नोटबंदी के पीछे मंशा थी कि इससे न सिर्फ काले धन का पता लगाया जा सकेगा, बल्कि नकली नोट छापने वालों पर भी नकेल कसी जा सकेगी। मगर नए नोट बाजार में आते ही जाली नोटों ने भी अपनी पैठ बनानी शुरू कर दी। पिछले चार महीनों में जगह-जगह पड़े छापों में भारी पैमाने पर पांच सौ और दो हजार रुपए के नकली नोट पकड़े गए। इससे स्वाभाविक ही सरकार की चिंता बढ़ी है। गृह और वित्त मंत्रालय के अधिकारियों ने उच्चस्तरीय बैठक कर इस समस्या से पार पाने के उपायों पर विचार किया है। अब सरकार विकसित देशों की तरह अपने यहां भी हर तीन-चार साल में नोटों की डिजाइन और सुरक्षा फीचर में बदलाव करने पर विचार कर रही है। पकड़े गए नकली नोटों में पाया गया कि सत्रह सुरक्षा फीचर में से कम से कम ग्यारह की हूबहू नकल की गई है। इसकी वजह बताई जा रही है कि लंबे समय से नोटों के डिजाइन और सुरक्षा फीचर में बदलाव नहीं किया गया। सत्रह साल पहले एक हजार रुपए का नोट चलन में आया था, तबसे लेकर आखिर तक उसकी डिजाइन में कोई बदलाव नहीं किया गया। पांच सौ रुपए के नोट के मामले में भी यही स्थिति थी। नए नोटों में भी सुरक्षा फीचर पुराने तरीके से तैयार किए गए हैं।

बाजार में नकली नोटों का प्रवाह बढ़ने से सरकार को राजस्व घाटा उठाने के साथ-साथ महंगाई आदि को रोकने में भी मुश्किल आती है। इससे आतंकवादी, नक्सली और दूसरे संगठित अपराध करने वालों के आर्थिक स्रोतों पर अंकुश लगाना कठिन हो जाता है। इसलिए विकसित देशों में कुछ-कुछ अंतराल पर नोटों की डिजाइन और सुरक्षा फीचर को बदल दिया जाता है। मगर नोटों की छपाई खासा खर्चीला और तकनीकी रूप से पेचीदा काम है, इसलिए हमारे यहां सरकारें ऐसा करने से बचती रही हैं। फिर बार-बार नोटों को बदलने से भारत जैसे विशाल आबादी और मुख्य रूप से नगदी पर निर्भर रहने वाले देश में पुराने नोटों की अदला-बदली को लेकर अफरा-तफरी का माहौल बनने और बैंकों पर काम का बोझ बढ़ने की संभावना रहती है। ऐसे में सरकार नकली पर नकेल कसने के लिए थोड़े-थोड़े अंतराल पर नोटों का स्वरूप बदलने पर विचार कर रही है, तो उसे इन समस्याओं से पार पाने के व्यावहारिक उपाय भी सोचने होंगे।

जाली नोटों का कारोबार हमारे यहां इसलिए भी आसानी से पांव पसार लेता है कि सामान्य और कम पढ़े-लिखे लोगों, साधारण दुकानदारों आदि के लिए नोटों में इस्तेमाल सभी सुरक्षा फीचर की पहचान करना संभव नहीं होता। बैंकों में पहुंचने के बाद ही खास मशीन से उनके असली या नकली होने की मुकम्मल जांच हो पाती है। ऐसे में कुछ ऐसे तरीके इस्तेमाल करने होंगे, जिससे सामान्य लोग भी नकली नोटों की पहचान कर सकें। यह कम हैरान करने वाली बात नहीं है कि नए नोटों के आने के कुछ ही दिनों बाद बाजार में बड़े पैमाने पर नकली नोट भी आ गए। हालांकि इस कारोबार में शामिल कुछ लोगों की गिरफ्तारी भी हुई, पर यह संगठित रूप से चलाई जाने वाली गतिविधि है, जिस पर नजर रखने के कड़े उपायों पर विचार की जरूरत है। यह भी तथ्य उजागर हो चुका है कि नकली के चलन को बढ़ावा देने और काले धन को सफेद बनाने में कुछ बैंक कमिर्यों की संलिप्तता होती है, इसलिए इस प्रवृत्ति पर भी अंकुश लगना चाहिए।

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