अब उत्तराखंड पुलिस विवादों में है। यहां की देहरादून पुलिस पर क्राइम जर्नलिस्ट की पिटाई करने का आरोप लगा है। इस पूरे मामले में कुछ वीडियो भी सामने आए हैं। आचार्य प्रमोद कृष्णन ने एक वीडियो ट्वीट करते हुए आरोप लगाया है कि पुलिस ने ‘क्राइम स्टोरी’ के सम्पादक राजेश शर्मा की जमकर पिटाई की है। आचार्य ने वीडियो ट्वीट करते हुए लिखा है कि ये “क्राइम स्टोरी” के “सम्पादक” राजेश शर्मा हैं, भाजपा राज में “लोकतंत्र” के चौथे “स्तम्भ” का हाल ये है तो आम आदमी की “हैसियत” ही क्या है…
आचार्य ने जो वीडियो ट्वीट किया है उसमें नजर आ रहा है कि राजेश शर्मा कुछ पुलिस वालों से घिरे हैं औऱ बड़ी मुश्किल से लड़खड़ाते हुए चल रहे हैं। वो कहते हैं कि ‘सीएम ने कह दिया मारो, विकास दुबे की तरह कहकर टूट पड़े पुलिस वाले’…, वो आरोप लगा रहे हैं कि ‘एसओ ने मुझपर पिस्टल तान दिया दिया और कहा मार दो इसे…वो कहते हैं कि मैं नाम नहीं जानता उनका लेकिन मैं पहचाना हूं उन्हें…पुलिसवाले कहते हैं कि मारो इसको जब कप्तान और पुलिसवाले हमारे साथ हैं तो क्या कर लेंगे यह पत्रकार…’
इसके अलावा इस घटना के संबंध में एक और वीडियो भी सामने आया है। इस वीडियो में नजर आ रहा है कि रात के वक्त एक पुलिसवाला राजेश शर्मा के घर के बाहर खड़ा है और दरवाजे पर दस्तक दे रहा है। कुछ देर बाद राजेश शर्मा अपने घर से बाहर निकलते हैं।
थोड़ी देर तक राजेश शर्मा से बातचीत करने के बाद वो पुलिस वाले जबरदस्ती धक्का देते हुए उन्हे पकड़कर अपने साथ ले जाता है। वीडियो में कुछ अन्य लोग भी नजर आ रहे हैं जिनके बारे में कहा जा रहा है कि वो सब भी पुलिसवाले हैं जो सादे लिबास में वहां मौजूद थे। यह सभी राजेश शर्मा को पुलिस की गाड़ी में बैठाकर अपने साथ ले जाते हैं। बताया जाता है कि यह वीडियो शुक्रवार का है।
आपको बता दें कि अभी कुछ ही दिनों पहले नेशनल यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स (इंडिया) ने उत्तराखंड में पत्रकारों की गिरफ्तारी और फर्जी मुकदमे दर्ज करने के खिलाफ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृहमंत्री से हस्तक्षेप करने का अनुरोध किया है। साथ ही पत्रकारों की गिरफ्तारी की प्रेस काउंसिल से शिकायत की है।
पत्र में लिखा है कि ‘क्राइम स्टोरी’ के संपादक राजेश कुमार और पत्रकार उमेश कुमार पर भी प्रदेश सरकार ने प्राथमिकी दर्ज कराई है। पत्रकार राजेश शर्मा की आधी रात में गिरफ्तारी की गई। मुख्यमंत्री के नजदीकी और पूर्व सलाहकार रहे हरेंद्र रावत द्वारा एक कमजोर सा आधार बनाकर उन्हें गिरफ्तार किया गया।
