Delhi Gangrape Case 2012: दिल्ली के वीभत्स गैंगरेप केस में हाईकोर्ट ने साफ कर दिया है कि इस केस में दोषी ठहराए गए सभी चारों को एक साथ ही फांसी दी जाएगी। अदालत ने साथ ही साथ यह भी साफ कर दिया है कि सभी आरोपी एक हफ्ते के अंदर अपने सभी कानूनी विकल्पों का इस्लेमाल कर लें। अब सवाल यह है कि इस केस के सभी चार दोषियों के पास क्या-क्या विकल्प बचे हैं?

मुकेश सिंह के पास कोई विकल्प नहीं: सबसे पहले आपको बता दें कि इस मामले में फांसी की सजा पाने वाले मुकेश सिंह के बचने के सारे रास्ते अब बंद हो चुके हैं। जी हां, इस केस में अब मुकेश के पास गिनती के ही दिन बचे हैं।

मुकेश सिंह ने दया याचिका खारिज किये जाने के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अर्जी दाखिल की थी लेकिन उसकी यह अर्जी भी खारिज हो चुकी है। मुकेश सिंह की पुनर्विचार याचिका जुलाई 2018 में खारिज हुई थी। उसका क्यूरेटिव पिटिशन भी खारिज हो चुका है।

इस दोषी के पास 3 मौके: फांसी की सजा से बचने के लिए सबसे ज्यादा मौके पवन के पास ही हैं। पवन ने अब तक क्यूरेटिव पिटिशन दाखिल नहीं किया है। पवन की पुनर्विचार याचिका साल 2018 में खारिज हुई थी। लिहाजा उसके पास क्यूरेटिव पिटिशन और दया याचिका का ऑप्शन है।

अक्षय ठाकुर के पास 1 मौका: इस केस में दोषी ठहराए गए अक्षय ठाकुर ने अभी दया याचिका दायर नहीं की है। इसके अलावा विनय शर्मा की पुनर्विचार याचिका जुलाई 2018 में खारिज हो गई थी। जबकि उसकी क्यूरेटिव पिटिशन जनवरी 2020 में खारिज हुई थी। विनय शर्मा के पास भी दया याचिका का विकल्प बचा हुआ है।

इस मामले में पीड़ित परिवार और कई अन्य लोग लगातार यह आरोप लगा रहे थे कि सभी दोषी जानबूझ कर अपने कानूनी अधिकारों का बारी-बारी इस्तेमाल कर रहे हैं ताकि वो ज्यादा से ज्यादा समय तक फांसी की सजा से बच सकें। लेकिन अब इन सभी दोषियों को हफ्ते भर के अंदर अपने सभी विकल्पों का इस्तेमाल करना होगा।