देश के सबसे बड़े दुश्मन अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिम को लेकर समय-समय पर कई खुलासे होते रहते हैं। मुंबई पुलिस के पूर्व कमिश्नर राकेश मारिया ने अपनी किताब ‘लेट मी से इट नाउ’ में दाऊद इब्राहिम को लेकर बड़ा खुलासा किया था। राकेश मारिया ने मुंबई हमले के आरोपी आतंकी अजमल कसाब को लेकर अपनी किताब में बताया है कि ‘दुश्मन (आतंकी कसाब) को जिंदा रखना मेरी पहली प्राथमिकता थी। कसाब के खिलाफ लोगों का आक्रोश और गुस्सा चरम पर था। इतना ही नहीं, मुंबई पुलिस के ऑफिसर भी आक्रोशित थे। पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई और आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा आतंकी कसाब को किसी भी हाल में उसे रास्ते से हटाने की फिराक में थे क्योंकि कसाब मुंबई हमले का सबसे बड़ा और एकलौता सबूत था।’ उन्होंने लिखा है कि, अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिम गैंग को कसाब को मारने की सुपारी भी दी गई थी।
राकेश मारिया के इस दावे के बाद कभी डॉन के बेहद करीबी रहे छोटा शकील का बयान भी सामने आया था। उस वक्त छोटा शकील ने कहा था कि “ये सब झूठी बातें है। किताब बेचने के लिए ये सब किया जा रहा है। कसाब या किसी को मारने वारने का कोई सब्जेक्ट ही नहीं है हमारा। हिंदुस्तान में कौन झूठ नहीं बोलता, सब झूठ बोल रहे हैं।”
इस मुद्दे पर उस वक्त सरकारी वकील उज्जवल निकम का भी बयान सामने आया था। उज्जवल निकम ने कहा था कि मुंबई पुलिस की चार्जशीट में कहीं भी इसका जिक्र नहीं था कि पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी इंटर सर्विसेज इंटेलिजेंस या लश्करे तैयबा या दाऊद इब्राहिम ने अजमल कसाब को मारने की सुपारी ली थी। उज्जवल निकम वह वकील हैं जिन्होंने अजमल कसाब को फांसी के फंदे तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई थी।
किताब में यह भी दावा किया गया था कि पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई ने 26/11 हमले को हिंदू आतंकवाद का जामा पहनाने की भी कोशिश की थी। 10 हमलावरों को हिंदू साबित करने के लिए उनके साथ हिंदू नाम वाले फर्जी आईकार्ड भेजे गए थे। कसाब के पास भी एक ऐसा ही आईकार्ड मिला था, जिसपर उसका नाम समीर चौधरी लिखा हुआ था।

