उत्तर प्रदेश के रहने वाले कुलदीप द्विवेदी का जीवन बेहद ही संघर्ष से बीता है। दोस्तों से किताबें उधार ले कर तैयारी करने वाले कुलदीप द्विवेदी ने जब यूपीएससी की परीक्षा पास की थी तब उनके पिता को भी यकीन नहीं हुआ था कि उनके बेटे ने परीक्षा पास कर ली है। कुलदीप द्विवेदी ने एक साक्षात्कार में बताया था कि परीक्षा पास करने के बाद उन्हें अपने पिता को यह समझाने में 30 मिनट लगे थे कि वो अब अफसर बन गये हैं।
जब हम जिस कामयाब शख्सियत का जिक्र कर रहे हैं वो उत्तर प्रदेश के एक छोटे से गांव के रहने वाले हैं। कुलदीप द्विवेदी के पिता सूर्यकांत द्विवेदी लखनऊ विश्वविद्यालय में सुरक्षा गार्ड के तौर पर काम करते थे। सूर्यकांत द्विवेदी के सबसे छोटे बेटे कुलदीप द्विवेदी बचपन से पढ़ाई-लिखाई में होनहार थे। हालांकि, परिवार की आर्थिक स्थिति बेहतर नहीं थी कि वो परिवार के सदस्यों का बेहतर पालन-पोषण कर सकें।
कुलदीप द्विवेदी ने साल 2009 में इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक और 2011 में स्नातकोत्तर की पढ़ाई पूरी की थी। तब से वह दिल्ली में रहकर सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी कर रहे थे। कुलदीप द्विवेदी ने एक साक्षात्कार में कहा था कि अपने पहले दो प्रयासों में परीक्षा में फेल होने के बाद उन्हें सबसे कठिन समय का सामना करना पड़ा था। 2013 में, उन्हें सीमा सुरक्षा बल में सहायक कमांडेंट के रूप में चुना गया था, लेकिन उन्होंने प्रशिक्षण में शामिल नहीं हुए थे।
कुलदीप ने हिंदी भाषा में बी.ए. और जियोग्राफी में एम.ए. किया है। उन्होंने स्कूल से ले कर एम.ए.तक की पूरी पढ़ाई हिंदी मीडियम से की है। दिल्ली में उन्होंने किराए का एक कमरा तो ले लिया था लेकिन कोचिंग और किताबों के पैसे उनके पास नहीं थे। इसीलिए उन्होंने अपने रूममेट की किताबें पढ़ कर ही UPSC की तैयारी की थी। कुलदीप के पिता का वेतन केवल 6000 रुपया था जिसमे से वह केवल 2500 रूपए ही कुलदीप को भेज पाते थे। इन्हीं पैसों में से बचत कर कुलदीप ने दो साल बाद अपने रूममेट के साथ मिल कर एक लैपटॉप खरीदा।
दो बार यूपीएससी की परीक्षा में असफल होने के बाद कुलदीप ने 2015 में कुलदीप ने कड़ी मेहनत की और एक बार फिर परीक्षा दी। इस बार उनकी म्हणत रंग लाई और उन्होंने 242वी रैंक के साथ UPSC सिविल सेवा 2015 की परीक्षा पास की थी। एक साक्षात्कार में उन्होंने बताया था कि ‘मेरे पिता नहीं समझते थे कि आईपीएस आखिर है क्या। वे बस सोचते हैं कि पुलिस विभाग में एक सब-इंस्पेक्टर सबसे शक्तिशाली व्यक्ति है। मुझे उन्हें बताना था कि प्रशिक्षण पूरा होने के बाद मैं एक अफसर बनूंगा और यह समझाने में 30 मिनट का समय लगा था।’
