कालेधन के खिलाफ विमुद्रीकरण के बाद केंद्र सरकार ने अब एक और तरकीब आजमाने का फैसला किया है। आगामी वित्तवर्ष की पहली तारीख यानी एक अप्रैल, 2017 से तीन लाख रुपए से अधिक नकद लेन-देन पर सौ फीसद जुर्माना लगेगा। यह उस व्यक्ति से वसूला जाएगा जो राशि स्वीकार करेगा। दो लाख रुपए से अधिक के लेन-देन पर पैन नंबर की अनिवार्यता पहले ही लागू की जा चुकी है। गौरतलब है कि प्रधानमंत्री ने आठ नवंबर को पांच सौ और हजार रुपए के नोटों के विमुद्रीकरण का एलान करने के बाद कालेधन से निपटने के लिए कुछ और भी कदम उठाने के संकेत दिए थे, जिनमें बेनामी संपत्तियों की छानबीन करना अहम था। उस मामले में फिलहाल कोई स्पष्ट पहल अभी तक नहीं हुई है, लेकिन बड़ी राशि के नकद लेन-देन पर रोक लगाने की घोषणा को एक अहम कदम माना जा रहा है।

इसी अवसर पर यानी रविवार को राजस्व सचिव हसमुख अढिया ने कहा कि कालेधन के निर्माण का एक अहम कारण बड़ी मात्रा में नकदी का प्रचलन है। इसे हतोत्साहित करने के लिए ही सरकार ने तीन लाख रुपए से अधिक की रकम के एकमुश्त लेन-देन पर सौ रुपए जुर्माना लगाने की तैयारी की है। यानी अगर कोई व्यक्ति किसी को चार लाख रुपए नकद में भुगतान करेगा तो राशि को स्वीकार करने वाले को चार लाख का जुर्माना भरना पड़ेगा। यह व्यवस्था किसी सामान आदि की खरीदारी पर भी लागू होगी। विशेषज्ञों का मानना है कि नोटबंदी के बाद बैंक खातों में बड़ी मात्रा में काला धन भी जमा हुआ है। यह आशंका है कि जमाकर्ता ज्यादा से ज्यादा नकद निकल कर उसे दोबारा कालेधन के रूप में जमा करने की कोशिश करेंगे। ऐसा लगता है कि सरकार का ताजा कदम इस तरह की नकदी को प्रचलन में आने से रोकना है। राजस्व सचिव ने कहा भी है कि सरकार सभी बड़े नकद लेन-देन को अपनी नजर में रखना और संदिग्ध लेन-देन पर रोक लगाना चाहती है।

दरअसल, वित्तमंत्री अरुण जेटली ने 2017-18 के बजट में आय कर कानून में धारा-269 एसटी जोड़ने का प्रावधान किया है, जिसमें कहा गया है कि कोई भी व्यक्ति एक दिन में, एक व्यक्ति से एकल लेन-देन या किसी एक मामले या मौके पर तीन लाख से अधिक की नकदी स्वीकार नहीं करेगा। यह अंकुश सरकारी बैंक, डाकघर बचत आदि पर लागू नहीं होगा। इस बार के आम बजट ने नकद राजनीतिक चंदे की सीमा बीस हजार से घटा कर दो हजार करने का प्रावधान पेश किया है। लेकिन उस प्रस्ताव की तरह ताजा फैसले में भी कई छेद दिख रहे हैं और कुछ बातें फिलहाल स्पष्ट नहीं हैं। मसलन, तीन लाख से अधिक की जो राशि जब्त की जाएगी, क्या उसी को जुर्माना मान लिया जाएगा या जुर्माने की राशि अतिरिक्त होगी। प्रावधान में चौबीस घंटे की मियाद रखी गई है। यानी यह रास्ता खुला हुआ है कि कोई व्यक्ति दूसरे चौबीस घंटे में फिर तीन लाख का लेन-देन कर सकता है या एक ही व्यक्ति को एक ही मामले में एक से अधिक लोग नकद भुगतान कर सकते हैं। इन छिद्रों के होते हुए कहना मुश्किल है कि ताजा फैसला कालेधन का रास्ता बंद करने में कितना कारगर हो पाएगा।