मानस मनोहर
सहजन की तरकारी
सहजन यानी ड्रम स्टिक एक बहुत उपयोगी पेड़ है। इसे सहजना, सुजना, सेंजन, मुनगा आदि नामों से भी जाना जाता है। इस पेड़ के विभिन्न भाग अनेक पोषक तत्त्वों से भरपूर पाए गए हैं। इसकी पत्तियों और फली की सब्जी बनती है। इसका जड़ी-बूटियों में भी प्रयोग होता है। सहजन के लगभग सभी अंग- पत्ती, फूल, फल, बीज, डाली, छाल, जड़ें, बीज से प्राप्त तेल आदि- खाए जाते हैं। इसके फूलों को पका कर खाया जाता है और इनका स्वाद मशरूम जैसा होता है। सहजन कई बीमारियों को दूर करता और शरीर के हर अंग को मजबूती देता है। सहजन की पत्तियों की चटनी पेट की कृमियों को बाहर निकालने में काफी कारगर होती है। सहजन की पत्तियों का सूप टीबी, ब्रोंकाइटिस और अस्थमा पर नियंत्रण के लिए कारगर समझा जाता है। सहजन में काफी मात्रा में ओलिक एसिड होता है, जो शरीर के लिए अति आवश्यक है। यह हाजमे के लिए सबसे मुफीद सब्जी मानी जाती है।
यह सहजन की नई फलियां आने का मौसम है। सहजन की मुलायम फलियों की सब्जी कड़ी फलियों की अपेक्षा अधिक स्वादिष्ट बनती है। इन्हें चबा कर पूरी तरह खा जाने में भी परेशानी नहीं आती। हालांकि नई फलियां न मिलें, तो बड़ी और कड़ी फलियों की भी सब्जी बहुत स्वादिष्ट बनती है। सहजन की सब्जी बनाने के कई तरीके हैं। अगर नई और पतली फलियों की सब्जी बना रहे हैं, तो कच्चे नारियल के दूध में पकाएं, बहुत स्वादिष्ट बनेगी। कच्चे नारियल को पानी के साथ मिक्सर में पीस कर दूध निकाल लें। मोटी फलियां हैं तो उन्हें आलू के साथ भी बना सकते हैं। सहजन की तरकारी बनाने के लिए कुछ चीजें अनवार्य रूप से चाहिए होती हैं। इसमें भरपूर मात्रा में पिसी हुई राई और लहसुन डालना चाहिए। सहजन की फलियों को छोटा-छोटा काट लें। अब एक कड़ाही में तेल गरम कर राई और जीरे का तड़का लगाएं। उसमें बारीक कटा प्याज और लहसुन डाल कर नरम होने तक भूनें। अगर आलू के साथ सहजन की तरकारी बनाना चाहते हैं, तो आलुओं को पहले डालें और उन्हें आधा पक जाने दें। फिर उसमें हल्दी, सब्जी मसाला, थोड़ा अमचूर, लाल मिर्च पाउडर, पिसी हुई राई डालें और कटी हुई सहजन की फलियों को डाल कर थोड़ी देर पकने दें। फिर पानी डाल कर उसे गाढ़ा होने तक पकाएं। अगर नरम और नई फलियों की सब्जी बनाना चाहते हैं तो लहसुन-प्याज का तड़का तैयार होने के साथ ही उसमें कटी हुई फलियां डाल दें और ऊपर से सब्जी मसाला, पिसी हुई राई, हल्दी पाउडर, लाल मिर्च पाउडर डाल कर ठीक से मिला लें। अब कच्चे नारियल को पीस कर तैयार किया नारियल का दूध मिलाएं और गाढ़ा होने तक पकने दें। इस तरकारी को रोटी, परांठा या चावल के साथ खाएं, स्वादिष्ट लगेगा।
सत्तू के लड्डू
गरमी में सत्तू खाना या पीना इसलिए भी लाभदायक होता है कि इससे प्यास बहुत लगती है और इस तरह लगातार पानी पीने से शरीर में पानी की कमी नहीं होने पाती। सत्तू भुने हुए चने से तैयार होता है। यह गैस, कब्ज आदि समस्याओं को दूर करता है। सत्तू को घोल कर नमक या चीनी के साथ तो बहुत से लोग पीते हैं, बहुत से लोग इसकी बाटी, रोटी, कचौड़ी वगैरह भी बनाते हैं। पर सत्तू का लड्डू भी बनता है और बहुत आसानी से बन कर तैयार हो जाता है। इसे लंबे समय तक बना कर रखा जा सकता है। सत्तू का लड्डू राजस्थान में खूब खाया जाता है। सत्तू के लड्डू बनाने के लिए बहुत सामग्री नहीं चाहिए होती है। बाजार में पिसा हुआ चने का सत्तू आसानी से मिल जाता है। आधा किलो सत्तू लें। करीब चार सौ ग्राम देसी घी और इतनी ही पिसी हुई चीनी ले लें। इसके अलावा दो छोटी इलाइची के दानों को कूट कर पाउडर बना लें। करीब सौ ग्राम काजू और पिस्ता ले लें। इन्हें बारीक काट लें। अब एक कड़ाही में घी गरम करें। उसमें सत्तू का डाल कर पांच से सात मिनट तक मद्धिम आंच पर भूनें। जब सत्तू से महक आने लगे तो आंच बंद कर दें। लकड़ी की कलछी से चलाते हुए घी को ठीक से सत्तू में मिल जाने दें। ऊपर से कटे हुए काजू और पिस्ता के टुकड़े डाल कर मिला लें। अब सत्तू को अलग बर्तन में निकाल कर ठंडा होने दें। जब सत्तू पूरी तरह ठंडा हो जाए तो उसमें पिसी हुई चीनी या बूरा मिलाएं और एकसार कर लें। अब हथेलियों पर घी लगा कर थोड़ा-थोड़ा सत्तू लेते हुए लड्डू बना लें। आसानी से और सब मिठाइयों से अलग यह मिठाई आपका मन मोह लेगी।
