गुजरात के काठियावाड़ जिले के एक लड़के का एक नाम कभी काफी चर्चा में हुआ करता था। कुछ लोग उसे रॉबिनहुड मानते थे तो कुछ उसे बड़ा जुल्मी डकैत। आज हम बात कर रहे हैं डकैत भूपत सिंह चौहान की। साल 1920 के आसपास भूपत सिंह चौहान वागनिया दरबार में घोड़ों की देखरेख का काम किया करता था। वो इन घोड़ों को ट्रेनिंग भी देता था। भूपत अक्सर राजा के साथ शिकार खेलने भी जाता था लिहाजा उसने बंदूक चलाना भी सीख लिया था। इसी बाच वागनिया दरबार पर 9 लाख रुपए की चोरी का इल्जाम लगा और इसमें भूपत को भी आरोपी बना दिया गया।
कहा जाता है कि यह आरोप जानबूझ कर अंग्रेजों ने लगाए थे ताकि भूपत औऱ राजा को जेल में बंद किया जा सके। भूपत यह समझ चुका था कि झूठे इल्जाम में फंसने के बाद उसे जेल की सजा हो जाएगी। इसी दौरान उसकी मुलाकात राणा भगवान डांगर नाम के एक शख्स से हुई। कहा जाता है कि दोनों के बीच पुरानी दोस्ती थी। राणा अपनी बहन की अस्मत लुटने वालों और अपने पिता के हत्यारों से बदला लेने की आग में पहले से ही जल रहा था। भूपत ने अपने दोस्त राणा के साथ हुई नाइंसाफी का बदला लेने के लिए उसका साथ देना शुरू कर दिया। इन दोनों ने मिलकर गैंग बनाया जो आगे चल कर 42 डाकुओं की टोली बन गई।
कहते हैं कि पहली बार भूपत सिंह चौहान उस वक्त चर्चा में आया जब उसने वडोदरा के शासक गायकवाड़ को खत लिख कर गरीबों को उनका हक देने के लिए उन्हें धमकाया औऱ उसकी बात नहीं मानने पर परिवार के सभी सदस्यों की हत्या की धमकी दी थी। इस खत के आखिरी में नाम लिखा था भूपत सिंह चौहान। राजा-रजवाड़े ही नहीं, अंग्रेज भी उसकी हुंकार सुनकर कांपते थे। अंग्रेजी शासन ख़त्म होने के बाद भी उसका आतंक थमा नहीं। भारत सरकार भी भूपत को पकड़ने में असमर्थ रही थी।
कहते हैं कि भूपत, गद्दारी करने वाले लोगों को जान से नहीं मारता था बल्कि उनके नाक औऱ कान काट लेता था। भूपत ने 40 से ज्यादा लोगों के साथ ऐसी क्रूरता की थी। 87 हत्याओं के साथ 8 लाख 40 हजार की लूट भूपत और उसकी गैंग के नाम दर्ज हो गयी थी। कहा जाता है कि भूपत अमीर लोगों को लूट कर गरीबों में पैसे भी बांटता था।
कहा जाता है कि 60 के दशक में कुछ ऐसी परिस्थितियां बनीं कि भूपत कुछ समय के लिए कच्छ से पाकिस्तान चला गया। पाकिस्तान की सेना ने उसे गिरफ्तार कर लिया और उसे घुसपैठ के आरोप में जेल भेज दिया। उसे एक साल की सजा सुनाई गई, लेकिन सजा पूरी होने के बाद भूपत वापस भारत नहीं आया और वहीं स्थायी तौर पर रहने लगा।
कुछ लोगों का यह भी दावा है कि पाकिस्तान में उसने मुस्लिम धर्म अपना लिया और नाम बदल कर रख लिया अमीन युसुफ। धर्म परिवर्तन के बाद उसने वहीं एक मुस्लिम लड़की से निकाह किया। उसके चार बेटे और दो बेटियां हुईं। वह पाकिस्तान से भारत आना चाहता था, लेकिन उसकी यह इच्छा पूरी नहीं हुई। उसने पाकिस्तान की धरती पर ही 2006 में दुनिया से विदा ले ली।
