लोकसभा में कराधान कानून (दूसरा संशोधन) विधेयक, 2016 पारित होते ही सोने को लेकर लोगों में चिंता और परेशानी का भाव स्वाभाविक है। सब जानते हैं कि भारत में सोने यानी स्वर्ण के प्रति कैसा परंपरागत लगाव रहा है। इसके अलावा, सोने में निवेश को भारतीय सबसे सुरक्षित निवेश समझते रहे हैं। फिर, कुछ न कुछ मात्रा में यह बहुत सारे लोगों को विरासत में या ब्याह में उपहार के तौर पर मिला होता है। जो अपने लिए नहीं खरीद पाते, बेटी या बहू के लिए जरूर कुछ न कुछ मात्रा में खरीदते हैं। सोना या स्वर्णाभूषण कोई बेचने की तभी सोचता है जब संकटकाल हो और कोई दूसरा चारा न हो, या जीवन का कोई बहुत आवश्यक काम पूरा करने के लिए कोई अन्य सहारा न हो। यही कारण है कि सोने की मात्रा बाद की पीढ़ी में बढ़ी हुई हो सकती है। लेकिन नोटबंदी की वजह से चल रही अफरातफरी के बीच सरकार की नई घोषणा ने लोगों को एक और उलझन में डाल दिया है। यों सरकार का कहना है कि अफवाहों पर विराम लगाने के लिए उसने स्पष्टीकरण जारी किया है, पर हुआ यही है कि फिलहाल लोगों में संशय और अनिश्चितता का आलम है।

सीबीडीटी यानी केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड के बयान के मुताबिक पुश्तैनी सोने पर कोई टैक्स नहीं लगेगा। अगर घरेलू बचत, कृषि आय या घोषित आय के जरिए सोना खरीदा गया है तो उस पर भी कोई टैक्स नहीं लगेगा। पर इसी के साथ, सीबीडीटी ने यह भी बताया है कि सोने की कितनी मात्रा वैध होगी, कितनी मात्रा रखने पर कोई पूछताछ नहीं होगी या कोई नोटिस नहीं दिया जाएगा। विवाहित महिला के पास पांच सौ ग्राम, अविवाहित महिला के पास ढाई सौ ग्राम और पुरुष के पास सौ ग्राम तक सोना मिलता है तो कोई पूछताछ या अन्य कार्रवाई नहीं होगी। अगर किसी परिवार में सोना लेने-देने की परंपरा है तो इस सीमा से अधिक सोना मिलने पर भी वह जब्त नहीं होगा। स्पष्टीकरण का मकसद यही रहा होगा कि अनावश्यक भय या घबराहट न फैले। मगर सरकार की ताजा घोषणा से बड़े पैमाने पर आशंकाएं पनपी हैं। सोने-चांदी या खरीदे गए आभूषण की रसीद लोग कुछ समय तक ही रखते हैं, हमेशा उसे संभाल कर रखना व्यावहारिक नहीं होता। फिर, जहां सोना या जेवरात पुश्त-दर-पुश्त विरासत में मिलता हो, वहां रसीद हो भी कैसे सकती है।

कैसे यह साबित होगा कि किसी परिवार के पास मौजूद सोना विरासत में मिला नहीं है? कितने लोगों के पास पुश्तैनी तौर पर मिले सोने का वसीयत-प्रमाण होगा? फिर, यह भी कैसे जांचा जाएगा कि काफी पहले खरीदा गया सोना कृषि-आय से नहीं खरीदा गया था? किसी को उपहार के तौर पर पचास-सौ ग्राम सोना कभी मिला था, पर उसने सपने में भी सोचा नहीं होगा कि उससे कभी गिफ्ट डीड मांगा जाएगा। ऐसे अनेक सवाल हैं जो नए घोषित नियमों से उठे हैं और यह अंदेशा पैदा करते हैं कि कहीं ये नियम-कायदे इंस्पेक्टर-राज की वापसी और भ्रष्टाचार व उत्पीड़न का जरिया न बन जाएं। यह सही है कि सोना काला धन रखने का एक बड़ा जरिया है और काले धन से निपटना है तो सोने पर नजर रखनी होगी। पर हर घर में अपने सोने को वैध साबित करने का भय पैदा करने के बजाय सरकार को सोने की तस्करी और अवैध खरीद-बिक्री रोकने पर ध्यान देना चाहिए। विचित्र है कि विधेयक लोकसभा में बिना किसी बहस के पारित हो गया, जिसे बहुमत का दुरुपयोग ही कहा जाएगा।