान शेट्टी के लिए लगता है बुरा
अहान शेट्टी फिल्म में भारतीय नौसेना के बहादुर लेफ्टिनेंट कमांडर एम. एस. रावत का किरदार निभा रहे हैं। अहान के अभिनय में उनके पिता सुनील शेट्टी की झलक दिखाई देती है, खासकर उनके डायलॉग बोलने के अंदाज़ में। हालांकि, सभी लीड कलाकारों में सबसे कमजोर परफॉर्मेंस अगर किसी की रही है, तो वो अहान शेट्टी की है। इसका एक बड़ा कारण उनका कम बैकस्टोरी मिलना भी है। यहां तक कि ‘संदेशे आते हैं’ गाने में, जहां बाकी किरदारों का इमोशनल एंगल दिखाया जाता है, वहां अहान का हिस्सा मिसिंग लगता है। गाने का अंतरा अरिजीत सिंह ने गाया है, इसलिए अरिजीत के फैंस को भी थोड़ी निराशा हो सकती है।
फिल्म की एक्ट्रेसेज ने कम स्क्रीनटाइम में भी किया इम्प्रेस
लीड एक्ट्रेसेज़ की बात करें तो मेधा राणा छोटे से रोल में भी छा जाती हैं और बेहद प्यारी लगती हैं। मोना सिंह ने भी अपने किरदार के साथ न्याय किया है। सोनम बाजवा और आन्या सिंह के रोल छोटे हैं, लेकिन सीमित स्क्रीन टाइम में भी वो इम्प्रेस करती हैं।
कैसा है निर्देशन?
निर्देशन और स्क्रीनप्ले की बात करें तो अनुराग सिंह का काम अच्छा है। फिल्म में पहली ‘बॉर्डर’ के कई यादगार डायलॉग्स का इस्तेमाल किया गया है, जिससे पुरानी फिल्म वाला फील बना रहता है। हालांकि, नौसेना और वायुसेना से जुड़े युद्ध सीन काफी जल्दी समेटे गए लगते हैं, जबकि थलसेना वाला वॉर सीक्वेंस थोड़ा खिंचा हुआ महसूस होता है। अगर वॉर स्ट्रैटजी को थोड़ा और डिटेल में दिखाया जाता- जैसे ‘उरी’ में देखने को मिला था- तो ये हिस्से और ज्यादा दमदार हो सकते थे। शायद इमोशनल और फैमिली सीन को ज्यादा जगह देने की वजहे से मेकर्स अब और ज्यादा फिल्म को लंबा नहीं करना चाहते थे।
VFX आज के दौर में और बेहतर हो सकते थे। खासकर नौसेना से जुड़े सीन थोड़े कमजोर लगते हैं। इसके अलावा, भारतीय सैनिकों की बहादुरी तो खूब दिखाई गई है, लेकिन पाकिस्तान की तरफ से कोई ठोस प्लानिंग, स्ट्रैटजी या बड़ा विलेन नज़र नहीं आता, जिससे वॉर सीन थोड़े एकतरफा लगते हैं।
‘बॉर्डर 2’ का म्यूजिक
म्यूजिक फिल्म का मिला-जुला पहलू है। कुछ गाने फिल्म की लंबाई बढ़ाते हैं, लेकिन कुछ गाने सीधे दिल को छू जाते हैं। ‘संदेशे आते हैं’ सुनते ही 90s का नोस्टैल्जिया लौट आता है—आंखें नम भी होती हैं और दिल खुश भी। फिल्म के अंत में आने वाला ‘मिट्टी के बेटे’ गाना दिल चीरकर रख देता है। वहीं ‘तो चलूं’ गाना कहीं-कहीं बिखरा हुआ लगता है, अफसोस होता है कि इसे पूरा नहीं दिखाया गया।
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फिल्म के अंत में पहली बॉर्डर को लेकर भी एक सरप्राइज आपको देखने को मिलेगा।
देखें या नहीं?
कुल मिलाकर, ‘बॉर्डर 2’ एक खूबसूरत और भावनात्मक फिल्म है, जो बिना ओवरड्रामा और भारी-भरकम डायलॉग्स के देशभक्ति जगाती है। गणतंत्र दिवस के मौके पर इसे परिवार के साथ देखा जा सकता है।
मेरी तरफ से इस फिल्म को 5 में से 3.5 स्टार।
