झारखंड में इस बार 3 साल की सिविल सेवा परीक्षा एक साथ आयोजित की जाएगी। इस संबंध में झारखंड लोक सेवा आयोग ने निर्णय ले लिया है, जिसके तहत 2017, 2018 और 2019 के लिए एकीकृत संयुक्त सिविल सेवा परीक्षा आयोजित करने की तैयारी की जा रही है। वहीं, आयोग के इस फैसले के बाद राज्य सरकार के कार्मिक विभाग ने सभी विभागों से तीन साल में खाली हुए पदों का डेटा मांगा है, जिससे भर्ती की अनुशंसा भेजी जा सके।
संयुक्त सचिव ने दिए यह निर्देश: कार्मिक विभाग के संयुक्त सचिव ओमप्रकाश शाह ने सभी विभागों के सचिवों, प्रधान सचिवों और अपर मुख्य सचिवों को भेजे गए पत्र में लिखा है कि जेपीएससी ने परीक्षाओं को नियमित करने के लिए राज्यहित में इन तीन वर्षों में खाली हुए पदों के आधार पर एकीकृत संयुक्त सिविल सेवा प्रतियोगिता परीक्षा कराने का निर्णय लिया है। इसके लिए उन्होंने 10 अगस्त तक राज्य सेवा के विभिन्न रिक्त पदों का ब्योरा जेपीएससी को भेजने का अनुरोध किया है। साथ ही, उसकी एक कॉपी कार्मिक विभाग को देने को कहा है। खाली पदों का ब्योरा मिलने के बाद जेपीएससी इसकी प्रारंभिक परीक्षा की प्रक्रिया शुरू करेगा।
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अब तक सिर्फ 5 ही परीक्षाएं: जानकारी के मुताबिक, झारखंड राज्य बनने के बाद से अब तक यहां 18 सिविल सेवा परीक्षा होनी चाहिए थीं। हालांकि, विभिन्न विवादों की वजह से अब तक सिर्फ 5 सिविल सेवा परीक्षाएं ही पूरी हो पाई हैं। छठी सिविल सेवा मुख्य परीक्षा हो चुकी है और झारखंड हाई कोर्ट के आदेश के बाद उसका परिणाम जारी होगा।
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नहीं हो रही हर साल परीक्षा: गौरतलब है कि पूर्व मुख्य सचिव वीएस दूबे की अध्यक्षता वाली उच्च स्तरीय कमेटी ने 5 साल पहले ही यह परीक्षा हर वर्ष आयोजित करने की अनुशंसा की थी, लेकिन ऐसा नहीं हो सका। इसके चलते झारखंड लोकसेवा आयोग का परीक्षा कार्यक्रम लगातार पिछड़ता जा रहा है। ऐसे में पिछले 3 वर्षों की परीक्षाएं एक साथ कराने का फैसला किया गया।
