जम्मू-कश्मीर में नियंत्रण रेखा पर तैनात भारत के सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) के एक जवान ने फेसबुक पर चार वीडियो अपलोड करके जवानों को दिए जाने वाले भोजन के संबंध में जो आरोप लगाए हैं, वे बेहद गंभीर हैं। इसकी फौरन जांच होनी चाहिए। अपलोड होने के चौबीस घंटे के भीतर इस वीडियो को पैंसठ लाख बार देखा गया। करीब आठ हजार लोगों ने गुस्से और हैरानी भरी प्रतिक्रिया दी है। इस वीडियो में वह जवान यह कहते हुए दिखाई पड़ रहा है कि ‘इसके बाद शायद मैं रहूं या न रहूं। अधिकारियों के हाथ बहुत बड़े हैं। वो मेरे साथ कुछ भी कर सकते हैं।’ सोशल मीडिया पर इस वीडियो की गूंज का असर यह रहा कि आखिरकार गृहमंत्री राजनाथ सिंह को हस्तक्षेप करना पड़ा। उन्होंने इस मामले में गृहसचिव से रिपोर्ट तलब की और ट्वीट कर कहा कि उन्होंने बीएसएफ के जवानों के शोषण संबंधी इस वीडियो को खुद देखा है। इससे बीएसएफ के अफसर बचाव की मुद्रा में आ गए हैं। बीएसएफ ने पहले कहा कि वह अपने जवानों की जरूरतों को पूरा करने के लिए तत्पर रहता है, किसी एक शख्स को परेशनी हुई हो तो इसकी जांच की जाएगी।
इस संबंध में कुछ बिंदु गंभीर बहस की मांग करते हैं। जैसा कि लंबे समय से देखा जा रहा है कि हमारे सुरक्षा बलों और अदालतों के भीतर पनपने वाले भ्रष्टाचार को अक्सर देशहित, गोपनीयता और अनुशासन आदि के नाम पर छिपाया जाता रहा है। जबकि बड़े-बड़े रक्षा सौदों में घोटालों से लेकर कई तरह के घपले सामने आने से जाहिर है कि हमारे रक्षातंत्र में सबकुछ ठीक नहीं चल रहा है। छोटे-मोटे मामलों को निजी शिकायत या अनुशासनहीनता के बट्टेखाते में डाल कर बड़े अधिकारी अक्सर मामले को ठंडा करने की कोशिश करते हैं। वीडियो में भोजन की जो गुणवत्ता दिख रही है, वह निश्चित रूप से घटिया है, और वह पौष्टिक तो कहीं से नहीं है। एक जवान ने जोखिम उठा कर इस तरफ ध्यान खींचा है, तो इसका कुछ सकारात्मक परिणाम निकलना चाहिए। लेकिन बीएसएफ अधिकारियों के जिस तरह के बयान आ रहे हैं, उससे उनकी कार्यप्रणाली पर ही सवालिया निशान लगता है।
अधिकारियों ने उस जवान को नियंत्रण रेखा से हटा कर मुख्यालय पर तैनात कर दिया है। अधिकारी मीडिया के सामने इस बात का जवाब नहीं दे रहे हैं कि जो भोजन वीडियो में दिख रहा है, वह अपौष्टिक है या नहीं। वीडियो सच है या झूठ? बल्कि अफसर इस बात पर एतराज जता रहे हैं कि जवान के पास मोबाइल पहुंचा कैसे? बीएसएफ के आईजी रैंक के एक अफसर ने कहा कि वह जवान पहले से कोर्टमार्शल के तहत विचाराधीन है और उस पर शराबखोरी तथा बदसलूकी के भी आरोप हैं। अफसरों की यह दलील इसलिए बेदम नजर आती है कि अगर वह ऐसा है तो इतने संवेदनशील स्थान पर उसकी तैनाती क्यों की गई थी? फिर, पहले उस पर लग चुके आरोपों की सच्चाई जो हो, यहां मुद््दा बेस्वाद और घटिया खुराक का है, न कि मोबाइल के उस तक पहुंचने या न पहुंचने का। रक्षा बजट में अमूमन हर साल उल्लेखनीय बढ़ोतरी होती रही है। इसलिए अगर कहीं जवानों को घटिया खाना मिले, तो उसकी वजह आबंटन की कमी नहीं हो सकती है। फिर, असली वजह क्या हो सकती है!
