Delhi Gangrape 2012 Convicts Hanged:  कहा जाता है कि मौत को सामने देख अच्छे-अच्छों के चेहरे की हवाइयां उड़ जाती हैं। 20 मार्च को तिहाड़ जेल में एक साथ पवन, विनय, मुकेश और अक्षय को फांसी पर लटकाए जाने से पहले इन चारों के भी होश फाख्ता हो गए थे। फांसी देने के बाद अब जल्लाद ने खुद बताया है कि फांसी से पहले यह चारों अपनी मौत को सामने देख थर्र-थर्र कांप रहे थे।

‘आज तक’ से बातचीत के दौरान पवन जल्लाद ने बताया कि ‘फांसी घर में चारों 2-2 कर के दाखिल हुए। सुरक्षागार्ड ने चारों को एक तरफ से पकड़ रखा था। फांसीघर में आते वक्त चारों लड़खड़ा रहे थे और कांप रहे थे क्योंकि उन्हें पता था कि हमारी मौत सामने है।’ फांसी कोठी में चारों के आने के बाद जल्लाद ने बिना वक्त गंवाए पहले चारों को तख्ते पर खड़ा किया। इसके बाद 2-2 कर बारी-बारी से उनके पैर बांध दिए तथा गले में फंदा डाल दिया।

जानें: फांसी से पहले क्या थी दोषियों की अंतिम इच्छा?

‘फांसी घर में दो तख्ते थे। दोनों तख्तों पर 2-2 दोषियों को खड़ा किया गया था। इसके बाद इशारा मिलते ही उन्होंने फंदे डाला। फंदा डालते वक्त दोषियों के हाथ-पैर बंधे थे लिहाजा जल्लाद ने दोषियों के गर्दन में फंदे को ठीक से सेट किया तथा कस दिया। 5.25 मिनट पर जल्लाद की तरफ से सभी तैयारियां पूरी कर ली गई थीं।’

जल्लाद के मुताबिक फांसी कोठी में उस वक्त जेल अधिकारी, डॉक्टर, महिला मजिस्ट्रेट और सुरक्षाकर्मी मौजूद थें। पवन जल्लाद ने बताया कि ‘फांसी देने का इशारा करने के लिए उस वक्त जेलर के हाथ में रुमाल था और उन्होंने फांसी से पहले हाथ से रुमाल को ऊपर उठा रखा था। रुमाल झुकाने का इशारा मिलते ही उन्होंने पहला लीवर खींचा और दो दोषी फांसी पर झूल गए। इसके बाद वो चंद सेकेंड में ही दौड़ कर दूसरे लीवर के पास पहुंचे और फिर दूसरा लीवर भी खींच दिया।’

जल्लाद ने बताया कि अक्षय और पवन पहले फांसी के फंदे पर झूले। इसके ठीक 20 सेकेंड के बाद विनय और मुकेश को फांसी दी गई। पवन जल्लाद ने बताया कि फांसी देने के बाद थोड़ी देर उनके हाथ-पांव हिल रहे थे और फिर 5 मिनट के बाद वो शांत हो गए। दिल्ली गैंगरेप के सभी दोषियों को फांसी पर लटकाने वाले पवन जल्लाद के मुताबिक सभी को तय वक्त के मुताबिक सुबह 5.30 मिनट पर फांसी दी गई थी।