उत्तर प्रदेश के चर्चित सैलरी घोटाले में अब नया ट्विस्ट आ गया है। दरअसल जिस पलाटून कमांडेंट ने इस घोटाले का पर्दाफाश किया था अब उसे ही इस घोटाले से संबंधित सबूत को मिटाने के जुर्म में गिरफ्तार कर लिया गया है। राज्य के होम गार्ड जवानों के सैलरी में हुए इस गड़बड़झाले में कई वरिष्ठ अधिकारियों के नाम के खुलासे का भी अंदाजा लगाया जा रहा था। लेकिन इस केस को उजागर करने वाले शख्स के गिरफ्तार होने के बाद से हड़कंप मच गया है।

आपको बता दें कि पिछले जुलाई में राजीव कुमार ने सबसे पहले थाने में जाकर रिपोर्ट दर्ज कराई थी और कहा था कि फर्जी मस्टर रोल्स के आधार पर होमगार्ड्स की सैलरी का वितरण किया जा रहा है। शिकायत मिलने के बाद इस मामले में कई तरह की जांच की गई और खुलासा हुआ कि कुछ प्लाटुन कमांडेंट्स ने गलत चार्ट बनाया और होमगार्ड के जवानों को कम काम के बदले ज्यादा वेतन का भुगतान किया गया।

राजीव ने उस वक्त इस घोटाले में अपनी किसी भी तरह की भूमिका से साफ इनकार कर दिया था। पुलिस के मुताबिक राजीव को घोटाले में अपना नाम उजागर होने का डर हो गया था क्योंकि इस मामले की जांच के दौरान जांच अधिकारी सिर्फ छोटे अधिकारियों को निशाने पर ले रहे थे जबकि वरिष्ठ अधिकारियों पर कोई कार्रवाई नहीं हुई थी।

इसीलिए 18 नवंबर को राजीव, नोएडा के सूरजपुर स्थित होमगार्ड के कार्यालय में पहुंचा। उसने अपनी मोटरसाइकिल से पेट्रोल निकाली और एक बक्से को आग के हवाले कर दिया। बताया जा रहा है कि इस बक्से में मस्टर रोल्स रखे हुए थे। हालांकि इस घटना को अंजाम देने के बाद राजीव वहां से चुपचाप चला गया। लेकिन यहां लगे एक कैमरे में वो हाथ में लोहे की छड़ लिए शॉल ओढ़े नजर आ गया। हालांकि पुलिस को उसका चेहरा नजर नहीं आया था लेकिन उसके चलने के स्टाइल से पुलिस ने उसे पकड़ लिया। पुलिस का कहना है कि फुटेज में राजीव के हाथ में लोहे की जो छड़ नजर आ रही है दरअसल उसके जरिए वो ऑफिस के बरामदे में दाखिल हुआ था।

पुलिस के मुताबिक यहां का प्रहरी उस वक्त सो रहा था तब ही मौके का फायदा उठाकर राजीव उस कमरे में दाखिल हुआ जहां ये बक्से रखे गए थे। उसने आलमीरा तोड़कर यह बक्सा निकाला और उसे आग के हवाले कर दिया। शुरू में पुलिस को ऐसा लगा कि यह काम राजीव ने नहीं बल्कि किसी और ने किया है। लेकिन सीसीटीवी फुटेज मिलने के बाद जब पुलिस ने राजीव के मोबाइल लोकेशन की जांच की तो सारी सच्चाई खुल गई।

नोएडा के पुलिस कप्तान वैभव कृष्णा ने बीते मंगलवार को जानकारी दी कि ‘शिकायत दर्ज कराने के बाद राजीव इस बात से परेशान था कि राज्य सरकार ने इस मामले में वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने पर रोक लगा दी थी। जिन लोगों पर उसने आरोप लगाए थे उनमें डिविजनल कमांडेंट राम नारायण चौरसिया भी सामिल थे। राम नारायण मिश्रा पर मस्टर रोल्स बनाने की अनुमति देने का आरोप है और उन्हें गिरफ्तार भी किया जा चुका है।

राजीव को ऐसा लगता था कि जांच अधिकारी सिर्फ छोटे अफसरों पर फोकस कर रहे हैं और बड़े अफसर ऐसे में बच सकते हैं। उसे डर था कि कहीं इस कांड में उसकी भी संलिप्ता उजागर ना हो जाए इसीलिए उसने सबूत मिटाने की कोशिश की।’ बता दें कि इस पूरे स्कैम में मस्टर रोल्स की सबसे अहम भूमिका है और इसे सबसे बड़ा सबूत भी बताया जा रहा है। (और…CRIME NEWS)