अंडरवर्ल्ड के सबसे बड़े माफिया दाऊद इब्राहिम का नाम सुनते ही अच्छे-अच्छे माथे का पसीना पोंछना भूल जाते हैं। लेकिन आज बात इस सबसे बड़े डॉन की जिसने कभी दाऊद इब्राहिम से भी वसूली कर अंडरवर्ल्ड की दुनिया में तहलका मचा दिया था। हम बात कर रहे हैं फजल उल रहमान उर्फ फजलू की। पूरे देश भर में फजलू पर 40 मामले दर्ज हैं और उसका खौफ इतना है कि एक बार तो दाऊद भी उसकी धमकी से थर्रा उठा था और चुपचाप उसे पैसे देकर अपनी जान बचाई थी।
कहा जाता है कि मूल रूप से बिहार का रहने वाला फजल उल रहमान जरायम की दुनिया के शातिर अपराधी जमील खान के साथ काम करता था। जमील की संगति में उसकी मुलाकात बबलू श्रीवास्तव और इरफान गोगा जैसे बड़े गैंगस्टरों से हुई और फिर इसके बाद उसने कभी भी पीछे मुड़ कर नहीं देखा। देखते ही देखते फजल उल रहमान इरफान गोगा के नजदीक आया और फिर वो बन गया फजलू।
उस वक्त मायानगरी में इरफान गोगा और फजूल के नाम का सिक्का चलता था। बात साल 1995 की है जब इरफान ने दुबई से फोन कर फजलू को बताया कि ‘मैं दाऊद इब्राहिम के बहनोई हामिद अंतुले को उगाही के लिए फोन कर रहा हूं। तुम हैदराबाद जाओ और अपने स्थानीय नेटवर्क के जरिए हामिद से संपर्क कर उसे फिरौती की रकम देने के लिए कहो।’
सिर पर गोगा का हाथ होने की वजह से फजलू किसी से नहीं डरता था। जब फजलू ने हामिद से फिरौती की डिमांड की तो उसने दाऊद को फोन कर इस बात की जानकारी दी। दाऊद ने तुरंत अपने भाई अनीस से कहा कि वो फजलू को ऐसा करने से रोके। लेकिन जब अनीस ने फजलू से बातचीत की तो उसने उससे साफ कह दिया कि ‘तुम मेरे बॉस नहीं हो…मेरा बॉस इरफान गोगा है।’ फजलू का खौफ मुंबई में इतना था कि आखिरकार दाऊद ने अपने बहनोई तक 50 लाख रुपए भिजवाए और फिर यह रकम दाऊद के बहनोई ने फजलू के हवाले कर अपना पीछा छुड़वाया।
अंडरवर्ल्ड के सबसे बड़े बॉस से फिरौती वसूलने के अलावा फजलू पर आरोप है कि उसने साल 1998 में अपने साथी के साथ मिलकर बड़े उद्योगपति गौतम अडाणी का गांधीनगर हाईवे पर अपहरण किया था और करीब 15 करोड़ रुपए की फिरौती भी वसूली थी। इतना ही नहीं विशाल एक्सपोर्ट और मशहूर बाघ-बकरी चाय वालों से रंगदारी वसूलने का आरोप भी फजलू पर है।
फजलू साल 1998 में दुंबई गया था। साल 2003 तक यहां रहने के बाद यहां की पुलिस ने माफियाओं के खिलाफ अभियान चलाया और फिर फजलू दुबई से निकलकर थाईलैंड चला गया। लेकिन कुछ ही महीने बाद वो थाइलैंड से नेपाल गया और फिर जब वो वहां से भारत आया। साल 2005 के बाद फजलू के बुरे दिन शुरू हुए।
एक व्यवसाई से रंगदारी मांगने और इनकार करने पर उसके गुर्गों द्वारा व्यवसाई को गोली मारने के बाद पुलिस ने उसे दबोच लिया। फजलू पर मकोका लगाया गया है और वो काफी दिनों से जेल में बंद है। कहा तो यह भी जाता है कि आतंकी संगठन इंडियन मुजाहिद्दीन के कुछ शार्गिदों से भी फजलू की दोस्ती थी। हालांकि उसपर किसी आतंकी गतिविधि में शामिल होने का आरोप नहीं है। (और…CRIME NEWS)
