देश में अपराध के इतिहास में वैसे तो कई अपराधी हुए लेकिन कुछ अपनी वारदातों के चलते कुख्यात हो गए। एम. जयशंकर नाम का साइको किलर ऐसा ही एक अपराधी था, जिसने चार सालों के भीतर ही पूरे दक्षिण भारत में अपना खौफ पैदा कर दिया। पेशे से ट्रक ड्राइवर रहे जयशंकर ने करीब 30 रेप, 15 हत्याओं की वारदातों को अंजाम दिया, जिनमें से अधिकतर महिलाओं को निशाना बनाया गया था।

तमिलनाडु के सेलम का रहने वाला एम. जयशंकर ट्रक ड्राइवर था। पत्नी और तीन बेटियों का भरा पूरा परिवार था लेकिन उसने समाज में महिलाओं को अपने कारनामों से असुरक्षित महसूस कराया। साल 2008 में जुर्म की दुनिया में कदम रखने वाले जयशंकर के ऊपर जुलाई, 2009 में पहला मामला दर्ज हुआ। जिसमें उसने एक 45 वर्षीय महिला को रेप करने के बाद बेरहमी से मार डाला था।

इसके बाद उसने उसी साल एक महीने के भीतर ही दर्जन भर महिलाओं को निशाना बनाया। सभी घटनाओं में पहले बलात्कार किया गया था फिर हत्या की गई थी। जयशंकर पेशे से ट्रक ड्राइवर था इसलिए उसने राह चलते भी कई वारदातों को अंजाम दिया था। इनमें से सबसे अधिक सेक्स वर्कर्स के साथ घटनाएं हुई थी, जिनका हाइवे के किनारे बने ढाबों से अपहरण किया गया था।

जयशंकर के पीछे पुलिस पड़ी हुई थी लेकिन काफी समय तक कानून की पकड़ से दूर रहा। जयशंकर का नाम चर्चा में तब और आया जब उसने 23 अगस्त 2009 को एक महिला पुलिसकर्मी को निशाना बनाया। यह महिला पुलिसकर्मी तत्कालीन मुख्यमंत्री के कार्यक्रम के बंदोबस्त में अस्थायी ड्यूटी के लिए आई थी। इस घटना में सभी तरीके जयशंकर की ओर इशारा कर रहे थे।

कई हफ़्तों की मशक्कत के बाद 19 सितंबर को इस महिला पुलिसकर्मी की लाश बरामद हुई थी। इसके बाद स्थानीय पुलिस ने जयशंकर को पकड़ने के लिए एक बड़ा अभियान शुरू किया। घटना के दो महीने बाद 19 अक्टूबर 2009 को जयशंकर को पकड़ लिया गया और सेंट्रल जेल भेज दिया गया। इसके बाद उसका मामला 17 मार्च 2011 को फ़ास्ट ट्रक कोर्ट में गया, जहां उस पर 13 हत्याओं व रेप का आरोप था।

अदालत में पेशी के दौरान जब उसे वापस सेंट्रल जेल ले जाया जा रहा था तो वह सालेम बस स्टेशन पर पुलिस को चकमा देकर फरार हो गया। इस घटना से घबराए एक पुलिसकर्मी ने दो दिन बाद खुद को गोली मार ली। फरारी के बाद जयशंकर कर्नाटक में रहा और वह भी आधा दर्जन वारदातों को अंजाम दिया। दो महीने बाद मई. 2011 में उसे कर्नाटक से गिरफ्तार किया गया।

कर्नाटक से गिरफ्तार होने के बाद उसे 10 साल की सजा सुनाकर जयशंकर को बेंगलुरु के परप्पाना अग्रहारा सेंट्रल जेल में भेज दिया गया। रिपोर्ट्स के मुताबिक वह साल 2013 में एक बार फिर जेल से फरार हो गया, जिसके बाद उस पर पांच लाख का इनाम घोषित कर दिया गया। बताया जाता है कि उसकी फरारी के बाद प्रशासन ने महिलाओं को देर रात बाहर निकलने से मना किया था।

कई दिनों की तलाशी अभियान के दौरान उसे 6 सितंबर 2013 में फिर से पकड़ लिया गया। इसके बाद उसे 24/7 सीसीटीवी निगरानी और हाई-टेक सेल में रखा गया था। साथ ही उसकी बीमारी का इलाज भी जेल के अंदर ही किया जा रहा था। कई सालों तक जेल में गुजारने के बाद 27 फरवरी 2018 को, जयशंकर ने सेंट्रल जेल में शेविंग ब्लेड से अपना गला काटकर आत्महत्या कर ली थी।