एआर रहमान हिंदी फिल्म इंडस्ट्री का एक जाना-माना नाम हैं। उन्होंने अपनी मधुर आवाज से लाखों लोगों को अपना दीवाना बनाया हुआ है। बता दें कि वह सिर्फ सिंगर ही नहीं, बल्कि म्यूजिक कंपोजर, रिकॉर्ड प्रोड्यूसर, गीतकार, मल्टी-इंस्ट्रूमेंटलिस्ट भी हैं। उन्होंने हिंदी और तमिल में सबसे ज्यादा काम किया है। इसके अलावा वह समय-समय पर हॉलीवुड में भी अपनी मौजूदगी दर्ज कराते रहे हैं।

एआर रहमान सिर्फ अपने गानों को लेकर ही नहीं, बल्कि अपनी पर्सनल लाइफ को लेकर भी चर्चा में रहे हैं। अक्सर उनके धर्म को लेकर चर्चा होती रही है। बता दें कि बहुत से लोग शायद इस बात से वाकिफ नहीं होंगे कि वह पहले हिंदू थे। फिर उन्होंने अपना धर्म बदल लिया और इसकी वजह भी बताई थी। चलिए आज उनके जन्मदिन पर आपको बताते हैं कि वह एएस दिलीप कुमार से अल्लाह रक्खा रहमान (ए आर रहमान) क्यों बने और क्यों उन्होंने अपना धर्म बदला।

यह भी पढ़ें: अभिनेत्री संग मिसबिहैव करके फिर चर्चा में पवन सिंह, जानें कौन है सिंदूर लगाए महिला जिसकी उंगलियों में लगा केक खाने लगे अभिनेता

एआर रहमान की मां थीं हिंदू

साल 2015 में नसीर मुन्नी कबीर की ‘एआर रहमान द स्पिरिट ऑफ म्यूजिक’ में रहमान ने खुद अपनी सूफियत की तरफ अपने सफर के बारे में बताया था। उन्होंने अपने पिता की असमय मौत के बाद आए मुश्किल समय को याद किया और बताया कि उनका परिवार हमेशा से आध्यात्मिकता में विश्वास रखता था।

सिंगर ने कहा, “मेरी मां हिंदू थीं, जो पूजा-पाठ करती थीं। मेरी मां हमेशा से आध्यात्मिक सोच वाली थीं। हम जिस हबीबुल्लाह रोड के घर में बड़े हुए, उसकी दीवारों पर हिंदू देवी-देवताओं की तस्वीरें थीं। वहां मदर मैरी की भी एक तस्वीर थी, जिसमें उन्होंने जीसस को अपनी गोद में लिया हुआ था और मक्का-मदीना के पवित्र स्थलों की एक तस्वीर भी लगी थी।” गीतकार के पिता कैंसर से जूझ रहे थे और उनके आखिरी दिनों में उनका इलाज एक सूफी संत ने किया था। उस सूफी संत से मुलाकात के बाद उन्होंने परिवार सहित इस्लाम धर्म अपना लिया था।

धर्म बदलने पर क्या बोले रहमान

इसके आगे उन्होंने बताया था कि उनके ऊपर किसी भी तरफ से धर्म परिवर्तन का दबाव नहीं था। रहमान ने कहा, “सूफियत के रास्ते पर किसी को जबरदस्ती नहीं लाया जाता। आप तभी उसे फॉलो करते हैं, जब यह आपके दिल से आता है। सूफी संत से मिलने के एक साल बाद 1987 में हम हबीबुल्लाह रोड से कोडंबक्कम चले गए, उस घर में जहां  हम आज भी रहते हैं।”

उन्होंने आगे कहा, “सूफी रास्ते ने मुझे और मेरी मां दोनों को आध्यात्मिक रूप से ऊपर उठाया और हमें लगा कि यह हमारे लिए सबसे अच्छा रास्ता है, इसलिए हमने सूफी इस्लाम अपना लिया। हमारे आस-पास किसी को भी धर्म बदलने से कोई फर्क नहीं पड़ा। हम म्यूजिशियन थे और इससे हमें ज्यादा सामाजिक आजादी मिली।”

हिंदू ज्योतिषी ने बताया था नाम

रहमान ने आगे बताया था कि उनका नाम उन्हें हिंदू ज्योतिषी ने सुझाया था। सिंगर ने कहा, “हम अपनी छोटी बहन की कुंडली दिखाने के लिए एक ज्योतिषी के पास गए थे, क्योंकि मेरी मां उसकी शादी करवाना चाहती थीं। यह उसी समय की बात है जब मैं अपना नाम बदलकर एक नई पहचान बनाना चाहता था।

उन्होंने (ज्योतिषी) ‘अब्दुल रहमान’ और ‘अब्दुल रहीम’ नाम सुझाए और कहा कि दोनों में से कोई भी नाम मेरे लिए अच्छा होगा। मुझे तुरंत ‘रहमान’ नाम पसंद आ गया। यह एक हिंदू ज्योतिषी थे, जिन्होंने मुझे मेरा मुस्लिम नाम दिया।

यह भी पढ़ें: Shark Tank India 5: ‘शार्क टैंक इंडिया’ की इस जज ने 22 साल की उम्र में लड़ी कैंसर की जंग, फिर बनाई करोड़ों की कंपनी