केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) से संबद्ध स्कूलों की कक्षा एक से दस तक सह शैक्षणिक क्षेत्र के रूप में कला शिक्षा अनिवार्य होगी। इसके तहत हर कक्षा के लिए प्रत्येक सप्ताह में कला के दो पीरियड अनिवार्य किए जाएंगे। सीबीएसई की अध्यक्ष अनिता करवाल ने बताया कि कला समेकित शिक्षा प्रायोगिक ज्ञान की ओर पहल के तहत कक्षा एक से 10 तक कला शिक्षा को अनिवार्य बनाया गया है।

उन्होंने कहा कि जब कला शिक्षा के साथ एकीकृत होती है तो यह अवधारणाओं और विषयों की गहन समझ के लिए बच्चों में कला आधारित जिज्ञासा, जांच एवं अन्वेषण, महत्त्वपूर्ण सोच और रचनात्मकता को आगे बढ़ाने में सहायता करती है। सीबीएसई के कला प्रवेशिका दिशानिर्देशिका में कहा गया है कि राष्ट्रीय पाठ्यचर्या रूपरेखा 2005 के उद्देश्यों को पूरी तरह से प्राप्त करने के लिए कला एकीकरण बहुत जरूरी प्रक्रिया है।

कला की पढ़ाई प्रमुख रूप से चार वर्गों में विभाजित होगी। इसमें संगीत, नृत्य, दृश्य कला और नाटक शामिल हैं। इसके अलावा खानपान की कला को भी शामिल किया जा सकता है। इसके तहत स्कूलों को कहा गया है कि वे कक्षा एक से बारह तक के सभी विषयों में कला के जुड़ाव को ढूंढ़ें और उसका उपयोग करें। जैसे कुछ शिक्षक संगीत के माध्यम से अपने बच्चों को अंग्रेजी सिखाते हैं। वहीं, कुछ शिक्षकों ने नृत्य के माध्यम से विद्यार्थियों को गणित सिखाने का कार्य भी किया है।

सीबीएसई के एक अधिकारी के मुताबिक भारत कला के मामले में बहुत समृद्ध है। हमारे देश में हर राज्य का अलग संगीत, अलग नृत्य और खानपान है। ऐसे में कला के माध्यम से हम अपने विद्यार्थियों को विभिन्न राज्यों के बारे में बेहत समझ विकसित कर पाएंगे। इतना ही नहीं हर कला का अपना इतिहास भी है। विद्यार्थी इसके जरिए अपने इतिहास को भी बेहतर समझ पाएंगे।