देश में बढ़ती कोचिंग संस्कृति और छात्रों पर पड़ रहे मानसिक दबाव को देखते हुए केंद्र सरकार ने हाई स्कूल शिक्षा प्रणाली में बड़े बदलाव की तैयारी शुरू कर दी है। शिक्षा मंत्रालय द्वारा गठित एक उच्चस्तरीय समिति ने स्कूल और प्रतियोगी परीक्षाओं के बीच की खाई को पाटने के लिए कई अहम सुझाव दिए हैं। इस समिति की अध्यक्षता उच्च शिक्षा विभाग के सचिव विनीत जोशी कर रहे हैं। समिति का उद्देश्य छात्रों की कोचिंग पर निर्भरता कम करना और स्कूल शिक्षा को ही प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए पर्याप्त बनाना है।

कोचिंग क्लास पर समय सीमा तय करने का प्रस्ताव

समिति ने सुझाव दिया है कि छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य और अत्यधिक अकादमिक बोझ को देखते हुए कोचिंग क्लास को प्रतिदिन अधिकतम 2 से 3 घंटे तक सीमित किया जाए। साथ ही कोचिंग संस्थानों के विज्ञापनों, शिक्षकों की योग्यता और वास्तविक सफलता दर को सार्वजनिक करना अनिवार्य किया जा सकता है।

11वीं कक्षा में हो सकती है प्रतियोगी परीक्षा

एक बड़ा प्रस्ताव यह भी है कि 11वीं कक्षा में ही प्रतियोगी परीक्षाएं आयोजित की जाएं, जिससे छात्रों पर 12वीं के अंत में पड़ने वाला दबाव कम हो और तैयारी अधिक संतुलित तरीके से हो सके। इसके लिए अलग-अलग बोर्ड के सिलेबस की तुलना करने को सब-कमेटी बनाने की बात कही गई है।

बोर्ड परीक्षा को मिलेगा कॉलेज एडमिशन में ज्यादा वेटेज

समिति ने यह भी माना कि केवल एक बार की हाई-स्टेक परीक्षा (जैसे JEE, NEET) छात्रों पर अत्यधिक दबाव डालती है। इसलिए कॉलेज एडमिशन में बोर्ड परीक्षा के अंकों को अधिक महत्व देने और एंट्रेंस एग्जाम की फ्रीक्वेंसी बढ़ाने का सुझाव दिया गया है।

स्कूल और एंट्रेंस एग्जाम के बीच ‘डिसकनेक्ट’ बड़ी समस्या

समिति ने पाया कि स्कूलों का सिलेबस और JEE-NEET जैसी परीक्षाओं की मांगों के बीच बड़ा अंतर है। स्कूलों में कॉन्सेप्ट पढ़ाए जाते हैं जबकि एंट्रेंस एग्जाम MCQ और टाइम-बाउंड होते हैं। इसी कारण डमी स्कूलों और कोचिंग इंडस्ट्री का तेजी से विस्तार हुआ है।

NCERT और CBSE को मिलेगी बड़ी जिम्मेदारी

NCERT को नोडल एजेंसी बनाने का प्रस्ताव दिया गया है, जिससे स्कूल सिलेबस और प्रतियोगी परीक्षाओं के बीच बेहतर तालमेल स्थापित किया जा सकते।

CBSE स्कूलों में रेमेडियल और मेंटरिंग क्लास शुरू करेगा

MCQ + सब्जेक्टिव का हाइब्रिड असेसमेंट मॉडल

टीचर ट्रेनिंग और ‘प्रोफेसर ऑफ प्रैक्टिस’ मॉडल

शिक्षकों की दक्षता बढ़ाने के लिए

कम्पीटेंसी-बेस्ड एजुकेशन पर ट्रेनिंग

IIT, NIT और इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स को ‘Professor of Practice’ के रूप में स्कूलों से जोड़ने का सुझाव

कैरियर गाइडेंस होगी अनिवार्य

समिति ने माना कि स्कूलों में करियर काउंसलिंग की भारी कमी है, जिसमें कक्षा 8 से करियर गाइडेंस शुरू करने के साथ ही राष्ट्रीय स्तर का Aptitude & Career Guidance Portal और छात्रों और अभिभावकों के लिए अनिवार्य काउंसलिंग का का प्रस्ताव दिया गया है।

Jansatta Education Expert Conclusion

अगर ये सिफारिशें लागू होती हैं, तो भारत की स्कूल शिक्षा प्रणाली में ऐतिहासिक बदलाव देखने को मिल सकते हैं। इससे न केवल कोचिंग पर निर्भरता घटेगी, बल्कि छात्रों का मानसिक स्वास्थ्य और शिक्षा की समानता भी बेहतर होगी।