राजनीति में कब पासा पलट जाए और किसके हाथ बाजी लग जाए यह बता पाना बहुत मुश्किल है। कर्नाटक में राजनीति ने ऐसी करवट ली है कि 22 साल पहले की तरह के राजनीतिक हालात पैदा हो गए हैं। उस वक्त भाजपा को इसका भुगतान करना पड़ा था, लेकिन इस बार कांग्रेस और जनता दल सेक्युलर सामने हैं। राम माधव ने एक फेसबुक पोस्ट कर दोनों घटनाओं की तुलना की है। भाजपा नेता का कहना है कि उन्हें व्हाट्एसएप पर यह मैसेज मिला था। दरअसल, वर्ष 1996 में गुजरात में भाजपा की सरकार थी और केंद्र में एचडी. देवेगौड़ा की अगुआई में मिलीजुली सरकार थी। राम माधव द्वारा शेयर पोस्ट के मुताबिक, उस वक्त कांग्रेस द्वारा नियुक्त राज्यपाल ने केंद्र सरकार से गुजरात में राष्ट्रपति शासन लगाने की सिफारिश की थी। तत्कालीन प्रधानमंत्री देवेगौड़ा ने आनन-फानन में राज्य सरकार को बर्खास्त कर गुजरात में राष्ट्रपति शासन लगवा दिया था। कर्नाटक में 12 मई को हुए विधानसभा चुनाव में भाजपा, कांग्रेस और जेडीएस में से किसी को भी स्पष्ट बहुमत नहीं मिला है। त्रिशंकु नतीजे आने के बाद कांग्रेस और जेडीएस ने मिलकर सरकार बनाने की घोषणा कर दी। हालांकि, भाजपा सबसे बड़ी पार्टी के तौर पर सामने आई है। अब कांग्रेस और जेडीएस नैतिकता, संवैधानिकता और परंपराओं का हवाला देकर राज्यपाल वजूभाई से सरकार बनाने का न्योता देने की मांग कर रहे हैं। राम माधव ने फेसबुक पोस्ट के जरिये दोनों दलों पर तंज कसा है।
राम माधव ने ‘कांग्रेस द्वारा 22 साल पहले किया गया कर्म अब कर्नाटक में कर रहा पीछा’ शीर्षक से पोस्ट शेयर किया है। उन्होंने लिखा, ‘1996 का साल था जब कांग्रेस के राज्यपाल कृष्णपाल सिंह के कारण गुजरात में भाजपा की सरकार गिरी थी। शंकर सिंह वाघेला और भाजपा विधायक दिलीप पारिख ने बीजेपी को विभाजित करने के लिए कांग्रेस का खुलेआम समर्थन किया था। सरकार गिराने का मास्टरमाइंड यही दोनों थे। अविश्वास प्रस्ताव के दौरान इन दोनों ने कांग्रेस के साथ मिलकर विधानसभा में हिंसा भी की थी। तत्कालीन विधानसभा अध्यक्ष ने पूरे विपक्ष को दिनभर के लिए निलंबित कर दिया था। बीजेपी ने विश्वास मत हासिल कर लिया था। लेकिन, इसके बाद नया मोड़ आ गया। कांग्रेस और सहयोगियों के हंगामे को आधार बनाते हुए तत्कालीन राज्यपाल कृष्णपाल ने पूरे राज्य में कानून-व्यवस्था को ध्वस्त मान लिया था। उन्होंने केंद्र सरकार के पास एक रिपोर्ट भेज दी। रिपोर्ट के तत्कालीन प्रधानमंत्री (एचडी. देवेगौड़ा) के टेबल पर पहुंचने के 15 मिनट के अंदर ही गुजरात सरकार को बर्खास्त करते हुए राष्ट्रपति शासन लगा दिया गया था।’ पोस्ट में दो दशक से भी ज्यादा समय पहले हुए घटनाक्रम के लिए सीधे तौर पर कांग्रेस को जिम्मेदार ठहराया गया है। भाजपा नेता के पोस्ट में आगे लिखा है, ’22 साल बाद कर्नाटक में यह कहानी कैसे प्रासंगिक हो गई? क्योंकि आज जो नैतिकता, संवैधानिकता और परंपराओं की दुहाई दे रहे हैं, वे नेहरू के समय से ही लोकतंत्र और कई चुनी हुई सरकारों की हत्या करते रहे हैं। कर्नाटक के मौजूदा राज्यपाल वजूभाई वाला वर्ष 1996 में गुजरात के भाजपा अध्यक्ष थे। राष्ट्रपति शासन लगाने वाले एचडी. देवेगौड़ा थे। कांग्रेस-जेडीएस आज वजूभाई को उनके कर्तव्य की दिला कर नरम रुख अपनाने की मांग कर रहे हैं।’

