अगर रोजर फेडरर को टेनिस की दुनिया का बादशाह कहा जाए तो इसमें कोई अतिशयोक्ति नहीं है। स्विट्जरलैंड के इस महान खिलाड़ी ने रविवार को मेलबर्न में जो कमाल दिखाया उसने उनके साथ-साथ टेनिस को भी एक नई ऊंचाई पर पहुंचा दिया। गुजरे पांच दशक में यह पहला मौका है जब किसी खिलाड़ी ने पुरुषों के सिंगल मुकाबले में बीस ग्रैंडस्लैम जीत कर इतिहास रच डाला। फेडरर की यह उपलब्धि इसलिए भी महत्त्वपूर्ण है कि उन्होंने रोमांचित कर देने वाली जीत के साथ यह रेकार्ड साढ़े छत्तीस साल की उम्र में हासिल किया, जबकि अमूमन खिलाड़ी और वह भी खासकर टेनिस में, इस उम्र तक पहुंचने से पहले ही चुक जाते हैं। इससे पहले, रोजवाल अपवाद थे, जिन्होंने 1972 में जब आॅस्ट्रेलियन ओपन जीता था तब उनकी उम्र सैंतीस साल तिरसठ दिन थी। लेकिन रेकॉर्ड तो आखिरकार फेडरर ने बनाया!
फेडरर के महान बनने की इस यात्रा में कई पड़ाव हैं जिनको पार करते हुए आज वे इस मुकाम तक पहुंचे हैं। आठ बार विंबलडन का खिताब उनके नाम है। वर्ष 2008 को छोड़ दें तो 2003 से 2009 तक लगातार उन्होंने विंबलडन जीता, फिर 2012 और 2017 में भी इस पर कब्जा जमाया। 2004 से 2008 तक लगातार यूएस ओपन चैंपियन रहे। 2009 में फ्रेंच ओपन का खिताब अपने नाम किया। 2004, 2006, 2007, 2010, 2017 और 2018 का, यानी छह बार आॅस्ट्रेलियन ओपन जीता। आज सबसे ज्यादा यानी बीस ग्रैंडस्लैम फेडरर के ही पास हैं। अपनी इस अपूर्व उपलब्धि से उन्होंने राफेल नाडाल, जिन्होंने सोलह ग्रैंडस्लैम जीते हैं, सहित टेनिस के सात दिग्गजों को पीछे छोड़ दिया है।
इस तरह, आॅस्ट्रेलिया के रॉय एमरसन और सर्बिया के नोवाक जोकोविच के साथ रोजर फेडरर भी अब उस सूची में शामिल हो गए हैं जिन्होंने छह बार आॅस्ट्रेलियन ओपन जीता है। जीत-हार के खाते में देखें तो फेडरर ने आॅस्ट्रेलियन ओपन में कुल चौरानवे मैच जीते हैं। दूसरे ग्रैंडस्लैम टूर्नामेंटों में फेडरर ने 332 मैच जीते और 52 में हारे। इस बार फेडरर जिस तरह से कोर्ट पर उतरे थे, उन्हें देख कर लग रहा था कि वे हर वार के लिए तैयार हैं। पूरी दुनिया के टेनिस प्रेमियों की निगाहें उन पर लगी थीं। तीन घंटे तीन मिनट के कड़े मुकाबले में उन्होंने क्रोेएशिया के मारिन सिलिच को हरा दिया। फेडरर इस बार बिना कोई सेट हारे आॅस्ट्रेलियन ओपन के फाइनल में पहुंचे थे।
फेडरर वाकई एक जुनूनी खिलाड़ी हैं। पिछले साल जब उन्होंने इसी जगह पर आॅस्ट्रेलियन ओपन जीता था, तभी उन्होंने इस बुलंदी को छूने का भी सपना देखा होगा। फेडरर ने दर्शकों का शुक्रिया अदा करते हुए कहा भी कि यह मेरा एक सपना था जो आज सच हो गया और मेरी यह यात्रा थमने वाली नहीं है। जाहिर है, उनके यह कहने में काफी कुछ छिपा है। रेकार्ड बनाने-तोड़ने की कोई सीमा नहीं होती। आस्ट्रेलिया की मार्गरेट कोर्ट, अमेरिका की सेरेना विलियम्स और जर्मनी की स्टेफी ग्राफ, ये तीन महिला खिलाड़ी ग्रैंडस्लैम जीतने में फिलहाल फेडरर से आगे हैं। कोर्ट के पास चौबीस, सेरेना के पास तेईस और स्टेफी ग्राफ के पास बाईस ग्रैंडस्लैम खिताब हैं। वैसे फेडरर की उपलब्धियों और इतिहास रचने की इनसे कोई तुलना इसलिए नहीं हो सकती, क्योंकि उनका हासिल पुरुषों के सिंगल में है। पर चौबीस ग्रैंडस्लैम के कोर्ट के रेकार्ड को तोड़ने का सपना तो फेडरर देख ही सकते हैं!
