इसी साल पूर्व आईपीएस अमिताभ ठाकुर ने अपने ट्विटर हैंडल पर एक वीडियो शेयर किया था। इस वीडियो को शेयर करते हुए पूर्व आईपीएस ने एक महिला नेता के खिलाफ कार्रवाई की मांग की थी। इस वीडियो को शेयर करते हुए पूर्व आईपीएस ने लिखा था कि ‘घटना 05/04 को 08.30 PM थाना रोहनिया @varanasipolice की बताई गयी है…पुलिसवाले पर हाथ छोड़ने वाली महिला नेत्री खुशबू सिंह बताई गयी हैं। सत्ता बल पर थाना परिसर में इस प्रकार की दबंगई विस्मयकारी, कष्टप्रद है। कृ संज्ञान लें, ठोस विधिक कार्यवाही करें।’
जो वीडियो पूर्व आईपीएस ने शेयर किया था उसमें नजर आ रहा था कि एक महिला थाने के अंदर मौजूद हैं। वहां कई अन्य पुलिसकर्मी भी मौजूद हैं। यहां महिला एक कुर्सी पर बैठे एक पुलिसकर्मी से बातचीत कर रही हैं। वहां कुछ अन्य लोग भी मौजूद हैं। अचानक यह महिला इस पुलिसकर्मी पर हाथ छोड़ देती हैं और उन्हें तमाचा मार देती हैं।
अचानक हुए हमले से पुलिसकर्मी चौक जाते हैं। वो अपनी कुर्सी से खड़े हो जाते हैं। इसके बाद वहां अचानक अफरातफरी की स्थिति पैदा हो जाती है। उस वक्त कुछ मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक वीडियो में नजर आ रही महिला का नाम खुशबू सिंह है। खुशबू सिंह पीजी कॉलेज की पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष रही हैं। बताया गया था कि वो भारतीय जनता पार्टी से जुड़ी हुई थीं।
घटना 05/04 को 08.30 PM थाना रोहनिया @varanasipolice की बताई गयी है. पुलिसवाले पर हाथ छोड़ने वाली महिला नेत्री खुशबू सिंह बताई गयी हैं. सत्ता बल पर थाना परिसर में इस प्रकार की दबंगई विस्मयकारी, कष्टप्रद है. कृ संज्ञान लें, ठोस विधिक कार्यवाही करें @adgzonevaranasi @dgpup @Uppolice pic.twitter.com/QVp0BbQh9j
— AmitabhThakur (@Amitabhthakur) April 8, 2021
उस वक्त यह वीडियो वायरल होने के बाद काफी हंगामा मचा था। पुलिस ने आरोपी महिला के खिलाफ कार्रवाई करने की बात कही थी। इस मामले में आईजी वाराणसी ने जांच के आदेश दिये थे। आपको बता दें कि पूर्व आईपीएस अधिकारी अमिताभ ठाकुर का जन्म बिहार के मुजफ्फरपुर जिले में हुआ था।
अमिताभ ठाकुर नेशनल आर.टी.आई फोरम के संस्थापक रहे हैं। इनकी पत्नी डॉ नूतन ठाकुर एक जानी मानी सामाजिक कार्यकर्ता हैं। आईपीएस अमिताभ ठाकुर किसी भी मुद्दे पर अपना पक्ष रखने से जरा सा भी नहीं हिचकिचाते। तमाम मुद्दों पर उन्होंने मीडिया के सामने बेबाक टिप्पणी की है। कुछ समय पहले उन्होंने पुलिस द्वारा दिए जाने वाले ‘गॉर्ड ऑफ ऑनर’ पर भी टिप्पणी की थी और उसे समाप्त करने की मांग की थी।
