आइआइटी रुड़की की शोधकर्ता डॉ. स्वाति श्रीवास्तव ने इजरायल में वीजमैन इंस्टीट्यूट आॅफ साइंस के प्रोफेसर योसेफ यार्डेन और अन्य शोधकर्ताओं के साथ मिलकर इविंग सारकोमा में अंतर्निहित आणविक इंटरैक्शन की खोज की है। इविंग सरकोमा हड्डी का कैंसर है जो मुख्य रूप से किशोरों में दिखाई देता है। एक दोषपूर्ण जीन के कारण, एक बार जब यह दूर के अंगों में फैल जाता है तो इसका इलाज करना मुश्किल हो जाता है। शोधकर्ताओं ने बच्चों में हड्डी के कैंसर को रोकने के लिए संभावित इलाज के नए तरीके को ढूंढ निकालने का दावा किया है। यह शोध चूहों पर आजमाया गया। शोध के अंत में चूहों में सकारात्मक प्रतिक्रिया देखने को मिले, इसी आधार पर डॉ. स्वाती ने कैंसर के इलाज का एक तरीका सुझाया है, जिससे कैंसर को फैलने से रोका जा सकता है। डॉ. स्वाति श्रीवास्तव ने आइआइटी रुड़की से पीएचडी पूरी की है और वर्तमान में वीजमैन इंस्टीट्यूट आॅफ साइंस से पोस्ट डॉक्टरल कर रही हैं।
इविंग सारकोमा हड्डी के कैंसर का एक रूप है जो किशोरों और युवा वयस्कों में पाया जाता है। इसमें हड्डी या नरम ऊतक में एक ट्यूमर बन जाता है। यह शोध ‘ग्लूकोकॉर्टीकॉइड्स’ कहे जाने वाले स्टेरॉयड हार्मोन के रिसेप्टर्स पर केंद्रित था। परीक्षण से इस बात का खुलासा हुआ कि रिसेप्टर्स काफी हद तक इविंग सरकोमा के विकास को बढ़ाते हैं। ये रिसेप्टर्स मानव शरीर के सभी कोशिकाओं में उपस्थित होता है, जो तनाव और कई महत्वपूर्ण कार्यों से संबंधित हार्मोनल संदेश को भेजने का कार्य करते हैं। लेकिन कभी-कभी ग्लूकोकॉर्टीकॉइड रिसेप्टर्स कोशिका के नाभिक पर जाकर, जहां वे जीन को चालू या बंद करने वाले अणुओं के साथ अंत:क्रिया करके घातक वृद्धि को प्रोत्साहित करते हैं।
रिसेप्टर्स और प्रोटीन के बीच स्थूल संबंध से इविंग सारकोमा कोशिकाओं के विकास और प्रवासन में वृद्धि होती है और प्रयोगशाला के चूहों में सरकोमा के प्रसार को बढ़ावा दिया। बाद में, शोधकर्ताओं ने इविंग सारकोमा कोशिकाओं को चूहों में प्रत्यारोपित किया और उन्हें ऐसी दवा दी जो ग्लूकोकॉर्टीकॉइड के संश्लेषण को अवरुद्ध कर सकती थी। शोधकतार्ओं ने पाया कि दवा के साथ, ट्यूमर दवा की बदौलत पहले की तुलना में धीमी दर से बढ़ने लगा, इस तरह से यह उतना मजबूत नहीं बन पाता जितना कि उसके पास होता है।
हड्डियों में ट्यूमर का होना सामान्य है। ये ट्यूमर ही आगे चलकर कैंसर का रूप ले लेते हैं। बोन कैंसर हड्डी का कैंसर होता है। यह शरीर के किसी भी अंग से शुरू होकर हड्डियों में फैल जाता है। यह हड्डियों में सूजन और दर्द पैदा करता है। बच्चों में होने वाले कैंसर के तीन फीसद मरीज हड्डी के कैंसर से पीड़ित होते हैं। बोन कैंसर शरीर के किसी भी हिस्से में हो सकता है लेकिन कमर के पास का हिस्सा, हाथ और पैरों की हड्डी शरीर के ऐसे हिस्से हैं जहां इसके होने की संभावना सबसे ज्यादा होती है। हालांकि ज्यादातर ट्यूमर्स में कैंसर नहीं होता यानी वे शरीर के दूसरे हिस्से में नहीं फैलते। वैसे बाकी कैंसरों की तुलना में बोन कैंसर यानी हड्डी के कैंसर के मामले कम देखने को मिलते हैं।
शोध के निष्कर्ष हाल ही में सेल रिपोर्ट वैज्ञानिक पत्रिका में प्रकाशित किए गए थे। शोध की इस सफलता के बाद शोधकर्ता अब मानव रोगियों पर जल्द ही इसका परीक्षण करने की योजना बना रहे हैं। शोधकर्ताओं को इसके सकारात्मक परिणाम मिलने की उम्मीद है। शोधकर्ताओं का कहना है कि अगर इस शोध के परिणाम मानव रोगियों पर भी सकारात्मक रहे तो यह उन रोगियों के लिए एक आशा की किरण बन कर आएंगे जो कैंसर खासकर हड्डी के कैंसर से पीड़ित हैं। डॉ. स्वाति ने कहा कि ‘हमारे निष्कर्ष इविंग सरकोमा के उपचार के लिए एक व्यक्तिगत दृष्टिकोण के लिए आधार प्रदान करते हैं।’
