गाजा पट्टी की ओर से शनिवार को किए गए हमास के राकेट हमले के बाद उस समूचे इलाके में पहले से जटिल हालात और ज्यादा बिगड़ गए। अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू को इसे ‘जंग की स्थिति’ कहना पड़ा। उन्होंने यहां तक कहा कि हमारे दुश्मनों को इसकी ऐसी कीमत चुकानी होगी, जिसके बारे में उनको पता भी नहीं होगा।

दूसरी ओर, हमास के एक नेता ने भी कहा कि ‘अब बहुत हो चुका’। यानी एक तरह से हमास और इजराइल के बीच खुले युद्ध का एलान हो गया है और अब नहीं चाहने के बावजूद दुनिया के सामने एक और ऐसी त्रासदी को देखने की नौबत आ गई है, जिसमें आखिरी खमियाजा आम लोगों को ही भुगतना पड़ता है।

ताजा हमले के बाद हमास ने दावा किया कि उसने बीस मिनट के भीतर इजराइल पर पांच हजार राकेट दागे। इसके अलावा, हमास के कई आतंकी भी इजराइली सीमा के भीतर दाखिल हो गए और उन्होंने वहां के कई सैनिकों को पकड़ने का भी दावा किया। दोनों तरफ जान-माल का अच्छा खासा नुकसान हुआ है। साथ ही हिज्बुल्ला के भी मैदान में कूद पड़ने से नए समीकरण उभरने के संकेत हैं।

इजराइल और हमास के बीच टकराव से इस बार न केवल उस समूचे क्षेत्र में तस्वीर ज्यादा बिगड़ने की आशंका है, बल्कि इसका अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी असर पड़ सकता है। दरअसल, पहले दिन ही फ्रांस, जर्मनी और यूरोपीय संघ ने जहां हमास के हमलों की निंदा की, वहीं ईरान की ओर से हमास का समर्थन करने की खबरें आईं।

यानी इस मसले पर अभी से खेमे बनने शुरू हो गए हैं और कहना मुश्किल है कि ताजा घटनाक्रम कौन-सी दिशा अख्तियार करेगा। इसलिए स्वाभाविक ही इजराइल में भारतीय दूतावास ने कहा कि मौजूदा हालात को देखते हुए वहां रह रहे भारतीय सतर्क रहें और स्थानीय प्रशासन की ओर से दिए जा रहे दिशानिर्देशों का पालन करें।

इस बार हमास के तेज हमले और उसके प्रति इजराइल की प्रतिक्रिया में जिस स्तर का तीखापन देखा जा रहा है, उसमें हालात तुरंत संभलने की उम्मीद कम ही है। इजराइली सेना ने भी युद्ध की घोषणा कर दी है। अब युद्ध और हिंसा का दायरा यदि और फैला तो इसकी चपेट में अधिक संख्या में आम नागरिक आएंगे।

गौरतलब है कि हमास और इजराइल के बीच टकराव का एक लंबा इतिहास रहा है। वेस्ट बैंक, गाजा पट्टी, गोलन हाइट्स पर कब्जे को लेकर दो अलग-अलग पक्षों और पूर्वी येरूशलम में नागरिकता को लेकर दोहरी नीति आदि मसलों पर विवाद की जड़ से शुरू हुआ टकराव आज इस दशा में पहुंच चुका है कि इजराइल और फिलस्तीन आमतौर पर आमने-सामने ही रहते हैं।

इजराइल की नीतियों और कई बार आक्रामक फैसलों को लेकर फिलस्तीन के विद्रोही गुट हमास की ओर से आक्रामक प्रतिवाद किया जाता है। विडंबना यह है कि इस मसले को हल करने या शांति के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कोई ठोस पहलकदमी नहीं देखी जाती है। इसलिए हमास के हमले और उसके जवाब में इजराइल की प्रतिक्रिया का नतीजा क्या निकलना है, यह समझा जा सकता है। यह छिपा नहीं है कि रूस-यूक्रेन युद्ध के नतीजे में केवल प्रभावित इलाकों के नागरिक ही मुश्किल में नहीं है, बल्कि अनाज की आपूर्ति से लेकर अन्य संबंधित मामलों और कारोबार पर भी इसका असर पड़ा है।

दुनिया के कई देशों को इसका नुकसान उठाना पड़ रहा है। अब इजराइल और हमास के टकराव के बाद भी युद्ध के जटिल हालात खड़े होते हैं, तो उसका हासिल सिर्फ एक नई त्रासदी ही होगी। युद्ध किसी समस्या का हल नहीं है।