राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (NMC) ने जम्मू-कश्मीर के रियासी जिले में स्थित श्री माता वैष्णो देवी इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एक्सीलेंस (SMVDIME) को दी गई मान्यता को वापस ले लिया है। आयोग ने कॉलेज को शैक्षणिक सत्र 2025–26 के लिए 50 MBBS सीटों पर पढ़ाई कराने की अनुमति रद्द कर दी है। एनएमसी का यह फैसला कॉलेज में इन्फ्रास्ट्रक्चर, फैकल्टी और क्लीनिकल सुविधाओं में गंभीर कमियों के पाए जाने के बाद लिया गया है।

छात्रों को नहीं होगा नुकसान, अन्य कॉलेजों में मिलेगा दाखिला

NMC ने स्पष्ट किया है कि इस फैसले से छात्रों के भविष्य पर कोई नकारात्मक असर नहीं पड़ेगा। कॉलेज में पहले से दाखिला ले चुके सभी छात्रों को जम्मू-कश्मीर के अन्य मान्यता प्राप्त मेडिकल कॉलेजों में सुपरन्यूमेरेरी सीटों पर शिफ्ट किया जाएगा। आयोग ने राज्य/केंद्र शासित प्रदेश प्रशासन को निर्देश दिया है कि छात्रों को मौजूदा नियमों के तहत समायोजित किया जाए।

राजनीतिक विवाद के बाद बढ़ी जांच

इस मेडिकल कॉलेज को लेकर उस समय विवाद खड़ा हो गया था जब इसके पहले MBBS बैच के 50 में से 42 छात्र मुस्लिम, एक सिख और केवल 8 हिंदू छात्र जम्मू क्षेत्र से होने की जानकारी सामने आई।

हालांकि, आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि दाखिला प्रक्रिया पूरी तरह NEET मेरिट लिस्ट और NMC के नियमों के अनुसार की गई थी और कॉलेज किसी भी तरह का अल्पसंख्यक संस्थान नहीं है। इसके बावजूद जम्मू में कई संगठनों ने विरोध प्रदर्शन किए और कॉलेज को बंद करने की मांग उठी।

शिकायतों के बाद हुई सरप्राइज इंस्पेक्शन

NMC ने बताया कि दाखिला प्रक्रिया पूरी होने के बाद आयोग को कई गंभीर शिकायतें मिलीं। इनमें—

अपर्याप्त इमारत और सुविधाएं

पर्याप्त क्लीनिकल मटीरियल की कमी

योग्य फुल-टाइम फैकल्टी की भारी कमी

रेजिडेंट डॉक्टरों की संख्या कम होना

जैसे आरोप शामिल थे।

इसके बाद मेडिकल असेसमेंट एंड रेटिंग बोर्ड (MARB) ने कॉलेज का अचानक निरीक्षण (Surprise Inspection) किया, जिसमें सभी शिकायतें सही पाई गईं।

BJP ने फैसले का किया स्वागत

BJP ने NMC के फैसले को मेडिकल शिक्षा की गुणवत्ता के पक्ष में बताया। बीजेपी विधायक आरएस पठानिया ने कहा, “यह फैसला गुणवत्ता को प्राथमिकता देता है। सभी प्रभावित छात्रों को अन्य मेडिकल कॉलेजों में सुरक्षित रूप से समायोजित किया जाएगा।”

मुख्यमंत्री ने भी कॉलेज बंद करने की जताई थी जरूरत

इससे पहले जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने भी इस कॉलेज को लेकर चिंता जताई थी। उन्होंने कहा था कि विवाद के कारण छात्रों की सुरक्षा खतरे में है और कॉलेज को बंद कर देना चाहिए।

NEET नियमों के तहत हुआ था दाखिला

सरकारी सूत्रों के मुताबिक:

कॉलेज माइनॉरिटी संस्थान नहीं है

दाखिले NEET मेरिट लिस्ट के आधार पर हुए

85% सीटें डोमिसाइल उम्मीदवारों के लिए आरक्षित थीं

जम्मू-कश्मीर में फिलहाल 13 मेडिकल कॉलेज हैं और वैष्णो देवी मेडिकल कॉलेज ने इसी वर्ष अपना पहला MBBS बैच दाखिल किया था।