शास्त्री कोसलेन्द्रदास

यद्यपि भारत देश अनेक क्षेत्रों में विभाजित था और लोग भांति-भांति के संप्रदायों और उपसंप्रदायों में विभक्त रहा है किंतु तीथों और तीर्थयात्राओं ने वैदिक संस्कृति एवं देश की महत्त्वपूर्ण मौलिक एकता को गूंथ कर रखा है। भारत के विभिन्न क्षेत्रों में स्थित पवित्र स्थानों ने लोगों को परंपराओं, संयमशीलता एवं आध्यात्मिक स्तर पर अवस्थित कर रखा है।

पौराणिक मान्यता के अनुसार सात कल्याणकारी पुरियां हैं, जहां निवास मोक्ष देने वाला है। एक श्लोक है – अयोध्या मथुरा माया काशी कांची अवन्तिका। पुरी द्वारावती ह्येता: सप्तैता: मोक्षदायिका:।। संस्कृत में लिखे इस श्लोक का अर्थ है – अयोध्या, मथुरा, हरिद्वार, काशी, कांची, उज्जैन और द्वारका, ये सात पुरियां कल्याण करने वाली एवं मोक्ष देने वाली है।

अति सुहावनी अयोध्या

मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम की जन्मस्थली अयोध्या की महिमा अपरंपार है। रामचरितमानस में श्रीराम कहते हैं कि सुहावनी अयोध्या नगरी मेरी जन्मभूमि है। इसके उत्तर दिशा में जीवों को पवित्र करने वाली सरयू नदी बहती है, जिसमें स्नान करने से जीव बिना किसी प्रयास के ही श्रीराम को प्राप्त कर लेता है। कनक भवन और हनुमानगढ़ी यहां के अत्यंत श्रद्धास्पद धर्मस्थल हैं।

मथुरा में जन्मे नंदलाला

लीला पुरुषोत्तम भगवान श्रीकृष्ण ने अवतार लेकर मथुरा नगरी को धन्यता प्रदान की। माता यमुना का प्रवाह इसकी महिमा में ओर संवर्धन करता है। मथुरा में भगवान यशोदानंदन ने दुराचारी कंस का वध कर सत्य और धर्म की संस्थापना की है। मथुरा के साथ ही वृंदावन, गोवर्धन और बरसाना जैसे तीर्थ शास्त्रीय महिमा से संपन्न तीर्थ हैं, जहां भगवान गोविंद ने मनोहारी लीलाएं की।

हिमालय की
गोद में हरिद्वार

देवतात्मा हिमालय की गोद में माता गंगा की धारा ऋषिकेश और हरिद्वार हैं। हरिद्वार को न केवल हिमालय का बल्कि चार धामों की यात्रा का आरंभ माना जाता है। पौराणिक मान्यता के अनुसार हरिद्वार में गंगा में मृतक व्यक्ति की अस्थियों को प्रवाहित करने से वह संसार से मुक्त हो सद्गति को प्राप्त कर लेता हैं। इस वर्ष हरिद्वार में कुंभ मेले का आयोजन भी हो रहा है।

महादेव हैं काशीवासी

काशी को भारत की सांस्कृतिक राजधानी कहा जाता है। बारह ज्योतिर्लिंगों में एक भगवान् विश्वनाथ काशी में विराजमान हैं। शास्त्रीय मान्यता है कि काशी में मृत्यु होने से जीव को मोक्ष प्राप्त हो जाता है। भगवान विश्वनाथ के अतिरिक्त काशी में भगवान बिंदुमाधव, ढुंढिराज गणपति, दंडपाणि कालभैरव, गंगा, मणिकर्णिका और माता अन्नपूर्णा के मंदिर हैं। जगदगुरु रामानंदाचार्य और तैलंग स्वामी के मठ भी काशी में आस्था और श्रद्धा के केंद्र हैं।

कांची में है शंकराचार्य मठ

अद्वैत वेदांत के महान प्रचारक शंकराचार्य ने सुदूर दक्षिण में कांचीमठ स्थापित किया। इसे पंचभूतस्थलों में एक कहा जाता है। यहां के मठाधीश्वर शंकराचार्य कहलाते हैं। आज यह दक्षिण भारत के महत्त्वपूर्ण धार्मिक स्थलों में से एक है। माता कामाक्षी का पूजन यहां शताब्दियों से होता है।

उज्जैन में महाकाल का डेरा

क्षिप्रा नदी के किनारे शताब्दियों से भगवान महादेव महाकाल के रूप में विराजमान हैं। भगवान महाकाल की भस्म आरती जगप्रसिद्ध है। उज्जैन में भगवान महाकाल के अतिरिक्त भैरव देव के साथ विशिष्ट मंदिर हैं। कुंभ मेले के आयोज्य स्थानों में एक उज्जैन भी है।

द्वारका में श्रीकृष्ण

द्वारका चारधाम में एक और सप्तपुरियों में परिगणित है। भागवत के अनुसार जरासंध के आक्रमण से मथुरावासियों को बचाने के लिए भगवान श्रीकृष्ण ने द्वारका नगरी का निर्माण देवशिल्पी विश्वकर्मा से करवाया। गुजरात में भगवान द्वारकाधीश का मंदिर अनेक भक्तों के लिए श्रद्धा और आकर्षण के केंद्र हैं।