श्वेता गुप्ता ने कानपुर से MBA किया और फिर नौकरी की तलाश में इलाहाबाद चली आई। नौकरी पाने के लिए श्वेता को कड़ी मेहनत करनी पड़ी लेकिन बावजूद इसके उसने बड़े सपने देखने कभी बंद नहीं किये। श्वेता गुप्ता के पिता पेशे से पेंटर थे। श्वेता ने शुरुआती दिनों में दो अलग-अलग ऑटो मोबाइल एजेंसी में काम किया और फिर उसने एक्सिडेंटल कारें खरीदने और बेचने का काम शुरू किया।

इसके बाद जल्दी ही वो गाड़ी चुराने वालों को संपर्क में आ गई और फिर मोटी कमाई की लालच में उनके साथ मिलकर काम करने लगी। जल्दी ही उसने कार चोरों का एक बड़ा नेटवर्क तैयार कर लिया जो छोटी-बड़ी कारों से लेकर SUV तक चुराते और बेचते थे। उसका नेटवर्क पांच अलग-अलग राज्यों में फैल गया। साल 2015 में प्रयागराज (तब इलाहाबाद) क्राइम ब्रांच ने श्वेता गुप्ता को उस वक्त पकड़ा जब ट्रांसपोर्ट नगर में वो कुछ सामान लेनी आई थी। पुलिस ने उसके साथ उसके गैंग के 4 सदस्यों को भी पकड़ लिया था।

खुलासा हुआ था कि श्वेता गुप्ता के पति कानपुर स्थित एक फर्म में काम करते हैं। यह भी पता चला था कि श्वेता का पति कार चोरी में शामिल नहीं था। पता चला था कि श्वेता गुप्ता ने इलाहाबाद के जेके पैलेस, मुत्थीगंज और ट्रांसपोर्ट नगर में अपने ऑफिस खोल रखे थे।

उसके गिरोह ने पिछले पांच साल में यूपी और एनसीआर के अलग-अलग हिस्सों से सैकड़ों कारें गायब कर पुलिस की नाक में दम कर रखा था। इलाहाबाद समेत कई शहरों की पुलिस को इस लेडी डॉन की बरसों से तलाश थी। यूपी पुलिस ने श्वेता पर 10 हजार रुपए का इनाम भी रखा था। लेडी डॉन और उसके गिरोह के सदस्य इतने शातिर थे कि पलक झपकते ही चमचमाती गाड़ियों को गायब कर देते थे।

पुलिस ने उस वक्त शक जताया था कि श्वेता और उसके गिरोह ने 300 से ज्यादा गाड़ियां चुराई हैं। पुलिस के हाथ चोरी की कई वारदात के सीसीटीवी फुटेज लगे थे। पुलिस के मुताबिक लेडी डॉन ज्यादातर जम्मू-कश्मीर, हिमाचल और उत्तराखंड के पहाड़ों पर अपना वक्त बिताती थी। यूपी में आकर एक साथ कई वारदात करने के बाद वह फिर पहाड़ों पर ऐश करने चली जाती थी।