दुबई में शनिवार को बॉलीवुड अभिनेत्री श्रीदेवी की अचानक मौत की वजहों पर अब तमाम तरह के कयास लगाए जा रहे हैं। पहले जहां वजह के रूप में हृदयाघात की बात सामने आई, वहीं अब कई तरह की आशंकाएं सामने आ रही हैं। जांच के अंतिम निष्कर्ष सामने आने में अभी शायद वक्त लगे। लेकिन इससे इतर सच यह है कि भारतीय सिनेमा से एक प्रतिभाशाली कलाकार अब खो गई। यह घटना अफसोस की बात इसलिए भी है कि करीब साढ़े तीन दशक तक बॉलीवुड में लगातार अपनी मौजूदगी बनाए रखते हुए श्रीदेवी ने हाल तक फिल्मों में अपनी बेहतरीन अदाकारी के साथ एक खास अभिनेत्री की छवि बनाए रखी की। महज चार साल की उम्र में फिल्म में अभिनय से शुरुआत करने के बाद अपने पूरे करियर के दौरान उन्होंने अपनी क्षमता का लोहा मनवाया और दो सौ से ज्यादा फिल्मों में काम किया। दक्षिण भारत की तमिल, तेलुगू और मलयालम फिल्मों सहित बॉलीवुड के हिंदी सिनेमा जगत में सुपर स्टार के रूप में मशहूर श्रीदेवी ने जो जगह बनाई, वैसी कम अभिनेत्रियों को मिल पाती है।
दरअसल, आठ साल की उम्र में जब मलयालम फिल्म ‘पूमबत्ता’ से वे पहली बार चर्चा में आर्इं, तभी से उनके करियर का ग्राफ ऊंचा चढ़ता गया। बल्कि उन्नीस साल की उम्र तक आते-आते उन्होंने कई फिल्मों में अपने अभिनय की धूम मचा दी। वे दक्षिण भारत में एक स्टार के रूप में जानी जाने लगी थीं। फिर कुछ सालों के भीतर दक्षिण भारत की फिल्मों में उनका कद काफी ऊंचा हो गया, लेकिन शायद उनका मकसद हिंदी फिल्मों की दुनिया में अपनी जगह बनाना था। बॉलीवुड में पांव जमाने की कोशिशों के शुरुआती दिनों में उन्हें संघर्ष करना पड़ा, लेकिन बाद में हिंदी फिल्मों में उन्होंने जो छवि अर्जित की, वह दुनिया के सामने रहा। अस्सी के दशक में ‘हिम्मतवाला’, ‘तोहफा’, ‘नगीना’ और बाद में ‘चांदनी’, ‘मिस्टर इंडिया’ जैसी कई सुपरहिट फिल्मों के साथ उन्होंने हिंदी सिनेमा की दुनिया में एक खास ऊंचाई हासिल की। हालांकि बोनी कपूर से विवाह के बाद उन्होंने फिल्मों से दूरी बना ली थी। लेकिन 2012 में जब वे ‘इंग्लिश विंग्लिश’ और फिर पिछले साल ‘मॉम’ में नजर में आर्इं, तब भी वे अपने अभिनय की पुरानी सुपर स्टार वाली छवि की याद दिला गर्इं।
खास बात यह रही कि सामान्य भारतीय परिवार की एक महिला से लेकर किसी मासूम और रोमांटिक पात्र या फिर गंभीर, आक्रामक और चुनौतीपूर्ण भूमिका निभाने में भी उन्होंने अपनी क्षमता साबित की। फिल्मों में आमतौर पर नायक के सामने नायिका की भूमिका दब जाती है। लेकिन श्रीदेवी की शायद सभी फिल्मों में लोगों ने उन्हें हीरो के समांतर या उस पर हावी भूमिकाओं में ही देखा। यानी जिन फिल्मों में श्रीदेवी मौजूद रहीं, उनके दर्शकों के जेहन में अगर किसी किरदार की याद रह जाती थी, तो वे वही थीं। उन्हें अब जिस रूप में याद किया जाएगा, वह इसलिए भी अहम है कि अभिनय और मनोरंजन की दुनिया में पहली बार किसी नायिका को सुपर स्टार के रूप में जाना गया। हाल के सालों में एक बार फिर उन्होंने परदे पर जिस तरह वापसी की थी और सेहत के लिहाज से उन्हें जिस तरह एक स्वस्थ व्यक्तित्व के रूप में देखा जाता था, वैसे में अचानक उनकी मौत किसी के लिए भी दुखी कर जाने वाली बात है। श्रीदेवी के जाने से उनके प्रशंसक बेहद आहत हैं।
