नेताओं पर जानलेवा हमले की कहानी अक्सर सामने आती है। आज बात समाजवादी पार्टी के नेता मुलायम सिंह यादव पर हुए उस हमले की जिसमें उनके बॉडीगार्ड ने चिल्ला कर किसी तरह उनकी जान बचाई थी। कहा जाता है कि उस समय मुलायम सिंह यादव को खुद पर हमला किये जाने का पहले से अंदेशा था और उन्होंने अपने बॉडीगार्ड से कहा था कि अगर उनपर हमला हो तो वो यह चिल्लाएं की ‘नेताजी मारे गए’

बात है साल 1984 की। मार्च के महीने में मुलायम सिंह इटावा के दौरे पर थे। इस दिन महिखेड़ा गांव में अपने एक परिचित से मुलाकात के बाद मुलायम सिंह करीब 9.30 बजे मैनपुरी के लिए रवाना हुए थे। लेकिन गांव से कुछ ही दूर जाने के बाद अचानक गोलियों की तड़तड़ाहट से उनका काफिला गूंज उठा था। उस वक्त यह बात सामने आई थी कि छोटेलाल नाम के एक शख्स ने मुलायम सिंह यादव पर गोलियां चलाई थी। इस गोली से मुलायम सिंह यादव बाल-बाल बच गये थे। इस हमले में नेत्रपाल नाम का एक शख्स भी शामिल था।

उस वक्त मुलायम सिंह यादव के साथ चल रहे सुरक्षाकर्मियों ने छोटेलाल को गोली मार कर वहीं ढेर कर दिया था जबकि नेत्रपाल इस हमले में घायल हुआ था। मुलायम सिंह यादव ने उस वक्त खुद बताया था कि उनके ड्राइवर ने उन्हें बताया कि जब वह कार चला रहा था तो बाइक सवार उसके बगल में आ गए और उन्होंने गोलियां चलानी शुरु कर दी। लेकिन इस वक्त मुलायम सिंह के साथ मौजूद पुलिसकर्मियो ने इनपर जवाबी हमला कर दिया, जब गोलीबारी थमी तो मुलायम सिंह को सुरक्षित एक दूसरी पुलिस की जीप में कुर्रा पुलिस स्टेशन पहुंचाया गया।

मुलायम सिंह यादव को अपने ऊपर हमले का अंदेशा पहले से ही था। ऐसे में उन्होंने अपने सुरक्षाकर्मियों को पहले से ही सतर्क कर रखा था। इस घटना के बारे में वरिष्ठ पत्रकार सुनीता एरॉन, अखिलेश यादव की जीवनी ‘विंड्स ऑफ चेंज’ में लिखती हैं, ‘मुलायम ने अपने सुरक्षाकर्मियों को कह रखा था कि हमले की स्थिति में वे चिल्लाने लगें- नेताजी मारे गए… नेताजी मारे गए…।

उस दिन जब उन पर हमला हुआ तो सुरक्षाकर्मियों ने ऐसा ही किया। ऐसे में हमलावरों को लगा कि मुलायम सिंह यादव सही में मारे गए हैं और वे घटनास्थल छोड़ भागने लगे। बाद में मुलायम सिंह यादव ने इस हमले को अपने ऊपर एक साजिश का हिस्सा बताया था।