सभी जानते हैं कि उत्तर प्रदेश के मऊ में एक वक्त कुख्यात गैंग्स्टर मुख्तार अंसारी के नाम का सिक्का चलता था। लेकिन अब मुख्तार अंसारी पर कानून का डंडा चल चुका है औऱ वो जेल में बंद है। आज हम बात करेंगे योगी आदित्यनाथ सरकार के आईपीएस अधिकारी अनुराग आर्य की जिनके ताबड़तोड़ एक्शन ने मुख्तार अंसारी एंड गैंग्स की कमर तोड़ दी। उत्तर प्रदेश के जनपद बागपत के गांव छपरौली में जन्मे अनुराग आर्य के पिता का नाम डॉक्टर रमेश चंद्र आर्य है। अनुराग आर्य की शिक्षा क्लास पांचवीं तक गांव में स्थित शिशु मंदिर से हुई थी। अनुराग आर्य ने बी.एससी की। उनको बचपन से ही स्पोर्ट्स का बहुत शौक था। अनुराग आर्य स्कूल के वक्त से ही क्रिकेट एवं बास्केटबॉल खेलते थे और उन्होंने बास्केटबॉल तो नेशनल लेवल तक खेला है। बता दें कि दिल्ली विश्वविद्यालय में एम.एससी की पढ़ाई के वक्त अनुराग आर्य साल 2012 में एसबीआई बैंक में मैनेजर के पद पर सिलेक्ट हुए।

अनुराग आर्य ने कानपुर जनपद में आरबीआई की ब्रांच ऑफिस में 5 महीने काम किया। उसी दौरान अनुराग आर्य ने पहले प्रयास में सिविल सर्विसेज की परीक्षा किया। 2013 बैच का आईपीएस अफसर बनकर अनुराग आर्य ने अपने माता-पिता का नाम रोशन किया था। सन् 2014 में आईपीएस अनुराग आर्य ट्रैनिंग के लिये हैदराबाद चले गये थे। उसके बाद आईपीएस अनुराग आर्य की तैनाती ट्रेनी अफसर के तौर पर सन् 2015 में जनपद गाजियाबाद में हुई थी।

अनुराग आर्य की गिनती उत्तर प्रदेश के तेज तर्रार अफसरों में होती है। मऊ के कुख्यात गैंगस्टर मुख्तार अंसारी पर शिकंजा कसने का श्रेय इस बहादुर आईपीएस अधिकारी को जाता है। अनुराग आर्य ने सिर्फ मुख्तार अंसारी ही नहीं बल्कि इस गैंग के लगभग सभी गुर्गों को भी घुटने पर लाने का काम किया है। अनुराग आर्य की अगुवाई में पुलिस ने मुख्तार अंसारी के किलर गैंग का एक तरह से सफाया कर दिया है।  असलहों के लाइसेंस निरस्त किए जाने की कार्रवाई हुई और गुंडा एक्ट भी लगा।

वहीं दूसरी ओर इनके आर्थिक मददगारों की संपत्तियां भी जब्त की गई थीं। पुलिस ने मऊ में मुख्तार अंसारी गिरोह के नजदीकियों की करोड़ों की  चल-अचल संपत्ति जब्त की थी। इसके अलावा पुलिस ने मुख्तार अंसारी के मछली कारोबार को भी तहस-नहस कर दिया है। आपको बता दें कि अनुराग आर्य ने साल 2019 में मऊ की कमान संभाली थी। इसके पहले उनकी नियुक्ति कानपुर इस्ट, अमेठी और बलरामपुर जिले में रही है। आम जनता के बीच अनुराग आर्य की छवि ईमानदार और कर्मठ पुलिस अधिकारी की है।

सभी जानते हैं कि दशकों से मऊ की गिनती पूर्वांचल के एक संवेदनशील जिले के तौर पर होती रही। कहा जाता रहा है कि मुख्तार अंसारी जेल के बाहर हो या अंदर मऊ में उनके नाम का सिक्का चलता है। ढाई दशक के दौरान मुख्तार ने मऊ में ऐसा चक्रव्यूह बना लिया है, जिसे तोड़ पाना बेहद कठिन माना जाता रहा है।

अनुराग आर्य के नेतृत्व में पूर्वांचल के वाराणसी, मऊ, गाजीपुर, आजमगढ़, जौनपुर, चंदौली और बलिया से लेकर राजधानी तक में मुख्तार से सीधे और परोक्ष रूप से जुड़े करोड़ों के अवैध कारोबार और संपत्तियों को जब्त कराया गया। बड़ी तादात में मुख्तार के करीबियों के शस्त्र लाइसेंस निरस्त कर उनके खिलाफ कार्रवाई की गई। गिरोह से जुड़े लोगों की हिस्ट्रीशीट खोलने के साथ अपराधियों को जेल भेजा गया। गाजीपुर में मुख्तार के परिजनों एवं करीबियों के 40 से ज्यादा शस्त्र लाइसेंस निरस्त किए गए हैं और गैंग के सदस्यों और लाखों-करोड़ों की संपत्ति जब्त की गई है।