12वीं पास करने के बाद हिमांशु नागपाल दिल्ली आ गए। यहां उन्होंने मशहूर हंसराज कॉलेज में एडमिशन लिया और वो कॉमर्स के छात्र थे। हिमांशु के पिता उनके साथ आए थे और दोनों कॉलेज में बैठे हुए थे और पिता की नजर कॉलेज में लगी बोर्ड पर पड़ी। हिमांशु के पिता ने उस वक्त कहा था कि ‘मैं चाहता हूं कि तुम्हारा भी नाम टॉपरों में शुमार हो और इस बोर्ड पर लगे। इसके बाद कॉलेज से लौटते वक्त वो एक हादसे का शिकार हो गए और उनकी मौत हो गई।

पिता की आकास्मिक मृत्यु ने हिमांशु को झकझोर कर रख दिया लेकिन उनके कहे शब्द उनके लिए सीख बन गया। अभी हिमांशु पिता की मौत के सदमे से बाहर नहीं आए थे और इसी बीच उन्हें अपने भाई के निधन की खबर मिली। वो बिल्कुल टूट गये और यह तय कर लिया कि वो अपनी पढ़ाई छोड़ कर घरे चले जाएंगे और अपनी मां की देखभाल करें। लेकिन उस वक्त उनके चाचा ने उनका साथ दिया और उनसे पढ़ाई जारी रखने के लिए कहा तथा यह भी भरोसा दिलाया कि वो उनकी मां की देखभाल करेंगे।

आज हम जिस हिमांशु नागपाल की कहानी आपको बता रहे हैं उन्होंने जिंदगी में कई दुख झेले, समय-समय पर कड़वे अनुभवों से दो-चार हुए और फिर मेहनत कर IAS बन अपने पिता और घर के अन्य सदस्यों का मान बढ़ाया था। उनकी कहानी आज युवाओं के लिए बेहद प्रेरणादायक है। हरियाणा के हिसार जिले के भूना में जन्में हिमांशु नागपाल ने कक्षा पांचवीं तक हिंदी मीडियस से पढ़ाई की थी। इसके बाद वो हंसी चले गये जहां 12वीं तक उन्होंने हिंदी मीडियम में ही पढ़ाई की। यहां तक उनकी जिंदगी एक आम छात्र की जिंदगी की तरह ही चल रही थी। लेकिन जब वो दिल्ली पढ़ने के लिए आए तब उनका सामना जिंदगी के कुछ कड़वे अनुभवों से हुआ और फिर उन्होंने यूपीएससी की तैयारी शुरू कर दी।

पिता और भाई के निधन के बाद जैसे-तैसे खुद को संभालते हुए हिमांशु ने यूपीएससी की परीक्षा देने का फैसला किया। एक दिक्कत फिर आई कि उनकी अंग्रेजी ज्यादा मजबूत नहीं थी। कमजोर अंग्रेजी की वजह से कई बार हिमांशु का मजाक भी उड़ाया गया। लेकिन हिमांशु अपने लक्ष्य को लेकर अडिग रहे। हिमांशु ने कड़ी मेहनत के जरिए ना सिर्फ अपनी अंग्रेजी सुधारी बल्कि यूपीएससी परीक्षा की बेहतरीन तरीके से तैयारी भी की। 22 साल की उम्र में हिमांशु नागपाल यूपीएससी की परीक्षा पास कर आईएएस अफसर बन गये।