अर्चना पूरन सिंह और उनका परिवार अपने यूट्यूब व्लॉग के जरिए फैंस के साथ जुड़े रहते हैं। अपने एक पॉडकास्ट में अर्चना पूरन सिंह के बेटे आर्यमान सेठी ने बताया कि उनके साथ इंग्लैड में भेदभाव हुआ था। अपने साथ हुए भेदभाव होता देख वह अपने आपको संभाल नहीं पाए थे और अक्सर पिच पर जाकर रोया करते थे।
दरअसल, अर्चना पूरन सिंह के बेटे आर्यमान सेठी का सपना कभी एक प्रोफेशनल फुटबॉलर बनने का था। ऑल फॉर एथलीट्स पॉडकास्ट में बात करते हुए आर्यमान ने बताया कि महज 14 साल की उम्र में वह अपना यह सपना पूरा करने के लिए इंग्लैंड चले गए थे।
जहां उन्होंने एक फुटबॉल अकादमी में ट्रेनिंग शुरू की। अपने पहले ट्रेनिंग सेशन को याद करते हुए आर्यमान ने बताया कि वहां फुटबॉल का लेवल उनके अब तक के एक्सपीरियंस से बिल्कुल अलग था।
इंग्लैंड को लोग उड़ाते थे मजाक
सिर्फ 14 साल की उम्र में विदेश जाकर अपने सपने को पूरा करना उनके लिए आसान नहीं था। परिवार और घर से दूर बोर्डिंग स्कूल में रहते हुए उन्हें कई बार अकेलापन भी महसूस हुआ।
इस दौरान आर्यमान को बुलिंग और भेदभाव भरे टिप्पणियों का भी सामना करना पड़ा। कुछ लड़के उनके भारतीय होने को लेकर मजाक उड़ाते थे और भारत के बारे में अपमानजनक बातें कहते थे। यहां तक कि उनकी आर्थिक स्थिति को देखते हुए कुछ लोग उन्हें ताना मारते हुए पूछते थे कि क्या वह भारत के कोई राजकुमार हैं।
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आर्यमान को बचपन में किया गया बुली
आर्यमान ने बताया कि मैदान पर भी उन्हें ऐसे भेदभाव का सामना करना पड़ता था। उन्होंने कहा, ‘वहां नस्लभेद भी था। कुछ लड़के जानबूझकर मैदान पर मुझे टक्कर मारते थे या कहते थे, ‘क्या तुम गधे पर बैठकर ट्रेनिंग के लिए आए हो? या तुम्हारे पास हाथी है?”
समय के साथ इन हालातों से लड़ना सीखा
हालांकि, समय के साथ आर्यमान ने ऐसी टिप्पणियों का सामना करना सीख लिया। उन्होंने समझा कि दूसरों की कही बातों को खुद पर हावी नहीं होने देना चाहिए। उन्होंने यह भी बताया कि युवा खिलाड़ियों के बीच कई बार बुलिंग को नॉर्मल बर्ताव की तरह देखा जाता है, जो इस तरह के माहौल को और मुश्किल बना देता है।
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पैर में गंभीर चोट के बाद छोड़ना पड़ा फुटबॉल
आर्यमान इस बातचीत के दौरान बताते हैं कि इस दौरान उनका सामना युवा फुटबॉलर रहीम स्टर्लिंग से भी हुआ। हालांकि, दो बार पैर में गंभीर फ्रैक्चर होने और लंबे समय तक रिकवरी से जूझने के बाद उन्हें मजबूरन फुटबॉल छोड़ना पड़ा।
इस तरह, जिस खेल में वह अपना करियर बनाना चाहते थे, उससे उन्हें दर्दनाक चोटों के चलते दूरी बनानी पड़ी। अब उन्हें यूट्यूब पर व्लॉग्स में देखा जाता है, जहां वह पूरे परिवार के साथ व्लॉगिंग करते हैं।
