हरियाणा के बहादुरगढ़ के एक साधारण परिवार में जन्मीं प्रीति हुड्डा के पिता दिल्ली परिवहन निगम (DTC) की बस चलाते थे। पेशे से ड्राइवर पिता का सपना था कि उनकी बेटी एक आईएएस अफसर बने। पिता अपनी बेटी को पढ़ाने के लिए जी-तोड़ मेहनत करते थे और बेटी ने भी पिता का सपना पूरा करने के लिए अपनी सारी ताकत झोंक दी। हम बात कर रहे हैं लंबे संघर्ष के बाद आईएएस अफसर बनीं प्रीति हुड्डा की।

एक साक्षात्कार में प्रीति हुड्डा ने कहा था कि ‘मैंने बचपन में कभी नहीं सोचा था कि सिविल सेवा की तैयारी करूं। इतने आगे तक पढ़ाई करने वाली मैं अपने परिवार की पहली लड़की हूं। पापा का सपना था कि मैं आईएएस बनूं। फिर मैं जेएनयू आई और यहां इस बारे में ज्यादा पता चला कि तैयारी कैसे की जाए…मैंने ये तैयारी एमफिल के बाद शुरू की। मेरा जब यूपीएससी का रिजल्ट आया, तब पापा डीटीसी की बस चला रहे थे…पापा बहुत खुश हुए थे।’

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साल 2017 में प्रीति हुड्डा ने आईएएस की परीक्षा पास की थी। दिल्ली के जवाहर लाल नेहरू यूनिवर्सिटी से हिंदी में पीएचडी की थी। प्रीति के अनुसार, उनका आईएएस का इंटरव्यू लगभग 35 मिनट तक चला था, इस दौरान उन्होंने अपने आत्मविश्वास को कम नहीं होने दिया था। प्रीति ने एक बार बताया था कि उनके पिता कभी भी उनकी बड़ाई नहीं किया करते थे। जब उनके आईएएस बनने की खबर उनके पिता को मिली थी तब उन्होंने पहली बार उनसे कहा था कि ‘शाबाश मेरा बेटा।’

प्रीति हुड्डा बचपन से ही पढ़ाई-लिखाई में काफी मेधावी थीं। प्रीति ने 10वीं में 77 प्रतिशत और 12वीं में 87 प्रतिशत हासिल किए थे। उसके बाद उन्होंने लक्ष्मी बाई कॉलेज, दिल्ली से हिंदी में बैचलर ऑफ आर्ट में 76 प्रतिशत प्राप्त किए थे। प्रीत‍ि ने यूपीएससी परीक्षा ह‍िन्‍दी में दी और इंटरव्‍यू में भी उन्‍होंने ह‍िन्‍दी भाषा में ही बात की। यूपीएससी में अपने इंटरव्यू को लेकर प्रीति ने एक बार कहा था कि ‘आप ज‍िस भाषा में आत्‍मविश्‍वास महसूस करते हैं, उसी भाषा में परीक्षा दें और उसी भाषा के साथ इंटरव्‍यू में शामिल हों।’

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संघर्ष से IAS बनने वाली प्रीति ने कहा था कि यूपीएससी की तैयारी करने का अर्थ यह नहीं है क‍ि आप मनोरंजन भी ना करें। तैयारी को बोझि‍ल बनाने की बजाय, उसे रोचक बनाना ज्‍यादा जरूरी है। सिविल परीक्षा की तैयारी करते हुए प्रीत‍ि ने कई बार फ‍िल्‍में देखीं और वह दोस्‍तों के साथ घूमने भी गईं, लेक‍िन इसका असर उनकी पढ़ाई पर नहीं हुआ।