जम्मू-कश्मीर का शोपियां जिला आतंकवाद तथा उपद्रव की घटनाओं के लिए कई बार सुर्खियों में आ चुका है। पत्थरबाजी के वाकये तो बहुत दफा पूरी घाटी में हो चुके हैं। लेकिन बुधवार को शोपियां के जावूरा इलाके में जो हुआ, वैसा शायद पहले कभी नहीं हुआ था। पत्थरबाजी कर रही भीड़ में से कुछ लोगों ने एक स्कूली बस को भी नहीं बख्शा, जिसमें कोई पचास बच्चे सवार थे। चार से सात साल के इन बच्चों में दो बच्चे पत्थर लगने से जख्मी हो गए, और उनमें से एक गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती है। खबरों के मुताबिक पत्थरबाजी कर रही भीड़ दो आतंकियों के सुरक्षा बलों के साथ मुठभेड़ में मारे जाने पर विरोध जता रही थी। अव्वल तो विरोध का औचित्य ही सवालों के घेरे में था। पर इस तरह के विरोध-प्रदर्शन राज्य में मुठभेड़ की अनेक घटनाओं के बाद हो चुके हैं। पर कभी भी मासूमों को निशाना नहीं बनाया गया। इसलिए सहज ही सवाल उठता है कि जावूरा में स्कूली बस पर पत्थर फेंके जाने के पीछे क्या नीयत थी, और किसका हाथ था?
इस वाकये से एक बार फिर यही संकेत मिलता है कि राज्य में होने वाले हिंसक विरोध-प्रदर्शन दिशाहीन और नेतृत्व-विहीन होते हैं। हो सकता है उनमें भोले-भाले लोग भी शामिल रहते हों, पर शरारती हमेशा उन्हें किसी गलत दिशा में भड़काने या खुद कोई कांड करने की फिराक में रहते हैं। जावुरा की इस घटना पर स्वाभाविक ही राज्य में तीखी प्रतिक्रिया हुई है। मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने इसे पागलपन-भरा और कायराना कृत्य बताते हुए दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने और षड्यंत्र की तह में जाने की बात कही है। पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने ट्वीट कर कहा कि पथराव करने वालों को जो माफी दी गई थी उसका मकसद समुचित व्यवहार को बढ़ावा देना था, लेकिन कुछ गुंडे माफी का इस्तेमाल अधिक पथराव के अवसर के रूप में कर रहे हैं। गौरतलब है कि मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने 2008 के बाद से पहली बार पथराव करने वालों के लिए इस साल जनवरी में माफी की घोषणा की थी। अलगाववादी हुर्रियत के दोनों धड़ों के नेताओं ने भी जिस तरह स्कूली बस पर पथराव की निंदा की है उससे इस घटना पर राज्य में हुई आम प्रतिक्रिया का ही आभास होता है। एक दूसरी चिंताजनक घटना मंगलवार को हुई। चार वाहनों में श्रीनगर जा रहे सैंतालीस पर्यटकों पर अनंतनाग के अशमुकाम में पथराव किया गया। कई पर्यटक घायल हो गए। घायलों को अस्पताल पहुंचाने में पुलिस के अलावा स्थानीय लोग भी शामिल थे।
यह इस बात का संकेत है कि घाटी के तमाम लोगों को केंद्र और राज्य की सरकार से जो भी शिकायत हो, कश्मीर समस्या और उसके समाधान को लेकर उनके जो भी खयाल हों, वे हरगिज नहीं चाहते कि सैलानियों को नुकसान पहुंचाया जाए; वैसे भी पर्यटन तो राज्य की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है। फिर स्कूल में जा रहे बच्चे तो कहीं बाहर या दूर के नहीं, उनके अपने मासूम हैं। आखिर इन मासूमों से किसी की क्या दुश्मनी हो सकती है? इन पर पत्थर बरसा कर वे क्या कहना चाहते हैं? यह इंसानियत के खिलाफ है। बुधवार को शोपियां में ही पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी के मुख्य सचेतक और विधायक मोहम्मद यूसुफ बट के मकान पर उपद्रवियों ने पेट्रोल बम से हमला कर दिया। ऐसे तत्त्वों से सख्ती से निपटने की जरूरत तो है ही, यह भी पता लगाया जाना चाहिए कि इन्हें उकसावा या मदद कहां से मिलती है।
