यूपी के फतेहपुर जिले के एक गांव सुजानपुर का लड़का जब तीसरी क्लास में पढ़ाई कर रहा था तब उसके शिक्षक ने एक दिन उसके पिता को बुलावा भेजा। लड़के के पिता को ऐसा लगा कि उनके बेटे ने कोई शरारत की है और स्कूल में उन्हें उसकी शिकायत करने के लिए बुलाया जा रहा है। पर जब पिताजी स्कूल पहुंचे तब उनकी हैरानी का कोई ठिकाना नहीं रहा। स्कूल के टीचर ने लड़के के पिता से कहा कि ‘आपका बेटा पढ़ने-लिखने में काफी होशियार है,,,आप इसका एडमिशन शहर के किसी स्कूल में करवाइए…इसका करियर बन जाएगा।’ जिस तरह से स्कूल ने एक होनहार बेटे को पढ़ाने से इनकार किया यह जानकर पिताजी को अपने बेटे पर इतना गर्व हुआ कि वो उसे लेकर शहर आ गए और फिर एक दिन यह लड़का पढ़-लिख कर आईएएस बन गया।

आज हम बात कर रहे हैं आईएएस अफसर महेंद्र बहादुर सिंह। महेंद्र बहादुर सिंह ने तीसरी क्लास में अपने साथ हुई इस घटना के बारे में खुद एक बार एक साक्षात्कार में बताया था। बहरहाल जब महेंद्र बहादुर सिंह शहर पहुंचे तो उनके लिए करियर इतना आसान भी नहीं था। आईएएस बनने के उनके सफर में आगे की कहानी और भी चौंकाने वाली है।

महेंद्र बहादुर सिंह अपने भाइयों में चौथे नंबर पर थे और छोटा होने की वजह से उन्हें लाड-दुलार भी काफी मिला था। पिता ने गांव से बाहर शहर के एक निजी स्कूल में उनका दाखिला करा दिया। एडमिशन तो मिल गया, लेकिन हाफ ईयरली परीक्षा में महेंद्र बहादुर सिंह का रिजल्ट बेहद खराब रहा। 6 में से 5 विषय में वो फेल हो गए। महेंद्र बहादुर सिंह उस वक्त अपने घर आकर काफी रोए थे लेकिन उनके पिता ने उन्हें डांटने की बजाए उनका हौसला बढ़ाया था और समझाइश की थी कि वो और लगन से पढ़ें।

पिता की यह बात बेटे ने गांठ बांध ली और फाइनल एग्जाम में दूसरा स्थान हासिल किया। इसके बाद तो वो लगातार टॉपर बनने लगे। महेंद्र ने 12वीं के बाद आईआईटी एंट्रेंस एग्जाम दिया था, लेकिन वे उसमें फेल हुए। उनका सिलेक्शन यूपीटीयू में हुआ था, जहां से उन्होंने बीटेक की डिग्री हासिल की। इंजीनियरिंग खत्म होते ही वो सिविल सर्विसेज की तैयारी में लग गए थे। इस दौरान कई कंपनियों में उनकी नौकरी भी लगी लेकिन उनका ध्यान सिर्फ आईएएस बनने पर था।

साल 2010 में यूपीएससी एग्जाम दिया और पहले ही अटैम्प्ट में क्लीयर कर गए। यही इनके पिता का सपना भी था, जो कि उन्होंने पूरा किया। महेंद्र बहादुर सिंह ने एक इंटरव्यू में बताया था कि ‘पिताजी सुबह ड्यूटी पर जाने से पहले मेरा खाना बना लेते थे। वो ही मुझे तैयार करके स्कूल भेजते थे। मां तीन भाइयों के साथ गांव में थीं। यही नहीं, जूनियर क्लासेस तक तो वो मेरे नोट्स भी तैयार करवाते थे।’ बता दें कि महेंद्र बहादुर सिंह यूपी के कई जिलों में अहम पद संभाल चुके हैं।