अमेरिका में पिछले कुछ समय से नस्ली आधार पर होने वाली हिंसा की घटनाएं वहां के समाज को शायद एक बार फिर उस दौर में ले जा रही हैं, जहां से निकलने में उसे बड़ी जद््दोजहद से गुजरना पड़ा था। यों ऐसी घटनाएं पहले भी होती थीं, तब भी हुर्इं जब ओबामा के रूप में एक अश्वेत देश का राष्ट्रपति था। लेकिन डोनाल्ड ट्रम्प के राष्ट्रपति बनने के बाद ऐसी घटनाओं में तेजी आई है। अमेरिका को फिर से महान बनाने के वादे पर सत्ता में आए ट्रम्प कैसा अमेरिका बना रहे हैं? ताजा घटना में कैलिफोर्निया में एक दुकान में मौजूद सिख युवक ने एक अमेरिकी ग्राहक को उचित पहचान पत्र के बिना सिगरेट बेचने से मना कर दिया। इसके बाद अमेरिकी युवक ने उस पर नस्ली टिप्पणियां कीं और उसे चाकू घोंप दिया, जिससे बाद में उसकी मौत हो गई। हाल के दिनों में अमेरिका में जिस तरह नस्ली नफरत की कई घटनाएं सामने आई हैं, यह हत्या उसी की कड़ी है। कुछ समय पहले वहां दो भारतीय इंजीनियरों की हत्या कर दी गई थी। इसके अलावा भी नस्ली टिप्पणियों के साथ भारतीयों और दूसरे समुदायों के खिलाफ हिंसा की कई घटनाएं सामने आर्इं।
चुनाव प्रचार के दौरान ट्रम्प ने जिस तरह अमेरिका में अश्वेतों, मुसलमानों सहित आप्रवासियों के प्रति भड़काऊ बयान दिए थे, उन्हें नस्ली हिंसा और श्वेत आक्रामकता की घटनाओं से अलग करके नहीं देखा जा सकता। अमेरिका में अगर इस प्रवृत्ति को नहीं रोका गया तो दुनिया भर में उसे किस निगाह से देखा जाएगा? विश्व भर में अमेरिका की छवि एक महाशक्ति और दबंग देश की रही है, पर इसके बरक्स वह खुलेपन, लोकतंत्र और मानवाधिकारों का पक्ष लेने वाला देश भी रहा है जिसने दुनिया भर से आए योग्य और प्रतिभाशाली लोगों को खुले दिल से अपनाया, उन्हें अपना कैरियर बनाने-संवारने के मौके दिए। अमेरिका की यह साख आज खतरे में है। दरअसल, कई बार किसी देश का सत्ताधारी समूह अपने व्यवहार से वहां के ताकतवर या बहुसंख्यक समुदाय का चरित्र और व्यवहार तय करने लगता है।
अमेरिका में नस्ली हिंसा की घटनाओं के पीछे संगठित रूप से काम करने वाले किसी दक्षिणपंथी समूह का सीधा हाथ नहीं भी हो सकता है। लेकिन कुछ बयानों और घटनाओं के जरिए एक उन्माद की हवा बना दी जाती है, और उसका खमियाजा अल्पसंख्यक तबकों या समुदायों को भुगतना पड़ता है। अमेरिका में रंगभेद की त्रासदी के खिलाफ तथा समान नागरिक अधिकार हासिल करने के लिए अश्वेतों को लंबे समय तक संघर्ष करना पड़ा था। लेकिन आज भी वहां कुछ लोग अश्वेतों, मुसलमानों या दूसरे आप्रवासियों से नस्ल या रंग के आधार पर नफरत के भाव में जी रहे हैं। लेकिन बहुरंगी और विविधतापूर्ण अमेरिका को नष्ट करना अमेरिका की सबसे मूल्यवान पूंजी को नष्ट करना होगा। आप्रवासी समुदायों को निशाना बनाने की घटनाएं और बातें यूरोप में भी होती हैं, पर फ्रांस में राष्ट्रपति पद के लिए हुए चुनाव के नतीजे ने बताया है कि उदारवाद की धार अब भी व्यापक और मजबूत है।

