चंबल की बीहड़ों में अब तक कई ऐसे दुर्दांत हुए जिन्होंने आम जनता के साथ-साथ पुलिस की नींद भी कई सालों तक हराम कर रखी थी। साल 2007 में जब बहुजन समाज पार्टी की सुप्रीमो मायावती ने सत्ता की बागडोर संभाली थी तब यूपी-एमपी से सटे पहाड़ियों में छिपे कई डकैतों का सफाया हो गया था। ददुआ को मौत के घाट उतारने के बाद पुलिस ने राहत की लंबी सांस ली थी। लेकिन ददुआ का आतंक खत्म होने के बाद शुरू हुआ उसके चेले बबुली कोल का आतंक। यह वहीं बबुली कोल था जो ददुआ के एनकाउंटर के वक्त बच निकला था।
बबुली कोल के बारे में बताया जाता है कि उसका जन्म चित्रकूट जिले के गांव कोलान टिकरिया में एक मजदूर रामचरने के यहां साल 1979 में हुई थी। गांव में बबुली कोल ने आठवीं क्लास तक पढ़ाई की थी। लेकिन घर की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं थी लिहाजा बबुली ने पढ़ाई छोड़ मजदूरी शुरू कर दिया।
बताया जाता है कि बबुली कोल को सबसे पहले कुख्यात ठोकिया की मदद करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। इसके बाद उसे जेल भेज दिया गया। कहा जाता है कि जेल में उसकी मुलाकात ठोकिया के खासमखास लाले पटेल से हुई थी। इसी मुलाकात के दौरान बबुली ने जरायम की दुनिया में एंट्री मारने का फैसला लिया था। जेल से छूटते ही बबुली ने सबसे पहले लाले पटेल को जेल से छुड़ाया। पुलिस से छिपते-फिरते दोनों पाठा के जंगलों में कूद गए और फिर ददुआ गैंग में शामिल हो गए।
ददुआ के मारे जाने के बाद बबुली कोल ने गैंग संभाल ली। रंगदारी वसूलने और दहशत फैलाने की वजह से उसकी धमक काफी दूर तक फैल गई। कहा जाता है कि बबुली को पुलिस इसलिए बरसों तक नहीं पकड़ पाई क्योंकि वो मोबाइल का इस्तेमाल नहीं करता था। उसने चित्रकूट, बांदा, सतना, भिंड, मुराना के गांवों में अपने मुखबिरों का खास नेटवर्क बनाया था।
बबुली के आतंक की बात करें तो बबुली कोल ने डोंडा टिकरिया गांव के एक ही परिवार के 5 सदस्यों की पहले नाक काटी और पैर और हाथ पर गोली मारकर घायल कर दिया था। सभी के ऊपर पेट्रोल छिड़कर आग लगा दी थी। इसी घटना के बाद यूपी सरकार ने बबुली पर एक लाख का इनाम रखा था। बबुली ने 31 दिसंबर 2012 को पुलिस के मुखबिर होने के शक के चलते खमरिया के जंगल में 2 लोगो की हत्या कर दी थी। मानिकपुर जिले के निहि गांव में 31 की रात राजू पाल की हत्या की थी।
बबुली के खिलाफ 80 से ज्यादा मामले यूपी और एमपी में दर्ज थे। कहा जाता है कि साल 2007 में उसने कामायनी एक्सप्रेस ट्रेन में डकैती की थी। बबुली कोल के बारे में एक बात ये भी काफी मशहूर थी कि उसने जिसका अपहरण किया उसे बिना फिरौती लिए नहीं छोड़ा। जैसे-जैसे उसका अपराध बढ़ा उसपर इनाम की राशि भी बढ़ती चली गई थी।
साल 2019 में मध्य प्रदेश के सतना और उत्तर प्रदेश के बॉर्डर वाले इलाके में आतंक का पर्याय बने डाकू बबुली कोल को मार गिराया गया था। अकेले बबुली कोल के सिर पर 7 लाख रुपये का इनाम था। कहा जाता है कि आजादी के बाद यह किसी भी डाकू के सिर पर रखा गया सबसे बड़ा इनाम था।
