इस लड़की के पिता केपी सिंह पुलिस उपाधीक्षक थे और उनकी मां विभा सिंह वाराणसी ट्रेजरी में नौकरी करती थी। एक दिन डीएसपी केपी सिंह एक एनकाउंटर में मारे गये और आरोप लगा कि यह एक फेक एनकाउंटर था जिसमें उनकी जान चली गई। अपने पति की मौत के बाद गुनहगारों को सजा दिलाने के लिए विभा सिंह सुप्रीम कोर्ट तक गईं और उन्होंने कार्रवाई की मांग की। मां कानूनी लड़ाई लड़ते-लड़ते थक सी जाती है, इसके बाद बेटी किंजल अपनी मां से वादा करती है और यह प्रतिज्ञा लेती है कि वो अपने पिता के मुजरिमों से बदला लेकर रहेगी। इसके बाद वो यूपीएससी सिविल सर्विस परीक्षा की तैयारी शुरू कर देती हैं। केपी सिंह भी चाहते थे कि उनकी बेटी एक आईएएस अफसर बने। पिता के सपने को बेटी ने सच साबित किया और एक आईएएस अफसर बनीं। इतना ही नहीं अफसर बनने के बाद उन्होंने अपने पिता के मुजरिमों को उनके अंजाम तक भी पहुंचाया।

मां के निधन के बाद किंजल दिल्ली चली आईं औऱ अपने साथ अपनी छोटी बहन प्रांजल सिंह को भी ले आईं। मुखर्जी नगर में फ्लैट किराए पर लेकर दोनों बहनें आईएएस की तैयारी में लग गईं। इस दौरान किंजल के मौसा-मौसी ने हमेशा दोनों बहनों का ख्याल रखा। हॉस्टल में त्याहारों के समय सारी लड़कियां अपने-अपने गांव निकल जाया करती थी लेकिन इन दोनों बहनों ने बिना वक़्त जाया किये दिन-रात एकजुट होकर आइएएस की तैयारी की। तमाम मुसीबतों का डटकर मुकाबला करते हुए किंजल दिल्ली यूनिवर्सिटी में टॉप करते हुए गोल्ड मेडलिस्ट बनीं।

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दोनों ही बेटियों ने साल 2007 में यूपीएससी की परीक्षा पास कर ली। किंजल को 25वां रैंक हासिल हुआ तो प्रांजल को 252वां रैंक। किंजल ने दूसरी बार में सफलता हासिल की थी। पिता को न्याय दिलाने की मां की अधूरी लड़ाई का मशाल अपने हाथों में लेते हुए दोनों बहनों ने अपनी गूंज से न्यायपालिका को हिला दिया। उत्तर प्रदेश में एक विशेष अदालत ने केपी सिंह की हत्या करने के आरोप में तीन पुलिसवालों को फांसी की सजा सुनाई तभी से शुरु हुआ न्याय के लिए लंबा संघर्ष। किंजल सिंह को देर से ही सही लेकिन न्याय मिला।

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31 साल तक जद्दोजहद के बाद 5 जून, 2013 को लखनऊ में सीबीआइ की विशेष अदालत ने अपना फैसला सुनाते हुए केपी सिंह की हत्या के आरोप में 18 पुलिसवालों को दोषी ठहराया। आज किंजल सिंह देश की एक ईमानदार और सख्त आईएएस अफसर के रूप में जानी जाती हैं लेकिन इस मुकाम तक पहुंचना उनके लिए आसान नहीं था। महज छह माह में पिता को खो देने के बावजूद किंजल ने परिस्थितियों से लड़ना सीखा और खुद की बदौलत आईएएस बनीं तथा अपनी बहन को भी प्रशासनिक अफसर बना अपनी मां के सपने को साकार किया। जाहिर है किंजल की कहानी किसी फिल्मी स्क्रिप्ट से कम नहीं।