हाल में दिल्ली से सटे गुरुग्राम में रेयान इंटरनेशन स्कूल में एक छात्र की हत्या की घटना के बाद राजस्थान के सीकर में एक छात्रा से सामूहिक बलात्कार की घटना से यह सवाल पैदा हुआ है कि स्कूल कितने सुरक्षित हैं! सीकर के हरदासकाबास गांव के एक निजी स्कूल में बारहवीं कक्षा की छात्रा के साथ बलात्कार करने में स्कूल का निदेशक और एक शिक्षक शामिल था। अतिरिक्त कक्षा के बहाने स्कूल में बुला कर दोनों ने छात्रा से बलात्कार किया। धमकी देकर आरोपी दो महीने तक उसका शोषण करते रहे। यही नहीं, गर्भवती हो जाने के बाद जब छात्रा का जबरन गर्भपात कराया गया तो उसकी तबियत खराब होने पर मामला सामने आया। शिकायत के बाद पुलिस ने दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। लेकिन आखिर अपराधी प्रवृत्ति के ऐसे लोग किन वजहों से ऐसी हिम्मत कर पाते हैं कि स्कूल परिसर में भी बच्चों के खिलाफ अपराध करने से नहीं डरते। क्या ये स्कूल सरकार और पुलिस प्रशासन की निगरानी और सख्ती के दायरे में नहीं आते?

इससे बड़ी विडंबना क्या होगी कि जिन स्कूलों में वहां के प्रबंधन और शिक्षकों के भरोसे लोग अपने बच्चों को पढ़ने भेजते हैं, वही लोग उन्हें अपनी हवस और आपराधिक कुंठाओं का शिकार बनाते हैं। आमतौर पर डॉक्टरों के पास हादसे का शिकार होकर कोई व्यक्ति आपात सहायता के लिए पहुंचता है, वे इलाज से पहले पुलिस बुलाने को कहते हैं। लेकिन इस मामले में सामूहिक बलात्कार की शिकार छात्रा को जबरन गर्भपात के लिए जिस डॉक्टर के पास ले जाया गया, उसने पैसे के लालच में पुलिस को खबर तक करना जरूरी नहीं समझा। इसलिए छात्रा के खिलाफ इस अपराध में पुलिस ने उचित ही संबंधित अस्पताल के दो डॉक्टरों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है। करीब सात महीने पहले सीकर की तरह ही बीकानेर में नोखा के एक निजी स्कूल में ऐसी ही घटना सामने आई थी, जिसमें आठ शिक्षकों ने तेरह साल की एक छात्रा का अश्लील वीडियो बना कर उसे ब्लैकमेल किया और डेढ़ साल तक सामूहिक बलात्कार किया था। इसके अलावा, बच्चों के यौन शोषण से लेकर मारपीट या हत्या तक की घटनाओं की खबरें आती रहती हैं।

ऐसे वाकये यह बताने के लिए काफी हैं कि लोग जिन स्कूलों में अपने बच्चों की जिंदगी संवारने के लिए भेजते हैं, वे शायद पूरी तरह निश्चिंत होकर भरोसा किए जाने लायक नहीं हैं। जरूरत इस बात की है कि स्कूल में जाने वाले बच्चों से उनके अभिभावक लगातार संवाद में रहें, उन्हें भरोसे में लेकर उनकी दिनचर्या और उनके अच्छे-बुरे अनुभवों पर बात करें। निजता से जुड़े कुछ मामलों के प्रति सामाजिक आग्रहों और नजरिए की वजह से बच्चे कई बार अपने साथ होने वाले आपराधिक दुर्व्यवहार के बारे में अपने अभिभावकों को भी कुछ बताने से डरते या हिचकते हैं। बच्चों से होने वाले दुर्व्यवहार या उनके खिलाफ अपराधों की पूरी प्रवृत्ति इस जरूरत को रेखांकित करती है कि बच्चों को शुरू से इस बात के लिए घर में ही ऐसे प्रशिक्षित किया जाए, ताकि वे अपने साथ किसी भी बर्ताव की पहचान कर सकें और वक्त पर अपने अभिभावकों को बता सकें। इसके अलावा, अगर लोग एक भरोसे के तहत अपने बच्चों को स्कूल भेजते हैं तो उनके हर तरह से सुरक्षित माहौल में पढ़ाई-लिखाई तय करना सरकार की भी जिम्मेदारी है। सरकार और प्रशासन की निगरानी, सख्ती और सजगता स्कूल प्रबंधनों को इस बात के लिए जवाबदेह बनाएगा कि वे परिसर को सुरक्षित बनाएं।