मेहनत और कड़ी लगन से सफलता का स्वाद चखने वाले जिस शख्सियत की आज हम चर्चा कर रहे हैं वो एक आईपीएस अफसर हैं। लेकिन आईपीएस अफसर बनने से पहले उनकी पहचान कुछ अलग थी। प्रहलाद सहाय मीना एक बड़े अधिकारी बनना चाहते थे। उन्होंने 5 सरकारी नौकरियां छोड़ दीं। तीन बार वो यूपीएससी और एक बार आरपीएससी की परीक्षा में असफल भी हुए लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी।
27 फरवरी 1988 को जन्मे प्रहलाद सहाय का बचपन गांव में ही बीता। उन्होंने शुरुआती पढ़ाई गांव के ही स्कूल से की और 10वीं की परीक्षा में वो टॉपर भी बने थे। प्रहलाद के कुछ दोस्तों ने उन्हें 12वीं की परीक्षा में विज्ञान विषय लेने की सलाह दी थी। प्रहलाद एक इंजीनियर बनना चाहते थे। लेकिन वो बाहर जाकर पढ़ाई नहीं कर सके क्योंकि उनके परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत नहीं थी।
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तीन बार सिविल सर्विस की परीक्षा में असफल होने के बाद प्रहलाद सहाय मीना ने हिंदी साहित्य में एमए किया। साल 2013 के बाद प्रहलाद दिल्ली आ गए और उन्होंने सिविल सर्विस परीक्षा की तैयारी शुरू की। तीन बार परीक्षा में फेल होने के बाद साल 2016 में उन्होंने यूपीएससी की परीक्षा पास कर ली। साल 2017 में वो इंडियन पुलिस सर्विस के लिए चुने गये।
एक साक्षात्कार में प्रहलाद सहाय ने बताया था कि 12वीं में पढ़ाई के दौरान उनका सलेक्शन इंडियन रेलवे में गैंगमैन (ग्रुप डी) के तौर पर हुआ था। सलेक्शन होने के बाद प्रहलाद सहाय काफी प्रभावित हुए थे और उन्होंने रेलवे की परीक्षा की तैयारी शुरू कर दी थी। परीक्षा की तैयारी के लिए वो राजस्थान गए और यहां उन्होंने किराये पर एक कमरा भी लिया था।
राजस्थान कॉलेज में प्रवेश लिया और बीए दूसरे साल 2008 में पहली बार सरकारी नौकरी लगी। Indian Police Service में कामयाबी पाई| साल 2008 मं प्रहलाद भारतीय रेलवे में भुवनेश्वर बोर्ड से गैंगमैन बने। उनकी नौकरी भारतीय स्टेट बैंक में लगी। इसके अलावा रक्षा मंत्रालय और रेल मंत्रालय में सहायक अनुभाग अधिकारी के तौर पर भी उनकी नौकरी लगी थी।
